महिला आरक्षण, बंगाल चुनाव... भारत 24 के मंच पर विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने हर सवाल का दिया जवाब

भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Viksit Bharat Leadership Summit 2026' में केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शिरकत की. इस दौरान केंद्रीय मंत्री से देश की न्यायिक व्यवस्था, आगामी चुनाव समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. 

Arjun ram Meghwal Exclusive Viksit Bharat Leadership Summit 2026 Bharat 24
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नई दिल्ली: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Viksit Bharat Leadership Summit 2026' में केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शिरकत की. इस दौरान केंद्रीय मंत्री से देश की न्यायिक व्यवस्था, आगामी चुनाव समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. 

सवाल: बजट सत्र लगभग खत्म होने की कगार पर है. एक परसेप्शन बन गया है कि सत्र होगा तो शुरू के 10 दिन तो सत्र नहीं चल पाएगा. वहां पर संवाद की कमी आपको लगती है. ये टकराव क्यों हो रहा है? और इस बार भी देखा गया कि विपक्ष इतने नाराज हुए कि लोकसभा स्पीकर के लिए अविश्वास प्रस्ताव तक ले आए. फिर अभी पिछले 10 दिन से सत्र चल रहा है. आपकी एक मुख्य भूमिका है. सर वजह क्या मानते हैं? क्योंकि संसद चलाना सरकार के लिए उतनी बड़ी जिम्मेदारी है जितनी वे पक्ष की हैं. 

जवाब: जब सत्र शुरू होता है तो हम एक फ्लोर लीडर जो होते हैं ऑल पार्टी के उनके साथ एक बैठक करते हैं. उनको भी हमने बता दिया था कि यह मुद्दे आने वाले हैं. तो उन्होंने कहा ठीक है. अब जब एलओपी बोलने लगे तो उन्होंने सीधा एक ऐसी बुक का जिक्र किया जो प्रकाशित नहीं थी. वहीं से विवाद शुरू हुआ. उसमें स्पीकर साहब ने निर्णय दिया कि जो पुस्तक प्रकाशित नहीं है उसका कोट आप नहीं पढ़ सकते. तो उन्होंने मैगजीन दूसरे दिन मैगजीन पढ़ने लग गए. था वो बुक का ही पार्ट तो वो उनकी जिद्द हो गई. हमने काफी कोशिश की. हमारे यहां से बहुत सीनियर जो मंत्री थे उन उनका इंटरवेंशन इसमें रहा. लेकिन उन्होंने कहा एलओपी को अगर नहीं बोलने देंगे तो हम हाउस को नहीं चलने देंगे. हमने कहा यह संसद है नियमों से चलती है. इसलिए वो उनकी जिद के कारण वो अविश्वास प्रस्ताव तक मामला गया. 

फिर अविश्वास प्रस्ताव आया भी आपने देखा होगा और अविश्वास प्रस्ताव गिर भी गया. तो वो एक मुझे लगता है उनकी जिद थी जिसके कारण हाउस में कुछ डिस्टरबेंस आया. लेकिन फिर अब हाउस ठीक चल रहा है और हम लगातार उनको चर्चा कर रहे हैं. अभी फिर आज एक ऐसा विषय ले आ गए खाड़ी के संकट पे हम हाउस को नहीं चलने देंगे. हमने कहा भाई प्रधानमंत्री जी का स्टेटमेंट हो गया. हमने कहा ऑल पार्टी मीटिंग हो गई. हमने कहा पेट्रोलियम मिनिस्टर का सोमोटो एक स्टेटमेंट आपकी रिक्वेस्ट पर हो गया. उनका सीएम साहब का तो 100 मोटो हुआ और पेट्रोलियम मिनिस्टर का स्टेटमेंट एलओपी के रिक्वेस्ट पर हुआ उन्होंने डिमांड करी उसके बाद क्या रह गया और फिर भी अगर आप चाहते हो कि जो नक्सलवाद समाप्त हुआ है इस देश में उस पे चर्चा करने की बजाय पहले चर्चा उस पे करो तो ये जिद वाला विषय अगर विपक्ष अगर छोड़ दे तो हाउस बहुत अच्छा चल सकता है अभी भी हम कोशिश करेंगे कि वो जिद्द को छोड़े. 

सवाल: लोकतंत्र के मंदिर में ही जो नैरेटिव बनाने की कोशिश है विपक्ष की क्या हमें बोलने नहीं दिया जाता और लोकतंत्र मतलब संविधान मतलब फ्रीडम ऑफ टू एक्सप्रेस फ्रीडम ऑफ स्पीच तो एलओपी तो बार-बार ये नैरेटिव सेट कर चुके हैं कि मुझे बोलने नहीं दिया जाता. 

जवाब: ये जो नैरेटिव वो सेट कर रहे हैं ना वो गलत कर रहे हैं.लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि नियमों के तहत आप आप बोलिए. हमें हमें आपत्ति नहीं है. लेकिन ये संसद है. वो जो बुक्स निशिकांत दुबे जी का वो नाम लेते हैं. वो निशिकांत जी दुबे जी वो पुस्तकें लेके आए जो प्रकाशित थी. प्रकाशित थी. दोनों में फर्क समझ समझना चाहिए और जनता फर्क समझ रही है. जी उसके बाद वो डिफेंस में आ गए. कि आप निशिकांत जी के खिलाफ कारवाई करो. 

सवाल: किरण रिजेजू ने भी कहा कि अगर एलओपी राहुल नहीं होते प्रियंका होते तो ज्यादा बेहतर होता. आपको क्या लगता है एलओपी के लिए राहुल गांधी ज्यादा बेहतर है या प्रियंका गांधी?

जवाब: वो उनका व्यक्तिगत विचार था. मुझे उसमें कोई टिप्पणी नहीं करनी. 

सवाल: विपक्ष कह रहा है कि हमें ऑल पार्टी मीटिंग चाहिए महिला आरक्षण पर. महिला आरक्षण की बात आई संशोधन को लेकर आपसे और यहां लोग बैठे हैं जो समझना चाहते हैं कि आखिरकार महिला आरक्षण बिल पास हो चुका था. अब उसके संशोधन की बात है. आप छोटी-छोटी पार्टियों से बातचीत कर रहे हैं. आपको यह जिम्मेदारी दी गई है. अब वो विषय क्या है? पहले तो यह समझना चाहते हैं कि वो संशोधन आप 2026 की सेंसस से करेंगे या आप 2011 के लिए संशोधन करने के लिए करेंगे और अगर ऐसा है तो क्यों 2011? विपक्ष फिर कहेगा कि क्यों आप 2026 के सेंसस से नहीं कर रहे? फिर वहां पर टकराव आएगा. पहले तो यह समझना है कि क्या बातचीत चल रही है छोटी पार्टियों से?

जवाब: महिला रिजर्वेशन बिल जिसको हम नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहते हैं 2023 जब नई संसद भवन की बिल्डिंग बनी और संसद उसमें शिफ्ट हुई. जी. तो पहला बिल नारी शक्ति वधन अधिनियम ही आया. बिल्कुल आया सर सबने सपोर्ट किया लोकसभा में दो लोगों ने विरोध किया ओबीसी जी की पार्टी के और राज्यसभा में शतप्रिशत समर्थन था और लोकसभा में शत प्रतिशत जैसा ही था दो लोग उनके विरोध में थे वोटिंग किया उन्होंने के हम अलग में वोट करेंगे लेकिन पास हुआ अब लागू करना है तो आपने सही कहा सीटें तो बढ़ानी पड़ेगी ना बिल्कुल अभी अभी हमारा जो संविधान में जो सीटों की संख्या लिखी हुई है उसे तो हम नहीं कर सकते बढ़ानी पड़ेगी. बढ़ानी पड़ेगी तो हमें संविधान संशोधन करना पड़ेगा. और आपने कहा कि सेंसस के बाद की जो एक्टिविटी थी हमने बिल में पास करते समय कहा था सेंसस और डीलिमिटेशन कमीशन के बाद महिला रिजर्वेशन बिल लागू हो जाएगा. लेकिन आप समझ रहे हैं कि सेंसस लेट हुई. कोविड के कारण कुछ कोविड का विषय भी आया. अब सेंसस में एक विषय आ गया जातिगत जनगणना. अब वो हम आंकड़े लेंगे.

मैं एक उदाहरण देकर समझाता हूं. जैसे प्रकाश सिंह बादल वो तो इतना ही लिखेंगे ना प्रकाश सिंह बादल. मैं एक उदाहरण दे रहा हूं. अब उस बादल गांव में जो भी जाति का आदमी रहता है वह बादल ही लिखता है. हम तो यह बादल जट सिख है क्या? यह एससी है क्या? यह ओबीसी है क्या? यह कौन सा जाति का है? यह तो करना पड़ेगा ना जब आप जातिगत जनगणना करोगे. यह तो करना ही पड़ेगा ना. तब जब यह करना पड़ेगा तो उसमें समय लगेगा. तो हम 2029 में महिला आरक्षण के साथ लोकसभा का चुनाव हो. इस प्रयास में हमने बात की अपोजिशन से एक चीज पर अड़ गए अपोजिशन कांग्रेस हमने चिट्ठी लिखी उन्होंने चिट्ठी लिखी अब जो खड़गे जी की चिट्ठी आई है जो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं वो कह रहे हैं 29 अप्रैल के बाद हम ऑल पार्टी की मीटिंग बुलाओ ये फिर जिद है बिल्कुल हम कह रहे हैं समय कम है हम कह रहे हैं अभी डीलिमिटेशन को कम से कम 2 सवा दो साल समय लगेगा लगेगा कौन सी सीट महिला के लिए आरक्षण होगी कौन सी सीट पुरुष के लिए होगी यह तय तय करने का काम डीलिमिटेशन का है. तो समय लगेगा तो इसलिए समय पर आओ. उनको क्या लगता है कि नहीं अभी क्यों करो? 29 अप्रैल के बाद चुनाव हो जाएंगे पांचों राज्यों में उसके बाद करो. तो यह भी तो जिद हो गई ना. इसका पांचों राज्यों से क्या संबंध है महिला आरक्षण का?

सवाल: हमने उनसे बातचीत की तो उन्होंने ये दो चीजें कही. आपने काफी समझाया. मुझे एक चीज़ और समझनी है. डी लिमिटेशन कमीशन को जल्दी आप लोग गठित करने का प्रेशर कर रहे हैं. ऐसा उनकी तरफ से आरोप है. और दूसरा है कि 2019 में ही क्यों? आप आराम से सेंस कीजिए. कास्ट सेंस कीजिए 2034 में हो जाएगा महिला आरक्षण. 

जवाब: जब कोई एक्ट संसद ने पास कर दिया 2023 में तो लागू करना हमारी जिम्मेदारी नहीं है क्या? यह अगर ऐसा कह रहे हैं कांग्रेस वाले तो फिर महिलाओं के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं वो. हम तो उनको साफसाफ कहना चाहते हैं. आपने समर्थन किया 2023 एक्ट का अगर वह एक्ट बना है तो लागू भी होना चाहिए. उसमें छोटी-छोटी कुछ कमियां हैं. सीटों की संख्या बढ़ाने का विषय है संविधान में. जो हमें सेंसस का बेस लेना है. वो सेंसस का बेस अगर नहीं आती है जातिगत जनगणना तो बेस हमें 2001 का लेना है. यह कुछ सुधार हैं संविधान के संशोधन के वह हम करेंगे. तो उसके लिए हमें दो तिहाई बहुमत चाहिए. 

सवाल: सर आप कहां तक पहुंच गए? छोटी-छोटी पार्टियों से बात कर रहे.

जवाब: मुझे लगता है करीब करीब सभी दल जिनकी संख्या पांच सात 10 15 है वो करीब-करीब एग्री हैं. दो-तीन दल नहीं आए. वो कह रहे हैं कांग्रेस पार्टी से आप पहले बात करो. कांग्रेस पार्टी से भी हम बात कर रहे हैं. टीएमसी ने कहा कि हम चुनाव में बिजी हैं. हम लगातार संपर्क में हैं. हमारे एनडीए के जो साथी हैं उनके साथ भी गृह मंत्री जी बैठ चुके हैं. दूसरे दलों के साथ भी गृह मंत्री जी मैं किरण रिजू जी हम बैठ चुके हैं. लगातार इसमें चर्चा चल रही है.

सवाल: इसका यह मतलब है कि विपक्ष को इस बात का डर लग रहा है या यूं कहें कि देश में महिला वोट बैंक इतना जबरदस्त हो गया और अगला चुनाव बंगाल में है. वहां तो दीदी भी रिलाई कर रही है महिला वोट बैंक पर और यह भी माना जा रहा है कि मोदी जी को महिला वोट बैंक समर्थन देगा. तो ऐसे में विपक्ष को ये डर है कि अगर 29 तक हो जाता है तो महिला वोट बैंक तो पूरा बीजेपी के पास आ जाएगा और बंगाल का हालात क्या लगते हैं आपको?

जवाब: कब गीता मुखर्जी ने इस विषय को उठाया? कब सुषमा स्वराज ने इस विषय को उठाया? कब वृंदाकार ने इस विषय को उठाया? आप देखो तो सही. सभी पार्टियों के लोगों ने इस विषय को उठाया. 96 में देवगोड़ा जी इसको लेके आए. हो नहीं पाया. नरेंद्र मोदी जी ने सभी दलों से सहमति बना करके इसको 2023 में पास करवा दिया संसद से. तो अब जब एक्ट बन गया तो उसको लागू तो होना चाहिए ना. हमारी जिम्मेदारी नहीं है क्या? संसद से जो एक्ट बना वो लागू होना चाहिए. यही हम कह रहे हैं. वो उनके समझ में नहीं आ रहा. वो उसमें राजनीति कर रहे हैं. 

सवाल: आपको बंगाल में क्या लगता है सर? दीदी के पास जाएगा महिला वोट या मोदी जी के पास आएगा?

जवाब: बंगाल में जो इस समय परिस्थितियां हैं जिस वादे के साथ ममता जी बंगाल में शासन में आई थी इस समय उनके खिलाफ बहुत एंटी इनकंबेंसी है जी और मुझे तो लगता है कि बंगाल की जनता इस बार चेंज करेगी जी और बीजेपी का शासन आएगा. 

सवाल: सर एक आंकड़ा मेरे पास है मैं समझना चाहती हूं बात महिलाओं की हो रही है तो कि न्यायपालिका में लगातार कम हो रही भागीदारी महिलाओं की जिसको लेकर पहले भी कई बार चर्चा हुई. अगर देखा जाए हाईकोर्ट में तो केवल 14% महिला जजेस हैं. 813 कार्यरत जजों में से 116 महिलाएं हैं और सुप्रीम कोर्ट में तो केवल एक ही महिला जज है. 

जवाब: अभी थोड़े समय पहले ही सुप्रीम कोर्ट में तीन हम जज जो है महिला जज थी. जी वर्तमान में एक है. जी हम लगातार कह भी रहे हैं कि कि महिला जजों की संख्या बढ़नी चाहिए. हम भी कह रहे हैं कंसल्टेशन प्रोसेस में यह विषय हम भी कह रहे हैं. और हमारे जो ऑनरेबल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया है उन्होंने तो पत्र भी लिखा है और मैंने भी जो चीफ जस्टिस हैं उनको भी पत्र लिखा है कि महिला जजों की संख्या हमें बढ़ानी चाहिए. मैंने लोकसभा के राज्यसभा के फ्लोर पर भी बोला है और हम आने वाले समय में आपको विश्वास दिलाते हैं कि निश्चित रूप से देखिए डिस्ट्रिक्ट जुडिशरी में तो महिलाओं की संख्या बहुत अच्छी बढ़ी है. मैं एक किसी ट्रेनिंग प्रोग्राम में गया था. तो जो हमें जैसे पंजाब एंड हरियाणा जुडिशियल सर्विज के जो अधिकारी जो जुडिशियल मजिस्ट्रेट बनते हैं ऐसे महाराष्ट्र गया ऐसे राजस्थान भी गया तो मैं देख रहा हूं कि 50% से ज्यादा महिलाएं आ रही है. 50% से ज्यादा तो जो डिस्ट्रिक्ट जुडिशरी में महिलाएं आ रही है तो धीरे-धीरे प्रमोट होगी. डीजे बनेगी उनका नंबर भी आएगा इधर और इधर जो एडवोकेट हैं उनको भी हम कह रहे हैं अच्छे एडवोकेट जो महिलाएं हैं उनके नाम आप भेजो नाम उनको भेजना ही है कॉलेजियम के माध्यम से कोशिश करेंगे कि हम महिलाओं की संख्या जल्दी ही बढ़ाएंगे. 

सवाल: मैंने महिलाओं का जिक्र किया और एक डेकोरम आता है बात होती है तो न्यायपालिका में पहला तो मैं पेंडेंसी पर बात करना चाहूंगी आप नए कानून लेकर आए और वो कानून सटीक है ये है कि आप इतने दिन में चार्जशीट होगी इतने दिन में निपटारा होगा इतने दिन में लेकिन पुराने केसेस का क्या जो इतनी पेंडेंसी है उन पेंडेंसी के निपटारे को लेकर क्या आगे आपकी स्टेप्स हैं?

जवाब: 1 जुलाई 2024 से नए क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के तीनों कानून लागू हो गए. जी और हमारा जो पोर्टल सिस्टम है वो भी काफी आगे काम कर रहा है. ई कोर्ट प्रोजेक्ट थर्ड में जी ₹7210 करोड़ नरेंद्र मोदी जी ने जुडिशरी के लिए दिए. वह भी काम तेजी से हो रहा है. जैसे आपने कहा कि पेंडेंसी कम कैसे हो? उसमें हम कई स्तर पर काम कर रहे हैं. एक तो हम एजिंग एनालिसिस कर रहे हैं. यह हमने सुझाव दिया है और माना भी है सुप्रीम कोर्ट ने भी, हाई कोर्ट ने, डिस्ट्रिक्ट जुडिशरी ने भी. क्या कितना पुराना केस है, पहले उसको सुनो. कोई 40 साल पुराना केस है, पहले उसको सुनना चाहिए. 30 साल पुराना केस है, पहले उसको सुनना चाहिए. उसके लिए जो रिटायर्ड जज हैं उनको भी हम वापस रि-अपॉइंट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर रहे हैं और इवनिंग कोर्ट का भी एक विषय आया कि उसको भी हम आगे बढ़ा रहे हैं कि इवनिंग कोर्ट लग जाए तो वो भी एक विषय है और उसके अलावा भी एक एडीआर करके हमारा एक मैकेनिज्म है जिसको हम बोलते हैं अल्टरनेट डिस्प्यूट रेोल्यूशन मैकेनिज्म आर्बिट्रेशन है उसमें मीडिएशन है उसमें कंसिलेशन है यह तीनों ढंग से लागू हो जाएंगे. एजिंग एनालिसिस हो जाएगा. निश्चित मानिए कि मुकदमों की संख्या कम हो जाएगी. 

सवाल: ऐसा भी कई बार होता है. मुझे लगता है मैं उम्मीद करती हूं मैं और समझना चाहती हूं कि नए कानून से वो हटेगा जो नए कानून आए. कई बार देखा 21 साल बाद 27 साल बाद न्याय मिला. तो अब जो नए कानून लागू होंगे उसमें कई बार रेप केसेस में इस के 27 साल बाद सब मिला. अब वो महिला बुजुर्ग भी हो चुकी है. नहीं रही है जीवन में. या उस व्यक्ति को जिसको आरोप लगाया वो मर चुका है लेकिन न्याय नहीं मिला. मिला 27 28 30 साल लग जाते हैं. वह अब खत्म होगा. 

जवाब: यह नए कानून में तो टाइम लिमिट तय कर दी. फैसला देना ही पड़ेगा. जैसे 3 साल में फैसला जांच सहित देना ही पड़ेगा. लेकिन जो आप सही कह रहे हैं कि 1 जुलाई 2024 से पहले जिनमें एफआईआर दर्ज है. वो तो पुराने कानून के तहत ही चल रहे हैं. तो वो एक अलग विषय है. जैसे आपने अलग-अलग अब हां जिसमें मैंने एडीआर और मैंने एजिंग एनालिसिस यह बताया. लेकिन अब बहुत तेजी आई है. जी. हमारा जो ई पोर्टल है ना बहुत तेजी से काम कर रहा है. 

सवाल: जब से यशवंत वर्मा कांड वाला केस हुआ है उसमें कई बार व्यवहार को तो कॉलेजियम वर्सेस एनजीएसी का मुद्दा तो मैं ये समझना चाहती हूं कि कॉलेजियम की नियुक्ति की बात होती है जजेस अपने आप. इस पूरे मामले में क्या ट्रांसपेरेंसी है? सरकार क्या एनजीएसी वापस लागू करेगी? इसको लेकर बार-बार चर्चा होती है. 

जवाब: नेशनल नेशनल जुडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन सरकार ने बनाया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा ये संविधान के अनुसार नहीं है. ठीक है. तो अभी कॉलेजियम सिस्टम ही लागू है. हम कॉलेजियम सिस्टम में ये उनका जुडिशरी का इंटरनल ये विषय है कि वो कैसे जजोंस के नाम तय करते हैं. फिर भी समय-समय पे जैसे मीडिया में आता है चर्चा होती है तो कंसल्टेशन प्रोसेस में हम भी यह अनुरोध करते हैं और हम तो एक चिट्ठी भी लिखते हैं कि उसमें जो ऐसे सेक्शन ऑफ द सोसाइटी है जिनके जजेस कम बने हैं हम उनको आप अवसर दीजिए उसमें महिला भी है. एससी भी है, एसटी भी है, ओबीसी भी है, माइनॉरिटीज भी है. हम तो लेटर भी लिखते हैं. तो तेजी से इसमें सुधार भी हो रहा है. संख्या बढ़ भी रही है. 

सवाल: सर अब जवाबदेही को मानते हैं कि न्यायपालिका में भी इस देश के प्रति जवाबदेही होनी चाहिए जो कि इस बार बहुत सारे केसेस के माध्यम से लगा कि जवाबदेही नहीं है तो उसके लिए भी अगर एनजीएसी आता है कमेटी आप वापस से वो करते हैं तो फर्क आएगा. 

जवाब: वो जो नेशनल जुडिशियल अपॉइंटमेंट कमीशन वो अपॉइंटमेंट को डील अपॉइंटमेंट और जो आप जवाबदेवी की बात करते हैं वो जुडिशियल अकाउंटेबिलिटी का बिल है. अब्सोलुटली जो कभी आया था फिर अभी बिल है नहीं वो लैप्स हो गया उस बिल पे कभी-कभी चर्चा मीडिया में भी होती रहती है और अभी जो विषय है जुडिशरी का ये कहना है कि हमारा जो इंटरनल मैकेनिज्म है वो अपने आप में काफी स्ट्रांग है और वो स्ट्रांग कर भी रहे हैं. जैसे आपने जस्टिस यशवंत वर्मा के केस का आपने जिक्र किया वो तो अभी वैसे भी एक लोकसभा स्पीकर साहब ने कमेटी बनाई वो उसकी जांच कर रहे हैं. तो जांच आने दीजिए उसके बाद बताएंगे उसके बारे में. 

सवाल: सर अभी जो ये इंपीचमेंट वाला मुद्दा है जिसकी रिपोर्ट आनी बाकी है यशवंत वर्मा की अगर बात करें तो आपको लगता है वो कैश कांड के बाद जब सब चीजें क्लियर हो जाएंगी तो उसके बाद एक डिसिप्लिन आएगा जुडिशरी के अंदर. 

जवाब: देखिए एक तो जुडिशरी में हाई सुप्रीम कोर्ट ने खुद ने कमेटी बनाई. उसकी रिपोर्ट भी है हम और अब जो लोकसभा अध्यक्ष ने कमेटी बनाई है उसकी रिपोर्ट आएगी उसके बाद चर्चा लोकसभा में होगी.  

सवाल: जब आप कभी संसद के अंदर जब आप मल्लिकार्जुन खडगे से चर्चा करते हैं राहुल गांधी से करते हैं विपक्ष के बड़े-बड़े नेताओं से करते हैं तो सबसे ज्यादा डिफिकल्ट कौन लगता है आपको जिसको समझाना मुश्किल होता है. 

जवाब: हमें कोई डिफिकल्ट नहीं लगता. जब भी हम मिले हैं तो मल्लिकाअर्जुन खड़गे साहब के या तो घर पे मिले हैं या उनके संसद भवन के ऑफिस में मिले हैं. वहीं हम मिले हैं और बाकी दलों को बाकी उनके जो सीनियर लोग हैं उनको वो खुद ही बुलाते हैं. बात अच्छी होती है. उसके बाद कभी-कभी वो जिद्द पर आ जाते हैं. विषय एक ही है. वो भी समझते हैं चीजों को. हम लेकिन उनको शायद कोई राजनीति के चलते या कोई दबाव के चलते वह जिद पर आ जाते हैं. वही दिक्कत है और कोई दिक्कत नहीं. 

सवाल: दो मुद्दे आए कि पिछले कुछ समय में देखा कि सस्पेंशंस बहुत हो रहे हैं. जिसको लेकर विपक्ष ने कई बार ये मांग भी की कि सस्पेंशन हट जाएंगे तो हम वापस हाउस को चलने देंगे. कितना सही है इस पूरी संसदीय कार्यप्रणाली में सांसदों को सस्पेंड करना जो कि जनप्रतिनिधि हैं चुनकर आते हैं लेकिन एक स्कूल की तरफ सस्पेंड करते हैं. कभी-कभी ठीक लगता है व्यवहार को लेकर. पर अगर आए दिन हो तो कितना सही है और यह कितना जरूरी भी है. 

जवाब: किसी को अच्छा नहीं लगता. कोई मेंबर ऑफ पार्लियामेंट है चुन के आया उसको हम सस्पेंड करें. किसी को अच्छा नहीं लगता. जी लेकिन उनको भी आचरण नियमों के तहत करना पड़ता है. नियमों में प्रावधान दिया हुआ है. हमने यह नियम नहीं बनाए. जब संसद हमारी शुरू हुई होगी 52 में तब यह नियम बने कि कोई इस तरह से टेबल पर नहीं चढ़ेगा. कागज स्पीकर साहब के ऊपर फेंकेगा नहीं. अगर फेंकेगा तो यह कार्रवाई होगी. वो नियमों के तहत ही होती है. आचरण उनको सुधारना होगा. इसमें कोई शक नहीं है. 

सवाल: सर पांच राज्यों के चुनाव है. आपका भी तमिलनाडु और अलग-अलग राज्यों में दौरे होने वाले हैं. तमिलनाडु हो, बंगाल हो, केरल हो. इस बार ऐसा लग रहा है कि ये जो टेस्ट है वो बीजेपी का ज्यादा इंपॉर्टेंट बड़ा टेस्ट है. हर बार ये होता था कि राहुल गांधी क्या कर पाएंगे. लेकिन इस बार बीजेपी का इसलिए क्योंकि बंगाल में आपको ममता दीदी का किला डहाना है. अब इस बार नहीं तो कब? दूसरा केरला में आपको साउथ के अंदर भी तमिलनाडु का भी जिक्र करूं. कितना इंपॉर्टेंट है इस बार बीजेपी के लिए साउथ में एंट्री और दूसरा इस बार ममता दीदी के सरकार को गिराना. 

जवाब: पांच राज्यों के चुनाव हैं. जी वेस्ट बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरलम, और पुदुचेरी. तो अधिकतर आपका मीडिया रिपोर्ट ही कर रहा है कि असम में हम आ रहे हैं. बीजेपी आ रही है ना?
जी. पुदुचरी में भी लोग कह रहे हैं कि नहीं अलायंस ठीक बन गया. तो आप जो बात करना चाह रहे हैं बंगाल की जी और दूसरी करना चाह रहे हैं केरलम. देखिए बंगाल में इस बार परिस्थितियां बहुत भारतीय जनता पार्टी के अनुकूल बनी है. इतनी एंटी इनकंबेंसी ऐसे ही तमिलनाडु में मैं कोइंचार्ज हूं इसलिए कह रहा हूं. मैं तो नॉर्थ तमिलनाडु में भी गया, साउथ में भी गया और डेल्टा में भी गया और कल परसों ही था वेस्ट तमिलनाडु में. वहां भी डीएमके के प्रति बहुत एंटी इनकंबेंसी बनी हुई है और एनडीए अलायंस बहुत स्ट्रांग होता जा रहा है. और जहां आपने केरलम की बात की जनता देख रही है कि भ कभी एलडीएफ कभी यूडीएफ ये क्या है? एनडीए को क्यों नहीं परखे हम? तो इस बार यह भाव है कि हम एनडीए को परखेंगे. 

सवाल: डीएमके का आपने क्योंकि जिक्र किया और आप वहां पर कोइंचार्ज हैं. जो उनका मैनिफेस्टो आया है वो आया है एकदम मुफ्त मुफ्त मुफ्त वाला जो कि हमने ट्रेंड देखा. अब जब-जब खाते में सीधा पैसा जाता है या चीजें जाती हैं तो आप देखते हैं कि झारखंड में भी चीजें बदल जाती हैं. तो ऐसे में आप भी कोई बड़ी स्कीम लेकर आएंगे. तो दो चीजें हैं. एक यह कि आप इससे कैसे लड़ेंगे? दूसरा अगर मुफ्त मुफ्त ऐसा ही होता रहा कि आप बड़ा अमाउंट जैसे कि ममता दीदी ने ₹1500 दिए आप दे रहे हैं ₹3000 तो क्या यह सही तरीका है चुनाव जीतने का? ये वोट खरीदना नहीं हुआ. 

जवाब: देखिए कोई एक एक्टिविटी से कोई चुनाव जीत जाता है मैं उसको नहीं मानता. जी आपको गुड गवर्नेंस और डेवलपमेंट का एजेंडा देना ही पड़ेगा जनता के बीच में. जनता तमिलनाडु की हो चाहे वेस्ट बंगाल की हो. यंगर जनरेशन यह चाहता है कि प्रदेश में शांति रहे. इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली एनवायरमेंट हो. हमारे साथ अन्याय नहीं हो. हमारे रोजगार के अवसर बढ़े. गवर्नेंस चाहता है जी. तो जो जनता की आवाज है उसके अनुरा अगर राजनीतिक दल फैसला लेंगे तो अच्छा रहेगा. जी. मेरा तो यही मत है और इसी दिशा में हमारा मेनिफेस्टो तैयार हो रहा है.

सवाल: एक चीज आंकड़ों मैथ्स के हिसाब से समझना चाहती हूं. ज्यादातर चुनाव इस बार जो हैं पांच राज्यों के वो मैथमेटिक्स पे हो रहे हैं. कैसे? एसआईआर बंगाल पे आती हूं. बंगाल में 2021 में आपके सिर्फ 10% का वोट फर्क था. बीजेपी और टीएमसी दो सामने आमने जो पार्टियां बड़ी इस बार भी और 10% करीबन 62 लाख वोटर्स माने जा रहे हैं. अगर रफ आंकड़ा समझे जितने अभी वोटर्स हैं उस हिसाब से. तो वो 62 लाख इस बार एसआईआर में कटे. जरूरी नहीं वो 62 वही हैं. लेकिन 50% तो वह वोटर हैं जो कट गए. 

जवाब: वो घुसपैठियों के साथ खड़ी है जी देखिए एसआईआर सुप्रीम कोर्ट में भी मामला आया जी इलेक्शन कमीशन एसआईआर कोई पहली बार तो कर नहीं रहा है उनके जमाने में भी एसआईआर हुई जो वोट का हकदार नहीं है मतदाता सूची में जुड़ने का वह क्यों रहना चाहिए वोटर लिस्ट में और जो हकदार है वह क्यों छूटना चाहिए यही एसआईआर है. अब एसआईआर को लेकर के उनका इतना विरोध नहीं है. उनका विरोध है कि वो जो घुसपैठिए हैं वो हमारे वोटर होने चाहिए. क्यों होने चाहिए? वो आपके नागरिक हैं. हम यही विषय सुप्रीम कोर्ट में चला. हम खुद ही पेश भी हुई और सब चीजें उनको पता है इन चीजों का. तो ये इसमें एक राजनीति है. एसआईआर को लेकर के मुद्दा बनाना चाहते हैं. एसआईआर मुद्दा बिहार में नहीं बनेगा. बना तो वहां कहां से बनेगा? 

सवाल: सर एक अरविंद केजरीवाल से संबंधित एक बात और समझना चाहते हैं कि एक बार तो आया अरविंद केजरीवाल को पाक साफ कर दिया. उसके बाद तुरंत आया कि नहीं रिव्यू किया जाएगा अपर कोर्ट की तरफ से. इन पूरे चीजों को आप कैसे देखते हैं? क्योंकि फिर इस पे पॉलिटिकल रंग आता है कि लोअर कोर्ट ने तो मुझे पाक साफ कर दिया. मैं बिल्कुल मैं कोई नहीं किया मैंने करप्शन. और हायर कोर्ट की तरफ से आता है कि नहीं वी हैव टू गो बैक एंड रिव्यू. 

जवाब: अपील का प्रावधान है? कोई अगर सीबीआई या एमपी एमएलए कोर्ट ने कोई फैसला दिया या सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने कोई फैसला दिया तो अपील होती है. जी अपील में वो अपन अपनी लड़ाई लड़े और उसके बाद भी उनको नहीं लगता है कि न्याय नहीं मिला तो सुप्रीम कोर्ट वो क्या कर रहे हैं वो एक एप्लीकेशन लगा रहे हैं. कि जो हाईकोर्ट के जो ये जज हैं जो ये फैसला सुन रहे हैं जो ये मामला सुन रहे हैं. ये हाई कोर्ट के जज ये ये निष्पक्ष नहीं है. यह कहने का उनको कैसे अधिकार है? आप लड़ाई लड़ना नहीं चाहते रंग राजनीतिक पॉलिटिकल रंग वो दे रहे हैं. आपको जुडिशियल में आपको जुडिशरी में विश्वास है तो जो हायर कोर्ट है उसने अगर आपको नोटिस दिया है तो जवाब दीजिए ना. आप क्यों कह रहे हैं कि नहीं यह नहीं सुने? कोई और सुने. यह इसका मतलब वो राजनीति कर रहे हैं केजरीवाल जी इसमें. 

सवाल: सर एक इंपॉर्टेंट सवाल है कि जैसे-जैसे हम महिला आरक्षण की तरफ जा रहे हैं 2029 में इस 29 के बाद एक बहुत बड़ा बदलाव देश में आने वाला है वो है वन नेशन वन इलेक्शन जो आजादी के बाद वापस से उस पे हम कहां तक पहुंचे और जो ये फ्री बीस की स्कीम की बात होती है तमाम तरीके की चीजें आती है. क्या आपको लगता है वन नेशन वन इलेक्शन के बाद यह सब खत्म होगा? मुद्दों पर होगा. क्या उसके उलट ये भी लगता है कि रीजनल चीजें छुप जाएंगी? सिर्फ नेशनल मुद्दों पर होगा. एक ऐसा बदलाव है जिसको एक्सेप्ट करना मुश्किल है. और एक और सवाल कि क्या एक साथ 15 राज्यों के चुनाव 2029 में एक साथ होने वाले हैं?

जवाब: वन नेशन वन इलेक्शन ये बिल हमने लोकसभा में इंट्रोड्यूस किया. जी. विपक्ष की डिमांड थी कि इसको जेपीसी में या कमेटी में भेजा जाए. तो जेपीसी बनी. हमारे राजस्थान से ही एक एमपी हैं पाली मारवाड़ से पीपी चौधरी जी जो इस जेपीसी को हेड कर रहे हैं. और सभी दलों के लोग उसके सदस्य हैं. कुछ राज्यों में उन्होंने विजिट भी किया है. पुराने जो एक्स चीफ इलेक्शन कमिश्नर हैं या एक्स इलेक्शन कमिश्नर हैं या एक्स सीजेआई हैं या एक्स जज हैं या जो इलेक्शन रिफॉर्म में अच्छा काम करने वाले लोग हैं. सबका वो उन्होंने विटनेस ले रहे हैं. उनके सबके विचार आने के बाद ऐसा लगता है कि अधिकतर दल वन नेशन वन इलेक्शन के पक्ष में अब आपने देखा होगा उसका विरोध नहीं हो रहा है. हम एक्सटेंसिव डिस्कशन चल एक साथ चुनाव हो जाएंगे एक साथ तो सभी को 5 साल काम करने का अवसर मिलेगा. नहीं तो बार-बार चुनाव में लगना पड़ता है. 

सवाल: अगर बीकानेर का कोई लोकल मुद्दा है क्या आपको लगता है ए वन नेशन वन इलेक्शन हो जाएगा तो वो लोकल मुद्दा गौण हो जाएगा. 

जवाब: ऐसा कुछ नहीं है जी. आजकल तो जो जैसे मैं इलेक्शन लड़ता हूं जी तो जनता कहती है आपका मेनिफेस्टो क्या है हम तो हर समय जनता जागरूक भी हो रही है ये अच्छी बात है लोकतंत्र के लिए जी और बहुत से एमपी अपना मेनिफेस्टो बताते भी हैं कि मैं जीतूंगा तो मैं ये करूंगा ये सब करूंगा तो लोकल मुद्दे गौ नहीं होंगे. 

सवाल: सर एक आखिरी सवाल जो कि राजस्थान से सरकार को 2 साल हो गए और क्योंकि बात डबल इंजन की बात है तो नरेंद्र मोदी पर भी अकाउंटेबिलिटी बहुत ज्यादा है इसलिए नरेंद्र मोदी अमित शाह का दौरा भी लगातार रहता है. जल की बात हो, बिजली की बात हो, सब कुछ चल रहा है. आप कैसे देखते हैं कि आगे क्या-क्या विकास की बात होंगी? पर एक इंपॉर्टेंट बात ये देखने को आई है जो चर्चित है कि इस बार विपक्ष बहुत हावी है. जब-जब विपक्ष कोई एजेंडा करता है तो सरकार की तरफ से चीजें चुप रहती हैं. कई बार ऐसा हुआ कि जैसे एनएसयूआई को लेकर भी देखा गया. तो विपक्ष हावी होता है और जेल से छुड़ाना पड़ा. जोधपुर का एक किस्सा आपके संज्ञान में होगा. तो ऐसा क्यों? इस बार विपक्ष इतनी हावी क्यों है? और सरकार ऐसे मुद्दों पे छुपके हो जाती है? 

जवाब: विपक्ष का एक ही मुद्दा था. आपने 2 साल में कुछ नहीं किया और बोला आप आप चुनौती स्वीकार कर लीजिए अल्बर्ट हॉल में. तो हमारे सीएम साहब ने कहा कि अल्बर्ट हॉल क्यों? राजस्थान विधानसभा में ही आप बहस कर लीजिए. मैं चुनौती को स्वीकार करता हूं. तो 5 साल में उन्होंने क्या किया? वो पुस्तक भी लेके आए थे और 2 साल में भजन लाल जी ने क्या किया? वो पुस्तक भी लेके आए थे. विपक्ष बहस ही नहीं करना चाहता. भाग गया विपक्ष. 

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