नई दिल्ली/रियाद: भारत की रक्षा तकनीक अब सिर्फ देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रही. ऑपरेशन सिंदूर के बाद वैश्विक मंच पर भारत के स्वदेशी हथियारों की प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ी है, और इसका ताजा उदाहरण है — गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम की अंतरराष्ट्रीय मांग.
सऊदी अरब, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे रणनीतिक रूप से अहम देशों ने भारत में विकसित इस आधुनिक मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) में गहरी रुचि दिखाई है. रक्षा क्षेत्र की अग्रणी कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल वी. आर्य (सेवानिवृत्त) के मुताबिक, इन तीनों देशों के साथ गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम को लेकर गंभीर बातचीत चल रही है.
सिर्फ इस्तेमाल नहीं, हथियार बेच भी रहा है भारत
यह बदलाव अचानक नहीं आया. कुछ समय पहले आर्मीनिया ने भारत से गाइडेड पिनाका रॉकेट खरीदे थे और युद्ध में इनका प्रभावी उपयोग किया. इसके बाद भारत की रक्षा निर्यात नीति को लेकर दुनिया की सोच बदल गई.
भारत अब उस सूची में नहीं जो केवल हथियार खरीदते हैं, बल्कि अब वह तेजी से एक प्रमुख हथियार निर्यातक देश के रूप में उभर रहा है.
गाइडेड पिनाका की ताकत क्या है?
इसका गाइडेड संस्करण युद्ध के मैदान में अत्यधिक सटीकता और घातकता के साथ हमला करने में सक्षम है. यह प्रणाली पारंपरिक और असममित युद्ध दोनों में कारगर है. यही वजह है कि इसे कई देश सस्ती लेकिन प्रभावशाली लॉन्ग-रेंज स्ट्राइक कैपेबिलिटी के रूप में देख रहे हैं.
रणनीतिक सहयोग की ओर बढ़ता भारत
यदि सऊदी अरब, वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ यह डील होती है, तो यह भारत के लिए सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद अहम होगी.
सऊदी अरब: पश्चिम एशिया में भारत का संभावित रक्षा सहयोगी
वियतनाम: दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दबदबे का जवाब
इंडोनेशिया: इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत का साझेदार
इन क्षेत्रों में भारत की सैन्य उपस्थिति और तकनीकी विश्वसनीयता को मान्यता मिलना, भारत की विदेश नीति, डिफेंस डिप्लोमेसी और 'एक्ट ईस्ट' नीति की साझा सफलता को दर्शाता है.
पिनाका और ब्रह्मोस: दोहरी मार
जहां एक ओर पिनाका ने लैंड-बेस्ड आर्टिलरी स्ट्राइक में भारत को पहचान दी है, वहीं ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम ने एयरबेस और समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है.
यह स्पष्ट संकेत है कि 'मेक इन इंडिया' पहल सिर्फ नारेबाज़ी नहीं, बल्कि एक प्रभावी रक्षा रणनीति में तब्दील हो चुकी है.
सस्ता और असरदार: भारत की यूएसपी
भारतीय हथियारों की खास बात ये है कि वे अमेरिकी, इजरायली या यूरोपीय सिस्टम की तुलना में बेहद किफायती हैं, लेकिन तकनीकी रूप से किसी भी रूप में पीछे नहीं हैं.
उदाहरण के तौर पर:
इसकी तुलना अमेरिका के HIMARS सिस्टम से करें, जिसकी लागत कई गुना ज्यादा है.
मेक इन इंडिया की असली तस्वीर
गाइडेड पिनाका रॉकेट सिस्टम को DRDO और सोलर इंडस्ट्रीज ने मिलकर तैयार किया है. यह सिस्टम न केवल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि ग्लोबल डिफेंस मार्केट में भारत की नई पहचान भी बना रहा है.
इस सफलता से भारत को न केवल आर्थिक फायदा होगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में विश्वास और साख भी मजबूत होगी.
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