अमेरिका और इजरायल के उड़े होश, ईरान ने बना लिया अपना B-2 बॉम्बर! जानें कितना है खतरनाक

Iran Stealth Drone: मध्य-पूर्व की जटिल सुरक्षा स्थिति में एक नया मोड़ आ गया है. इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी के बीच, ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए अमेरिका से हासिल हुई तकनीक के आधार पर खतरनाक स्टील्थ ड्रोन विकसित किए हैं.

America and Israel were shocked Iran has made its own B-2 bomber
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Iran Stealth Drone: मध्य-पूर्व की जटिल सुरक्षा स्थिति में एक नया मोड़ आ गया है. इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी के बीच, ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए अमेरिका से हासिल हुई तकनीक के आधार पर खतरनाक स्टील्थ ड्रोन विकसित किए हैं. इन ड्रोन को मिनी B-2 बॉम्बर भी कहा जा रहा है, जो आधुनिक युद्ध में एक नया खतरा बन सकते हैं.

2011 में अफगानिस्तान के ऊपर उड़ान भरते हुए अमेरिकी RQ-170 सेंटिनल स्टील्थ ड्रोन का रास्ता भटककर ईरान में प्रवेश हो गया. ईरान ने इसे पकड़कर इसकी तकनीक का गहन अध्ययन किया. IRGC ने ड्रोन के संचार और जीपीएस सिग्नल को जाम कर इसे अपने नियंत्रण में ले लिया. इस ड्रोन की उन्नत स्टील्थ तकनीक ने ईरान को अपनी ड्रोन क्षमता बढ़ाने का रास्ता दिया.

शाहिद-171 सिमोर्ग: ईरान का नया निगरानी हथियार

सेंटिनल ड्रोन की तकनीक से प्रेरित होकर ईरान ने शाहिद-171 सिमोर्ग नामक ड्रोन बनाया, जो अमेरिका के B-2 बॉम्बर की तरह स्टील्थ और लंबी दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम है. यह ड्रोन 2,200 किलोमीटर की रेंज के साथ 3D जमीनी तस्वीरें बनाने वाले सिंथेटिक अपर्चर रडार से लैस है.

विश्लेषकों के अनुसार, ईरान ने इस ड्रोन की तकनीक को विकसित करते हुए निगरानी, हमले और आत्मघाती अभियानों के लिए कई वेरिएंट तैयार किए हैं. शाहिद-191 चार निर्देशित बम या ग्लाइड हथियार ले जा सकता है और 500 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है.

छोटे लेकिन खतरनाक: शाहिद-161 और शाहिद-141

ईरान ने अपनी ड्रोन तकनीक में और भी परिष्कार किया है. शाहिद-161, जो एक जेट-संचालित आत्मघाती ड्रोन है, छोटे आकार के बावजूद समुद्री जहाजों या काफिलों पर सटीक हमले कर सकता है. इसकी सीमा लगभग 300 किलोमीटर है. इसका छोटा साथी शाहिद-141 मुख्य रूप से टोही मिशनों के लिए उपयोग किया जाता है और यह सीमित विस्फोटक भार के साथ आता है.

इजरायल के लिए चिंता की वजह

इजरायली सुरक्षा विशेषज्ञ ईरान के इस स्टील्थ ड्रोन बेड़े को लेकर चिंतित हैं. उनका मानना है कि अगर ईरान बड़े पैमाने पर इन ड्रोन को तैनात करता है, तो यह इजरायल की वायु रक्षा प्रणालियों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं. वे डर जताते हैं कि इस स्थिति में इजरायल की एयर डिफेंस फेल हो सकती है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.

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