Asteroid 2024 Yr4: अंतरिक्ष हमेशा से रहस्यों और संभावित खतरों से भरा रहा है. ग्रहों के बीच घूमते एस्टेरॉयड को लेकर वैज्ञानिक समय-समय पर चेतावनी देते रहे हैं, क्योंकि इनका एक छोटा सा विचलन भी पृथ्वी के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है. अब वैज्ञानिकों की नजर एक ऐसे एस्टेरॉयड पर टिकी है, जो सीधे धरती से नहीं, बल्कि चांद से टकरा सकता है. भले ही यह टक्कर पृथ्वी पर न हो, लेकिन इसके असर पूरी मानव सभ्यता तक महसूस किए जा सकते हैं.
क्या पृथ्वी को सीधा खतरा है?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस एस्टेरॉयड का सीधा टकराव धरती से नहीं होने वाला है, लेकिन असली चिंता इसकी अप्रत्यक्ष मार को लेकर है. अगर यह चांद से टकराता है, तो टक्कर के बाद निकलने वाला मलबा अंतरिक्ष में फैल सकता है. यह मलबा पृथ्वी की कक्षा में मौजूद सैटेलाइट्स के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. सैटेलाइट्स को नुकसान पहुंचने पर संचार सेवाएं बाधित हो सकती हैं और मौसम पूर्वानुमान, निगरानी और नेविगेशन सिस्टम पर भी असर पड़ सकता है. इसी वजह से वैज्ञानिक इस एस्टेरॉयड की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं.
चांद से टकराने की आशंका क्यों बढ़ा रही चिंता
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस एस्टेरॉयड की चर्चा हो रही है उसका नाम 2024 YR4 है. इसका आकार करीब 60 मीटर बताया जा रहा है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 22 दिसंबर 2032 को इसके चांद से टकराने की संभावना लगभग 4 प्रतिशत है. यह प्रतिशत भले ही कम लगे, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर टक्कर हुई तो इसका प्रभाव इतना शक्तिशाली होगा कि पूरी दुनिया का ध्यान इस ओर खिंच जाएगा.
परमाणु बम जितनी ऊर्जा का विस्फोट
चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी से जुड़े वैज्ञानिकों के एक रिसर्च पेपर में बताया गया है कि यदि 2024 YR4 चांद से टकराता है, तो उससे निकलने वाली ऊर्जा एक मध्यम आकार के परमाणु बम के विस्फोट के बराबर हो सकती है. आधुनिक युग में यह चांद पर होने वाली सबसे शक्तिशाली टक्कर मानी जाएगी. इस तरह की घटना वैज्ञानिकों के लिए ऐतिहासिक होगी, क्योंकि इससे चंद्र सतह और उसकी संरचना को समझने का दुर्लभ मौका मिलेगा.
टक्कर हुई तो चांद पर क्या बदलेगा
वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक, एस्टेरॉयड की टक्कर से चांद की सतह पर करीब एक किलोमीटर चौड़ा गड्ढा बन सकता है. इसके साथ ही चंद्रमा पर लगभग 5 मैग्नीट्यूड तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया जा सकता है. यह भूकंप चांद की अंदरूनी संरचना से जुड़े अहम संकेत देगा, जिनका अध्ययन अब तक सीमित रहा है. इस लिहाज से यह घटना विज्ञान के लिए जितनी खतरनाक है, उतनी ही उपयोगी भी साबित हो सकती है.
धरती तक कैसे पहुंच सकता है असर
टक्कर के बाद अंतरिक्ष में फैला मलबा कुछ समय बाद पृथ्वी की ओर भी बढ़ सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मलबा खास तौर पर दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में गिर सकता है. हालांकि, अधिकतर कण वायुमंडल में जल जाएंगे, लेकिन इनकी संख्या असाधारण रूप से ज्यादा हो सकती है.
सैटेलाइट्स पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा
सिमुलेशन स्टडी से संकेत मिले हैं कि इस घटना के बाद हर घंटे लाखों सूक्ष्म उल्कापिंड पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकते हैं. इससे एक गंभीर खतरा पैदा हो सकता है जिसे वैज्ञानिक केसलर सिंड्रोम कहते हैं. इसके तहत अंतरिक्ष में मौजूद मलबा एक-दूसरे से टकराकर चेन रिएक्शन शुरू कर सकता है, जिससे सैटेलाइट नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है. यदि ऐसा हुआ तो वैश्विक संचार, GPS और नेविगेशन सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं.
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