Saudi-Pakistan Defence Deal: सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक रिश्तों में एक नई गर्माहट देखने को मिल रही है. इसी बदलते समीकरण के बीच सऊदी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, जनरल फैय्याद बिन हमद अल-रुवैली पाकिस्तान के दौरे पर पहुंचे, जहाँ उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर से हुई.
यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए डिफेंस एग्रीमेंट के बाद यह किसी सऊदी शीर्ष सैन्य अधिकारी की पहली पाकिस्तान यात्रा है.
द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को नई दिशा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और जनरल फैय्याद के बीच हुई विस्तृत बातचीत में रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को और व्यापक बनाने पर सहमति बनी. बैठक में संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, युद्धाभ्यास और रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान को और मजबूत करने पर जोर दिया गया.
शहबाज शरीफ ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान रक्षा और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है. दोनों नेताओं ने सितंबर में हुए ‘स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ को भी इस सहयोग की मजबूत नींव बताया, यह वह समझौता है जिसके तहत किसी भी बाहरी हमले को दोनों देशों पर हमला माना जाएगा.
डिफेंस एग्रीमेंट का बढ़ता महत्व
बैठक के दौरान शहबाज शरीफ ने बताया कि यह समझौता पाकिस्तान और सऊदी अरब के रक्षा ढांचे को मजबूत और भरोसेमंद बनाता है. उन्होंने यह भी दोहराया कि दोनों देश आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई में एकजुट हैं और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करेंगे. जनरल फैय्याद ने भी पाकिस्तान की भूमिका की प्रशंसा की और कहा कि रियाद इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है.
आसिम मुनीर और सऊदी जनरल की बैठक
इसके बाद जनरल फैय्याद ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात की. यह बैठक रक्षा सहयोग को विस्तार देने, सुरक्षा तालमेल बढ़ाने और आतंकवाद-रोधी अभियानों को और प्रभावी बनाने पर केंद्रित रही.
पाकिस्तानी सेना के बयान के मुताबिक, दोनों देशों ने रक्षा और सैन्य सहयोग को “कई गुना बढ़ाने” का संकल्प दोहराया है. बैठक में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर भी चर्चा हुई, साथ ही भविष्य में नई रक्षा डील की संभावना पर भी संकेत मिले.
क्षेत्रीय सुरक्षा में नया अध्याय
सऊदी जनरल की यह यात्रा इस बात का संकेत है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान अपने सामरिक संबंधों को सिर्फ मजबूती नहीं दे रहे, बल्कि उन्हें व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे के हिस्से के रूप में भी देखते हैं. आने वाले समय में दोनों देशों के बीच नए सैन्य समझौते और संयुक्त पहल देखने को मिल सकती हैं.
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