China Taiwan Conflict: भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने ताइवान को लेकर चीन की स्थिति को एक बार फिर स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि ताइवान का इतिहास और कानूनी स्थिति पूरी तरह से चीन के पक्ष में है और इस पर किसी प्रकार का विवाद नहीं है. राजदूत ने जोर देकर कहा कि ताइवान हमेशा से चीन का हिस्सा रहा है और भविष्य में भी रहेगा.
शू फेइहोंग ने अपने बयान में ताइवान से जुड़े ऐतिहासिक और कानूनी तथ्यों को साझा किया. उन्होंने बताया कि अक्टूबर 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की स्थापना हुई थी, जिसने रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार की जगह लेकर पूरे चीन का वैध प्रतिनिधित्व हासिल किया. उनके अनुसार, सरकार बदलने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ‘चीन’ की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया. PRC सरकार को ताइवान समेत पूरे चीन पर संप्रभु अधिकार प्राप्त हैं.
🔹Taiwan has belonged to China🇨🇳 since antiquity. The history and legal facts are very clear.
— Xu Feihong (@China_Amb_India) January 4, 2026
🔹The government of the People’s Republic of China (PRC) was founded in October 1949, replacing the government of the Republic of China as the sole legal government representing the… pic.twitter.com/ip6hkuXG8X
चीन का क्षेत्र कभी विभाजित नहीं हुआ
राजदूत ने कहा कि चीन के भीतर गृहयुद्ध और बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप की वजह से ताइवान और मुख्यभूमि के बीच राजनीतिक टकराव पैदा हुआ, लेकिन इससे चीन की संप्रभुता या क्षेत्रीय अखंडता पर कोई असर नहीं पड़ा. शू फेइहोंग ने स्पष्ट किया कि चीन का क्षेत्र कभी विभाजित नहीं हुआ और भविष्य में भी कभी विभाजित नहीं होगा. उनका कहना था कि ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है और यह स्थिति हमेशा बनी रहेगी.
ताइवान में राजनीतिक हालात पर चीन की प्रतिक्रिया
राजदूत ने ताइवान के वर्तमान राजनीतिक हालात पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि ताइवान कभी भी एक स्वतंत्र और संप्रभु देश नहीं रहा है. चाहे अतीत हो, वर्तमान हो या भविष्य, ताइवान हमेशा चीन का हिस्सा रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि ताइवान में सत्तारूढ़ डीपीपी प्रशासन द्वारा किए जाने वाले किसी भी बयान या कदम से चीन के दोबारा एकीकरण की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा. शू फेइहोंग ने स्पष्ट किया कि चीन का दोबारा एकीकरण होना तय है और इसे कोई रोक नहीं सकता.
चीन की नीति और क्षेत्रीय स्थिरता
शू फेइहोंग का यह बयान इस बात को भी दर्शाता है कि चीन ताइवान को लेकर अपनी नीति में पूरी तरह कठोर और स्पष्ट है. उन्होंने कहा कि चीन हमेशा अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करेगा. राजदूत का यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की स्थिति को दोहराने का प्रयास भी है, जिसमें ताइवान को लेकर किसी प्रकार की संप्रभुता को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
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