Israel Iran War: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक हवाई और समुद्री दोनों रास्तों से हमले किए गए हैं, जिनमें राष्ट्रपति भवन, खुफिया एजेंसियों के ठिकाने और सैन्य अड्डों समेत करीब 30 स्थानों को निशाना बनाया गया.
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु शक्ति नहीं बनने दिया जाएगा. वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे यह संघर्ष धीरे-धीरे बड़े युद्ध का रूप लेता नजर आ रहा है.
तेल बाजार पर सबसे बड़ा खतरा, दुनिया की नजर होर्मुज पर
इस टकराव का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है. दुनिया के लिए सबसे संवेदनशील क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो कच्चे तेल की सप्लाई का प्रमुख मार्ग माना जाता है. यह जलमार्ग खाड़ी देशों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ता है और यहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं. अगर किसी कारणवश इस जलमार्ग में बाधा आती है या इसे बंद किया जाता है, तो वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है.
भारत पर क्यों बढ़ सकती है मुश्किलें
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है. आंकड़ों के मुताबिक देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर से मंगाता है. हाल के समय में खाड़ी देशों से भारत का आयात बढ़ा है, जिससे उसकी निर्भरता इस क्षेत्र पर और ज्यादा हो गई है.
कमोडिटी डेटा के अनुसार, भारत का लगभग 50 प्रतिशत तेल आयात सीधे इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से जुड़ा हुआ है. हाल ही में भारत ने खाड़ी देशों से करीब 2.6 मिलियन बैरल प्रति दिन (एमबीपीडी) तेल आयात किया है, जो इस क्षेत्र पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है.
सप्लाई बाधित होने पर बढ़ेगा खर्च और महंगाई
अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर सिर्फ तेल की उपलब्धता पर ही नहीं बल्कि उसकी कीमत पर भी पड़ेगा. सप्लाई घटने के साथ-साथ माल ढुलाई और बीमा लागत में भी भारी इजाफा हो सकता है.
इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है. ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक तनाव रहने पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है.
कई देशों से तेल मंगाकर जोखिम कम करने की कोशिश
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश की है. अब भारत रूस, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, कुवैत और अन्य क्षेत्रों से भी कच्चा तेल मंगाता है. इसके बावजूद खाड़ी क्षेत्र की अहमियत कम नहीं हुई है और मौजूदा हालात में किसी भी तरह की बाधा भारत के लिए आर्थिक चुनौती बन सकती है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. तेल की कीमतों में उछाल से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है और कई देशों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बन सकता है.
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