Iran Nuclear Site Attacked: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक गंभीर दावा किया है, जिसने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. ईरान के अनुसार, रविवार को उसके एक प्रमुख परमाणु केंद्र को अमेरिका और इजरायल ने निशाना बनाया है. इस दावे के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है.
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में ईरान के राजदूत ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमला किया. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह हमला रविवार को किया गया और यह सीधे तौर पर ईरान के संवेदनशील परमाणु ढांचे को निशाना बनाता है. जब उनसे पूछा गया कि किस परमाणु केंद्र पर हमला हुआ है, तो उन्होंने बताया कि हमला नतान्ज परमाणु केंद्र पर किया गया.
नतान्ज केंद्र क्यों है अहम?
नतान्ज परमाणु केंद्र ईरान के सबसे महत्वपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों में से एक माना जाता है. यहां यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) से जुड़ी गतिविधियां होती हैं, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम का अहम हिस्सा हैं. इस केंद्र पर किसी भी तरह का हमला न केवल ईरान के लिए बड़ा झटका हो सकता है, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.
वियना में IAEA की आपात बैठक
ईरान के इस दावे के बीच वियना में IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की आपात बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में मौजूदा स्थिति की गंभीरता पर चर्चा की जा रही है और आगे की रणनीति तय की जा रही है. IAEA ने शुरुआती आकलन में रेडिएशन रिसाव की आशंका जताई है, जिससे हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं.
रेडिएशन का खतरा, शहर खाली कराने की चेतावनी
IAEA ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति बिगड़ती है, तो रेडिएशन फैलने का खतरा पैदा हो सकता है. ऐसे हालात में आसपास के कई बड़े शहरों को खाली कराना पड़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु केंद्रों पर हमले का सबसे बड़ा जोखिम यही होता है कि इससे न सिर्फ तत्काल नुकसान होता है, बल्कि लंबे समय तक पर्यावरण और मानव जीवन पर असर पड़ता है.
लगातार जारी हैं सैन्य हमले
इस बीच, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रहने की खबरें भी सामने आ रही हैं. दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर दिया है. ईरान पहले ही कई जगहों पर जवाबी हमले कर चुका है, जिससे यह संघर्ष अब कई देशों तक फैलता नजर आ रहा है.
वैश्विक चिंता बढ़ी
परमाणु ठिकाने पर हमले के दावे और रेडिएशन की चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है. कई देशों ने संयम बरतने और स्थिति को नियंत्रित करने की अपील की है. अब सबकी नजर IAEA की बैठक और आने वाले फैसलों पर टिकी है, क्योंकि इस टकराव का असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है.
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