चीन के इस कदम से भड़क उठे ट्रंप...अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा 'खत्म कर देंगे...'

अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है. जहां पहले चीन ने अमेरिकी सोयाबीन की खरीद पर रोक लगाकर झटका दिया, अब अमेरिका ने भी जवाबी रणनीति अपनाई है.

America Trump to xi jinping says considering bussiness with china
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अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है. जहां पहले चीन ने अमेरिकी सोयाबीन की खरीद पर रोक लगाकर झटका दिया, अब अमेरिका ने भी जवाबी रणनीति अपनाई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग को खुली चेतावनी दी है कि अमेरिका चीन से कुकिंग ऑयल समेत कई अन्य उत्पादों का आयात बंद करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है.


ट्रंप का गुस्सा तब भड़का जब चीन ने मई 2025 से अमेरिकी सोयाबीन खरीदने से इंकार कर दिया. इससे पहले 2024 में चीन अमेरिका से लगभग 2.7 करोड़ टन सोयाबीन खरीद चुका था, जिसकी कुल कीमत लगभग 12.8 अरब डॉलर आंकी गई थी. माना जा रहा है कि यह कदम चीन की तरफ से अमेरिकी टैरिफ के जवाब में उठाया गया है. चीन ने न सिर्फ आयात बंद किया, बल्कि अमेरिकी उत्पादों पर प्रतिशोधात्मक टैक्स भी लगा दिए.

 कुकिंग ऑयल का आयात बंद करेंगे

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ’ पर तीखा बयान देते हुए कहा, कि चीन जानबूझकर हमारे किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है. अब समय आ गया है कि हम भी कड़ा कदम उठाएं. हम चीन से कुकिंग ऑयल समेत अन्य वस्तुओं का व्यापार खत्म करने पर विचार कर रहे हैं. अमेरिका स्वयं यह तेल बना सकता है, हमें चीन पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है. ट्रंप के इस बयान को चीन के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब 2026 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव नजदीक हैं और ट्रंप अपने आर्थिक राष्ट्रवाद के एजेंडे को फिर से मजबूत कर रहे हैं.

कुकिंग ऑयल बाजार में झटका लगेगा बीजिंग को

2024 में चीन का कुकिंग ऑयल उत्पादन और निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर था. उस वर्ष चीन द्वारा निर्यात किए गए कुकिंग ऑयल का 43% हिस्सा अकेले अमेरिका ने खरीदा था. अगर ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका इस व्यापार को रोक देता है, तो यह न सिर्फ चीन के लिए बड़ा आर्थिक झटका होगा, बल्कि वैश्विक फूड और बायोफ्यूल सप्लाई चेन भी प्रभावित हो सकती है.

अर्थव्यवस्था से भू-राजनीति तक असर

ट्रंप की इस चेतावनी से यह स्पष्ट है कि अमेरिका-चीन के बीच का ट्रेड वॉर अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनता जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच यह तनाव आने वाले महीनों में और बढ़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी असर पड़ेगा.

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