Arundhati Choudhary Wins Gold: ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय मुक्केबाजों का शानदार प्रदर्शन जारी है. भारत की युवा बॉक्सर अरुंधति चौधरी ने महिलाओं की 70 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है.
अरुंधति की इस जीत के साथ भारत की पदक तालिका में स्थिति और मजबूत हो गई है. अब भारत के खाते में कुल 34 पदक हो गए हैं, जिनमें 11 स्वर्ण, 15 रजत और 8 कांस्य पदक शामिल हैं.
फाइनल में इंग्लैंड की खिलाड़ी को हराया
फाइनल मुकाबले में अरुंधति चौधरी का सामना इंग्लैंड की चैंटल रीड से हुआ. मुकाबले की शुरुआत से ही अरुंधति ने आक्रामक खेल दिखाया और अपने शानदार फुटवर्क व सटीक पंचों से विरोधी खिलाड़ी पर दबाव बनाए रखा.
तीसरे दौर में उन्होंने पूरी तरह मुकाबले पर पकड़ बना ली. आखिर में सभी जजों ने 5-0 के फैसले से अरुंधति को विजेता घोषित किया और भारत की झोली में एक और गोल्ड मेडल आ गया.
भारतीय मुक्केबाजों का शानदार प्रदर्शन
शाम के सत्र में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया. तीन मुकाबलों में भारतीय मुक्केबाजों ने तीनों मैच अपने नाम किए. अब तक खेले गए पहले छह फाइनल मुकाबलों में भारत ने पांच गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतकर बॉक्सिंग में अपना दबदबा कायम रखा है.
बास्केटबॉल से शुरू हुआ खेल का सफर
अरुंधति चौधरी की खेल यात्रा बॉक्सिंग से नहीं, बल्कि बास्केटबॉल से शुरू हुई थी. उनके पिता सुरेश के अनुसार, अरुंधति बचपन से पढ़ाई और खेल दोनों में अच्छी थीं. जब वह कोटा के स्प्रिंग डेल स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ती थीं, तब स्कूल की बास्केटबॉल टीम की कप्तान थीं. उनकी कप्तानी में स्कूल टीम ने जिला और राज्य स्तर की कई प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन किया.
खुद चुना बॉक्सिंग का रास्ता
बास्केटबॉल में सफलता मिलने के बाद अरुंधति ने व्यक्तिगत खेल में करियर बनाने का फैसला किया. उन्होंने अपने पिता से अपनी इच्छा जताई और उनकी सलाह पर बॉक्सिंग को चुना. उस समय कोटा में बॉक्सिंग के लिए अच्छी सुविधाएं और अनुभवी कोच उपलब्ध नहीं थे. इसके बावजूद अरुंधति ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं.
मेहनत और परिवार के साथ ने दिलाई सफलता
शुरुआती मुश्किलों के बावजूद अरुंधति ने अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान रखा. परिवार का पूरा साथ मिला और उन्होंने कड़ी मेहनत जारी रखी. आज उसी मेहनत का नतीजा है कि अरुंधति चौधरी ने राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का नाम दुनिया भर में रोशन कर दिया.
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