माओवाद विरोधी अभियान में सुरक्षाबलों को मिली बड़ी सफलता, 1 करोड़ की इनामी सुजाता ने किया सरेंडर

Female Naxalite Sujata: भारत के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में यह बड़ी खबर बनकर उभरी है, एक करोड़ की इनामी और नक्सलियों की ‘आयरन लेडी’ कही जाने वाली सुजाता ने आखिरकार तेलंगाना में आत्मसमर्पण कर दिया है. 

anti-Maoist operation Sujata who was carrying a bounty of Rs 1 crore surrendered
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Female Naxalite Sujata: भारत के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में यह बड़ी खबर बनकर उभरी है, एक करोड़ की इनामी और नक्सलियों की ‘आयरन लेडी’ कही जाने वाली सुजाता ने आखिरकार तेलंगाना में आत्मसमर्पण कर दिया है. 

यह वही सुजाता है जिसे नक्सल कमांडर किशनजी की पत्नी के तौर पर जाना जाता है और जिसने एक दौर में छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर तेलंगाना के जंगलों तक सुरक्षा बलों को भारी चुनौती दी थी.

कौन है सुजाता?

  • नक्सल संगठन की सेंट्रल कमेटी की सदस्य.
  • दक्षिण सब जोनल ब्यूरो की प्रमुख.
  • छत्तीसगढ़ के बस्तर में वर्षों तक सक्रिय.
  • कई नक्सली हमलों की मास्टरमाइंड.
  • एक करोड़ रुपये की इनामी नक्सली.
  • हिड़मा जैसे खूंखार नक्सलियों को दी ट्रेनिंग.

सुजाता को सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से ढूंढ रही थीं. उसके आत्मसमर्पण को नक्सल मोर्चे पर एक "टर्निंग पॉइंट" माना जा रहा है.

सुजाता का सरेंडर कैसे हुआ?

तेलंगाना पुलिस ने फिलहाल सुजाता के सरेंडर को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं दी है, लेकिन जल्द ही तेलंगाना के डीजीपी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसका खुलासा करेंगे. यह भी बताया जा रहा है कि पिछले साल अक्टूबर में उसकी गिरफ्तारी की खबरें आई थीं, लेकिन खुद सुजाता ने इन खबरों को अफवाह बताकर खारिज कर दिया था. तब कहा गया था कि वह इलाज के लिए तेलंगाना गई थी.

क्यों था सुजाता का नाम इतना खतरनाक?

नक्सली संगठनों में सुजाता की पहचान एक कड़क रणनीतिकार के रूप में थी. कहा जाता है कि वह नक्सली आंदोलन के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक रही है. यही नहीं, उसकी तुलना कई बार वीरप्पन जैसे खतरनाक अपराधियों से भी की गई.

सुजाता की सक्रियता किशनजी की मौत के बाद और ज्यादा बढ़ गई थी. पश्चिम बंगाल में हुए एनकाउंटर में किशनजी के मारे जाने के बाद, उसने मोर्चा संभाला और नक्सल नेटवर्क को फिर से खड़ा करने की कोशिश की.

नक्सल मोर्चे पर एक और बड़ी सफलता

सुजाता का सरेंडर तो ताजा घटना है, लेकिन 11 सितंबर को छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में हुई मुठभेड़ में भी सुरक्षाबलों ने बड़ी सफलता हासिल की थी. इस मुठभेड़ में एक करोड़ का इनामी नक्सली मनोज मोडेम उर्फ बालकृष्ण उर्फ भास्कर मारा गया. इसके अलावा 25 लाख के इनामी नक्सली प्रमोद समेत 10 नक्सली ढेर कर दिए गए. एनकाउंटर मैनपुर के जंगलों में हुआ, जिसमें कोबरा कमांडो, STF और CRPF की टीमें शामिल थीं. एके-47 समेत सात ऑटोमैटिक हथियार और भारी मात्रा में नक्सली सामग्री बरामद हुई.

क्या नक्सल संगठन हो रहा है कमजोर?

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि टॉप कमांडर्स का सफाया और प्रमुख चेहरों का सरेंडर नक्सल संगठनों के लिए बड़ा झटका है. खासकर सुजाता जैसी रणनीतिक और संगठनात्मक भूमिका निभाने वाली महिला का बाहर आना, इन संगठनों की आंतरिक टूट और असंतोष को दिखाता है.

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