US Philippines Military Exercise: एशिया में अपनी ताकत दिखाने के लिए अमेरिका और फिलीपींस इस साल एक बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास करने जा रहे हैं. इस अभ्यास में 17,000 से ज्यादा सैनिक हिस्सा लेंगे. यह युद्धाभ्यास 20 अप्रैल से 8 मई तक चलेगा और इसे ‘बालिकातन’ नाम दिया गया है, जिसका मतलब होता है “कंधे से कंधा मिलाकर”.
यह सैन्य अभ्यास ऐसे समय हो रहा है जब चीन लगातार इस इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है. माना जा रहा है कि इस अभ्यास के जरिए अमेरिका चीन को एक मजबूत संदेश देना चाहता है कि वह अपने सहयोगियों के साथ खड़ा है.
चीन को दिया जाएगा बड़ा संदेश
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह अभ्यास सीधे तौर पर चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के जवाब में किया जा रहा है. इस दौरान जापान की सेना भी हिस्सा लेगी. अभ्यास में समुद्र में एक जहाज को मिसाइल से डुबाने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी.
यह अभ्यास फिलीपींस के उत्तर-पश्चिमी समुद्री इलाके में होगा, जो दक्षिण चीन सागर के पास है. इस इलाके पर चीन लगभग पूरा दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसे अपना बताते हैं.
इलाके में बढ़ा तनाव
पिछले कुछ सालों में चीन और फिलीपींस के बीच कई बार टकराव देखने को मिला है. दोनों देशों के जहाज कई बार आमने-सामने आ चुके हैं, जिससे इलाके में तनाव बढ़ा है.
दूसरे देश भी होंगे शामिल
इस बार के अभ्यास में फ्रांस और कनाडा की सेनाएं भी शामिल होंगी. इससे साफ है कि कई देश मिलकर इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहे हैं. अमेरिकी सेना के अधिकारी ने कहा कि उनका मकसद अपने सहयोगियों के साथ मिलकर क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करना है. इस अभ्यास में ड्रोन हमलों से निपटने की ट्रेनिंग भी शामिल होगी.
चीन करता रहा है विरोध
चीन पहले भी ऐसे सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है, खासकर जब उसमें अमेरिका शामिल होता है. चीन का कहना है कि इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ता है और शांति पर असर पड़ता है.
फिलीपींस ने क्या कहा
फिलीपींस की सेना का कहना है कि यह अभ्यास किसी खास देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है. लेकिन इससे विवादित समुद्री इलाके में उनकी स्थिति मजबूत जरूर होगी. पिछले साल मनीला दौरे के दौरान अमेरिकी नेता पीट हेगसेथ ने फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर को भरोसा दिलाया था कि अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर चीन की आक्रामक गतिविधियों का सामना करेगा.
उन्होंने कहा था कि देशों को “कंधे से कंधा मिलाकर” खड़ा होना चाहिए, ताकि इलाके में शांति बनी रहे और समुद्र में आने-जाने की आजादी कायम रहे. कुल मिलाकर, यह सैन्य अभ्यास सिर्फ एक ट्रेनिंग नहीं, बल्कि एशिया में बदलते हालात के बीच ताकत और सहयोग का बड़ा संकेत माना जा रहा है.
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