Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब समुद्र में दिखाई देने लगा है. मिसाइल हमलों के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति के रास्तों को लेकर भी रणनीति बनाई जा रही है. इसी बीच एक ईरानी सैन्य अधिकारी ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका कोई बड़ी रणनीतिक गलती करता है, तो ईरान अपना समुद्री अभियान एक और महत्वपूर्ण जलमार्ग की ओर मोड़ सकता है.
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की नजर अब बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर हो सकती है. अगर यह रास्ता भी प्रभावित होता है, तो दुनिया के ऊर्जा व्यापार के दो सबसे अहम समुद्री मार्ग संकट में पड़ सकते हैं.
बाब-अल-मंदेब क्यों है इतना महत्वपूर्ण
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य यमन और जिबूती के बीच स्थित है और इसकी चौड़ाई लगभग 26 किलोमीटर है. यह लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर मौजूद है और खाड़ी देशों के तेल निर्यात के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग माना जाता है.
हर साल 20 हजार से ज्यादा जहाज इस रास्ते से गुजरते हैं और करीब 1.6 अरब टन माल का परिवहन होता है. 2018 के आंकड़ों के अनुसार, यहां से रोजाना लगभग 6.2 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते थे, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 9 प्रतिशत है.
हॉर्मुज के बाद यह रास्ता और अहम
जब से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा है, तब से बाब-अल-मंदेब का महत्व और भी बढ़ गया है. खाड़ी देशों के लिए यह तेल निर्यात का एक अहम विकल्प बन गया है.
सऊदी अरब फिलहाल अपने रेड सी बंदरगाहों और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए कुछ तेल निर्यात जारी रखने की कोशिश कर रहा है. इस तेल का बड़ा हिस्सा एशियाई बाजारों तक जाता है और आमतौर पर जहाजों को यमन के पास से गुजरना पड़ता है.
अगर बाब-अल-मंदेब बंद हुआ तो असर बड़ा होगा
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर यह रास्ता बंद हो जाता है तो फारस की खाड़ी से यूरोप जाने वाला सबसे छोटा समुद्री मार्ग खत्म हो जाएगा. ऐसे में जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते से लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा.
इससे हर यात्रा में लगभग दो हफ्ते ज्यादा समय लगेगा और जहाजों को करीब 10 लाख डॉलर तक अतिरिक्त ईंधन खर्च उठाना पड़ सकता है. अगर हॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों रास्तों पर संकट बना रहा, तो खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात कुछ ही हफ्तों में गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है.
हूती विद्रोही भी बन सकते हैं बड़ा कारक
बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में ईरान का प्रभाव काफी हद तक यमन के हूती विद्रोहियों से उसके संबंधों पर निर्भर करता है. हूती समूह इस इलाके के आसपास के कई क्षेत्रों को नियंत्रित करता है और पहले भी समुद्री यातायात को प्रभावित कर चुका है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक नवंबर 2023 से हूतियों ने रेड सी मार्ग में 100 से ज्यादा हमले किए, जिससे 60 से अधिक देशों के जहाज प्रभावित हुए. 2024 के अंत तक इस मार्ग से गुजरने वाले तेल का प्रवाह 50 प्रतिशत से ज्यादा घट गया और एलएनजी टैंकरों की आवाजाही लगभग रुक गई थी.
युद्ध में अभी सीधे शामिल नहीं हुए हूती
मौजूदा संघर्ष में हूती विद्रोही अभी तक सीधे तौर पर शामिल नहीं हुए हैं, लेकिन उन्होंने पहले कहा था कि जरूरत पड़ने पर वे कार्रवाई कर सकते हैं.
हालांकि गाजा युद्ध के दौरान अमेरिकी हमलों और इजरायली कार्रवाइयों से उन्हें नुकसान भी हुआ, लेकिन उनके पास अभी भी ड्रोन, मिसाइल, समुद्री माइन और तेज हमला करने वाली नावें मौजूद हैं. इन साधनों के जरिए वे बाब-अल-मंदेब को जहाजों के लिए खतरनाक बना सकते हैं.
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