पटरी पर आए अमेरिका और भारत के रिश्ते? अमेरिका के ऊर्जा मंत्री बोले-हम भारत से प्यार करते हैं

अमेरिका और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर एक सकारात्मक संकेत देते हुए अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी को और गहराई देना चाहता है. उनका कहना था कि भारत न केवल एक भरोसेमंद सहयोगी है, बल्कि ऊर्जा के विभिन्न क्षेत्रों में उसने उल्लेखनीय प्रगति की है.

America and Chris wright remarks on india we love india amid tariff india
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अमेरिका और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर एक सकारात्मक संकेत देते हुए अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी को और गहराई देना चाहता है. उनका कहना था कि भारत न केवल एक भरोसेमंद सहयोगी है, बल्कि ऊर्जा के विभिन्न क्षेत्रों में उसने उल्लेखनीय प्रगति की है.

न्यूयॉर्क में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए राइट ने कहा,भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अमेरिका का एक शानदार साथी है. भारत के साथ काम करना मेरे लिए प्राथमिकता रही है. मैं भारत का बड़ा प्रशंसक हूं.

प्राकृतिक गैस से लेकर परमाणु तक सहयोग की बात

राइट ने साफ किया कि अमेरिका, भारत के साथ प्राकृतिक गैस, कोयला, परमाणु ऊर्जा, तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) और स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाना चाहता है. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भारत की भूमिका काफी प्रभावशाली रही है.हम भारत को दंडित नहीं करना चाहते. हमारा उद्देश्य सहयोग बढ़ाना है, न कि रोकना.

रूसी तेल पर क्या बोले राइट?

जब उनसे रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने माना कि भारत एक जटिल वैश्विक स्थिति के बीच में है.राइट ने कहा, “भारत इस पूरे मसले के बीच में फंसा हुआ है. हमारी समस्या भारत से नहीं है, बल्कि उस युद्ध से है, जिसे रूस फंड कर रहा है.” उनका इशारा यूक्रेन-रूस युद्ध की ओर था, जिसमें रूस की ऊर्जा आपूर्ति से मिल रही कमाई युद्ध को लंबा खींच रही है.

"भारत को सज़ा नहीं देना चाहते"

अमेरिकी मंत्री ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का मकसद भारत पर किसी तरह की पाबंदी लगाना नहीं है.आप दुनिया के किसी भी देश से तेल खरीद सकते हैं, बस रूस से नहीं. यही हमारी नीति है,” राइट ने कहा. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका के पास भी ऊर्जा संसाधन हैं और अन्य देशों के पास भी.

भारत का पक्ष: ‘हमारा राष्ट्रीय हित सर्वोपरि’

भारत ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि उसका ऊर्जा आयात पूरी तरह से राष्ट्रीय हितों और वैश्विक बाज़ार के हिसाब से तय होता है. यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तो भारत ने बाज़ार के अनुरूप सस्ता रूसी तेल खरीदना शुरू किया. इस पर कई देशों ने सवाल उठाए, लेकिन भारत ने हर बार यही कहा कि ऊर्जा सुरक्षा उसके लिए सर्वोपरि है.

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