अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार विवाद में एक नया मोड़ तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि चीन पर लगाए गए आयात शुल्क (टैरिफ) लंबे समय तक प्रभावी नहीं रह सकते. ट्रंप ने यह भी पुष्टि की कि उनकी शी जिनपिंग के साथ बैठक जल्द होगी इससे पहले उन्होंने इसी बैठक की आवश्यकता पर संदेह जताया था.
फॉक्स बिजनेस को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने माना कि चीन के खिलाफ टैरिफ रणनीति “स्थायी समाधान” नहीं है और यह स्थिति अधिक समय तक नहीं चल सकती. उन्होंने कहा, “संख्या वही है, लेकिन ये टिकाऊ नहीं हैं. मुझे ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर किया गया था.”
चीन हमेशा फायदा उठाने की फिराक में रहता है
साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने चीन की व्यापार नीति को लेकर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया. उन्होंने कहा, “चीन हमेशा बढ़त हासिल करने की कोशिश करता है. आगे क्या होगा, यह फिलहाल कहना मुश्किल है. लेकिन हम देखेंगे कि आगे क्या होता है.” गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच इस तनाव ने आयात शुल्क की दरों को 145% तक पहुंचा दिया है, जिससे वैश्विक बाज़ारों में मंदी का डर बढ़ गया है. हालांकि, अतीत में दोनों देशों ने कई बार 90-दिवसीय व्यापार संघर्ष विराम पर सहमति जताई है, जो अब 10 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है.
‘समझौता ज़रूरी है, और वह भी निष्पक्ष’
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक रिश्तों की बहाली तभी संभव है जब एक “उचित और संतुलित” समझौता हो. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि शी के साथ मेरी बातचीत सकारात्मक होगी. हमारे बीच संबंध अच्छे हैं. लेकिन समझौता तभी होगा जब वह दोनों पक्षों के लिए न्यायसंगत हो.” ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब उन्होंने हाल ही में 1 नवंबर से नए टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, और यहां तक कि शी जिनपिंग से प्रस्तावित मुलाकात को भी रद्द करने की बात कही थी. अब जबकि उन्होंने बैठक की पुष्टि की है, यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव में कुछ नरमी आ सकती है.
अगर टैरिफ़ नहीं होते, तो हम कुछ भी साबित नहीं कर पाते
जब उनसे यह पूछा गया कि यदि चीन के साथ कोई समझौता नहीं हुआ तो क्या व्यापार युद्ध और तेज़ होगा, ट्रंप ने कहा, “वास्तव में, हम पहले से ही एक युद्ध की स्थिति में हैं. हमारे पास 100 प्रतिशत टैरिफ़ हैं. अगर हमने ये टैरिफ़ नहीं लगाए होते, तो हम अपनी बात साबित भी नहीं कर पाते.
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