Badrinath Donation Controversy: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे और दान की गिनती में कथित अनियमितताओं के मामले में पुलिस ने पहली गिरफ्तारी कर ली है. जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर मंदिर समिति से जुड़े कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को उनके घर से गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें बद्रीनाथ लाकर पूछताछ की जा रही है. इस मामले ने धार्मिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हलचल मचा दी है. पुलिस के साथ-साथ मंदिर समिति और सरकार की ओर से गठित अलग-अलग टीमें भी पूरे प्रकरण की जांच में जुटी हुई हैं.
जांच के बाद पुलिस ने की कार्रवाई
चमोली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) सुरजीत सिंह पंवार के अनुसार, रविवार देर रात पुलिस टीम ने प्रमोद नौटियाल को हिरासत में लिया. इसके बाद उन्हें बद्रीनाथ थाने लाया गया, जहां मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.
दान की गिनती के दौरान लगे थे गंभीर आरोप
प्रमोद नौटियाल मंदिर समिति के अध्यक्ष के निजी सहायक (पीए) के पद पर कार्यरत थे. हालांकि उनकी नियुक्ति इस पद पर थी, लेकिन उन्हें बद्रीनाथ मंदिर में प्रोटोकॉल व्यवस्था और दान की गिनती जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं. 2 जुलाई 2026 को भैरव सेना की ओर से आरोप लगाया गया था कि दान की गणना के दौरान चढ़ावे की रकम में हेराफेरी की गई. आरोप यह भी था कि पूरी घटना मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है.
सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद हुआ निलंबन
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर समिति के अध्यक्ष की अनुशंसा पर समिति के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) ने चार सदस्यीय विभागीय जांच समिति का गठन किया. जांच दल ने बद्रीनाथ पहुंचकर सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, दस्तावेजों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की. प्रारंभिक जांच में प्रमोद नौटियाल पर संदेह जताए जाने के बाद 7 जुलाई 2026 को उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.
एफआईआर दर्ज होने के बाद हो गए थे लापता
निलंबन के कुछ घंटे बाद ही मंदिर समिति के प्रभारी मंदिर अधिकारी ने बद्रीनाथ थाने में प्रमोद नौटियाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. इसके आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी. बताया जा रहा है कि 8 जुलाई से प्रमोद नौटियाल बद्रीनाथ से गायब हो गए थे और उनका मोबाइल फोन भी बंद था. इसी दौरान उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और संभावित गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए हाईकोर्ट का भी रुख किया.
18 पन्नों की रिपोर्ट में कई अहम दावे
मंदिर समिति की चार सदस्यीय जांच टीम ने 11 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट मुख्य कार्याधिकारी को सौंप दी. 18 पन्नों की इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि 2 जुलाई 2026 को दान की गिनती के दौरान आरोपी को एक से अधिक बार पैसों में कथित हेराफेरी करते हुए देखा गया. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि 29 जून 2026 की रिकॉर्डिंग में भी प्रमोद नौटियाल के पास ऐसी गतिविधि दिखाई दी, जिसमें उनके हाथ में नकदी जैसी वस्तु नजर आई. हालांकि इन निष्कर्षों की पुष्टि अंतिम जांच पूरी होने के बाद ही होगी.
सरकार की टीम भी कर रही है स्वतंत्र जांच
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने भी कमिश्नर की अध्यक्षता में एक अलग जांच समिति का गठन किया है. यह समिति पूरे घटनाक्रम, मंदिर में दान प्रबंधन की प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की स्वतंत्र जांच कर रही है. सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
नियुक्ति और जिम्मेदारियों पर भी उठे सवाल
प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति वर्ष 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के रूप में हुई थी. बाद में उन्हें पदोन्नति देकर वर्ष 2018 में मंदिर समिति के अध्यक्ष का निजी सहायक बनाया गया. इसके अलावा उन्हें बद्रीनाथ मंदिर में प्रोटोकॉल व्यवस्था और थाली भेंट व दान की गिनती जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं. अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद उनकी नियुक्ति और अतिरिक्त जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं.
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