अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक कूटनीति में अपनी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक आठ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोका है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला. उन्होंने यह टिप्पणी यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के साथ एक बैठक के दौरान की, जहां उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष, भारत की ऊर्जा नीति और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर भी बेबाकी से बात की.
ट्रंप ने बातचीत के दौरान बताया कि भारत अब रूस से कच्चे तेल की खरीद नहीं करेगा. उनके अनुसार, यह फैसला अंतरराष्ट्रीय दबाव और सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि हंगरी की स्थिति अलग है, क्योंकि वह एक ‘लैंडलॉक्ड’ (समुद्र से घिरा नहीं) देश है और उसकी एकमात्र आपूर्ति लाइन रूस से जुड़ी हुई है.
रूस-यूक्रेन शांति वार्ता संभव, लेकिन अविश्वास सबसे बड़ी रुकावट
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच शांति की संभावनाएं अब भी मौजूद हैं, लेकिन दोनों नेताओं – पुतिन और ज़ेलेंस्की – के बीच पारस्परिक अविश्वास एक बड़ी चुनौती है. मैं ज़ेलेंस्की से भी कहता हूं और पुतिन से भी, कि वे एक-दूसरे को पसंद नहीं करते. लेकिन यह टकराव हमेशा नहीं रह सकता. मुझे विश्वास है कि हम कोई रास्ता निकालेंगे. उन्होंने कहा कि अमेरिका की कोशिश है कि कोई भी समझौता केवल तात्कालिक न हो, बल्कि स्थायी और संतुलित हो. ट्रंप ने अपने कार्यकाल में हुए मिडिल ईस्ट समझौते का ज़िक्र करते हुए कहा, “उस वक्त भी लोगों को लगा था कि इतने देशों को एक मंच पर लाना असंभव है, लेकिन हमने करके दिखाया. यही भरोसा मुझे रूस-यूक्रेन मसले पर भी है.”
“हमने ड्रग्स ले जा रही पनडुब्बी पर कार्रवाई की”
ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि अमेरिका ने हाल ही में एक पनडुब्बी को निशाना बनाया, जिसमें भारी मात्रा में नशीले पदार्थ ले जाए जा रहे थे. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई निर्दोष गतिविधि नहीं थी, बल्कि एक संगठित और खतरनाक नेटवर्क का हिस्सा थी.
मुझे नोबेल नहीं मिला, लेकिन जानें बचाईं
अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कांगो, रवांडा, भारत-पाकिस्तान और कई अन्य देशों के बीच संघर्षों को रोकने में मदद की है. इसके बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला. हर बार लोग कहते हैं, अगली बार कोई बड़ा युद्ध रोको, तब मिलेगा. लेकिन मेरे लिए पुरस्कार नहीं, ज़िंदगियां मायने रखती हैं. उन्होंने कहा कि यदि ज़रूरत पड़ी, तो वह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की समस्याओं को भी सुलझा सकते हैं, लेकिन इस समय उनकी प्राथमिकता अमेरिका को बेहतर बनाना है.
यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका की रणनीति
ट्रंप ने यूक्रेन पर अमेरिका के रुख की भी चर्चा की और कहा कि अमेरिका प्रत्यक्ष रूप से युद्ध में नहीं है, लेकिन समर्थन के माध्यम से हज़ारों जानें बचाने का प्रयास कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को सैन्य संसाधनों के लिए भुगतान भी मिल रहा है और NATO के साथ बेहतर समझौते हो रहे हैं. हम पैसे नहीं गंवा रहे, हम संसाधनों का आदान-प्रदान कर रहे हैं, और सबसे बड़ी बात – हम हर हफ्ते हजारों जिंदगियां बचा रहे हैं.
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