Bangladesh Condom Crisis: बांग्लादेश वर्तमान में न केवल राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा से जूझ रहा है, बल्कि एक स्वास्थ्य संकट भी गंभीर रूप ले रहा है. देश में परिवार नियोजन के लिए उपयोग किए जाने वाले गर्भनिरोधक साधन, विशेष रूप से कंडोम, अचानक बाजार और सरकारी वितरण प्रणाली से गायब हो गए हैं. समस्या सिर्फ कीमतों में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले हफ्तों में यह पूरे देश में जनसंख्या और स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है.
कंडोम स्टॉक अगले कुछ हफ्तों में समाप्त होने की कगार पर है. अगर आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो कम से कम एक महीने तक बिक्री ठप रहने की संभावना है. इसका असर परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर पड़ेगा, जो दशकों से मातृ स्वास्थ्य और जनसंख्या नियंत्रण में अहम भूमिका निभाते आए हैं.
विदेशी निर्भरता और सप्लाई चेन की कमजोरी
बांग्लादेश अपने कंडोम की जरूरतों के लिए विदेशी आयात पर निर्भर है. लेकिन आयात में देरी, भुगतान संबंधी समस्याएं और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में व्यवधान ने स्थिति और बिगाड़ दी है. राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के कारण लॉजिस्टिक्स प्रभावित हुए हैं, जिससे पहले से सीमित स्टॉक तेजी से खत्म हो गया.
DGFP की वितरण प्रणाली पर दबाव
देशभर में परिवार नियोजन निदेशालय (DGFP) पांच प्रकार के गर्भनिरोधक साधन मुफ्त में वितरित करता है, जिनमें कंडोम, ओरल पिल्स, आईयूडी, इंजेक्टेबल और इम्प्लांट शामिल हैं. लेकिन मौजूदा समय में DGFP के लिए इन साधनों का न्यूनतम स्टॉक बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है. फंड की कमी और स्टाफ की भारी कमी ने इस व्यवस्था को संकट में डाल दिया है.
आंकड़ों में संकट की गंभीरता
नेशनल कॉन्ट्रासेप्टिव समरी रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि पिछले छह वर्षों में कंडोम की सप्लाई में 57 प्रतिशत की कमी आई है. ओरल पिल्स 63 प्रतिशत, आईयूडी 64 प्रतिशत, इंजेक्टेबल 41 प्रतिशत और इम्प्लांट 37 प्रतिशत तक घट गए हैं. 11 दिसंबर 2025 तक DGFP के पास सिर्फ 39 दिनों का कंडोम स्टॉक, 33 दिनों का इम्प्लांट और 45 दिनों का आईयूडी स्टॉक बचा था. ओरल पिल्स और इंजेक्टेबल दवाओं का स्टॉक भी तेजी से घट रहा है.
कानूनी अड़चनें और वितरण में बाधा
DGFP के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई यूनिट के डायरेक्टर अब्दुर रज्जाक के अनुसार, दवाओं की खरीद से जुड़ा कानूनी मामला लंबित है. इस कारण नई खरीद प्रक्रिया रुकी हुई है. अधिकारियों का कहना है कि जब तक मामला सुलझेगा, मौजूदा स्टॉक पूरी तरह खत्म हो सकता है, जिससे संकट और गहरा जाएगा.
फील्ड वर्कर्स की कमी और ग्रामीण असर
परिवार नियोजन कार्यकर्ता सिर्फ दवाएं नहीं बांटते, बल्कि जागरूकता, काउंसलिंग और महिलाओं को सही विकल्प चुनने में मदद भी करते हैं. लेकिन कानूनी अड़चनों और नई भर्तियों की देरी के कारण कई महत्वपूर्ण पद खाली हैं. इसका असर ग्रामीण और शहरी इलाकों में गर्भनिरोधक साधनों की पहुंच पर पड़ रहा है.
बाजार में बढ़ती कीमतें
कमी का असर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है. कई मेडिकल स्टोर कंडोम की जमाखोरी कर रहे हैं. लोकल ब्रांड्स, जिनकी कीमत पहले 15-25 टका थी, अब 30-50 टका तक पहुंच गई है. प्रीमियम ब्रांड्स, जो पहले 200-250 टका में मिलते थे, अब 300-700 टका या उससे अधिक में बिक रहे हैं. इससे गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है.
संभावित जनस्वास्थ्य खतरे
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह संकट लंबा खिंचा, तो अनियोजित गर्भधारण, मातृ स्वास्थ्य जोखिम और यौन संचारित रोगों के मामलों में वृद्धि हो सकती है. यह संकट केवल दवाओं का नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य ढांचे की परीक्षा बन गया है.
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