विजयादशमी पर क्यों की जाती है अस्त्र-शस्त्रों की पूजा? क्या जानते हैं आप इसके पीछे का महत्व

दशहरा, यानी विजयादशमी, सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में असत्य पर सत्य की जीत का महापर्व है. इसी दिन आयुध पूजा या शस्त्र पूजा का भी विशेष महत्व होता है. हर साल की तरह इस बार भी यह पूजा खास मुहूर्त में की जाएगी.

Ayudha Puja 2025 Date know shubh muhurat and importance
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दशहरा, यानी विजयादशमी, सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में असत्य पर सत्य की जीत का महापर्व है. इसी दिन आयुध पूजा या शस्त्र पूजा का भी विशेष महत्व होता है. हर साल की तरह इस बार भी यह पूजा खास मुहूर्त में की जाएगी. साल 2025 में विजयादशमी 2 अक्टूबर को पड़ रही है. आइए जानें कि आयुध पूजा क्यों की जाती है, इसका क्या महत्व है और कब है इसका शुभ समय.

आयुध पूजा का शाब्दिक अर्थ है. हथियारों या औजारों की पूजा. यह परंपरा दशहरे के दिन निभाई जाती है, खासतौर पर दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में यह व्यापक रूप से मनाई जाती है. इस पूजा में केवल अस्त्र-शस्त्र नहीं, बल्कि जिन-जिन साधनों से हम आजीविका या कार्य करते हैं, जैसे — पुस्तकें, औज़ार, वाहन, मशीनें आदि, उनकी भी पूजा की जाती है.

क्यों की जाती है शस्त्र पूजा?

इस पूजा के पीछे भाव यह है कि जिन उपकरणों से हम जीवन में आगे बढ़ते हैं, वे पूजनीय हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने रावण का वध दशहरे के दिन किया था. मां दुर्गा ने इसी दिन महिषासुर का अंत किया था. दोनों ही युद्धों में शस्त्रों का प्रयोग हुआ, और उसी परंपरा को आज तक निभाया जाता है — विजय की कामना और साधनों का सम्मान.

आज भी ज़िंदा है परंपरा

  • विद्यार्थी अपनी किताबों की पूजा करते हैं.
  • व्यापारी बही-खातों और कंप्यूटर की पूजा करते हैं.
  • कलाकार ब्रश, कैमरा या वाद्य यंत्रों को पूजते हैं.
  • सैनिक और पुलिसकर्मी हथियारों की पूजा करते हैं. यह परंपरा बताती है कि साधन ही साध्य की ओर ले जाते हैं, और उनका सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है.

क्षत्रिय परंपरा और आयुध पूजा

प्राचीन काल में राजा और योद्धा इस दिन युद्ध से पहले अपने अस्त्र-शस्त्र की पूजा कर उन्हें युद्ध के लिए तैयार करते थे. यह विजय की शुरुआत मानी जाती थी. आज भी यह परंपरा सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों में निभाई जाती है.

विजयादशमी 2025: कब करें आयुध पूजा?

  • विजयादशमी तिथि शुरू: 1 अक्टूबर 2025, शाम 7:01 बजे
  • तिथि समाप्त: 2 अक्टूबर 2025, शाम 7:10 बजे

शस्त्र पूजा / विजय मुहूर्त:

  • 2 अक्टूबर 2025 (गुरुवार), दोपहर 2:09 बजे से 2:56 बजे तक
  • कुल समय: 47 मिनट इस समयावधि में पूजा करना अति शुभ माना गया है.

आयुध पूजा कैसे करें? (विधि)

सबसे पहले जिन औजारों, शस्त्रों या पुस्तकों की पूजा करनी है, उन्हें साफ करें. पूजा स्थल पर लाल कपड़ा बिछाएं और वस्तुएं रखें.उन पर गंगाजल छिड़कें और रोली, चंदन, कुमकुम से तिलक करें. फूल, माला, वस्त्र अर्पित करें. नैवेद्य (मिठाई या फल) का भोग लगाएं. धूप-दीप जलाकर आरती करें, और सफलता, सुरक्षा, और विजय की कामना करें.


Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. भारत 24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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