अब बूंद-बूंद को तरसेगा पाकिस्तान, अफगानिस्तान ने पानी देने से किया इनकार, कुनार नदी पर बनेगा डैम

भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के बाद अब अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को नियंत्रित करने का बड़ा फैसला लिया है.

Afghanistan refuses to provide water to Pakistan
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भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के बाद अब अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को नियंत्रित करने का बड़ा फैसला लिया है. अफगानिस्तान के सूचना मंत्रालय ने घोषणा की है कि तालिबान सरकार कुनार नदी पर एक बड़ा बांध बनाने की तैयारी कर रही है, जिससे पाकिस्तान की जल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ेगा.

अफगान सूचना मंत्रालय के अनुसार, तालिबान के सर्वोच्च नेता मावलवी हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने देश के जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को शीघ्र शुरू करने का निर्देश दिया है. मंत्रालय के उपमंत्री मुहाजिर फराही ने कहा कि पानी और ऊर्जा मंत्रालय को आदेश दिया गया है कि घरेलू कंपनियों को ठेका देकर निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाए, और विदेशी कंपनियों का इंतजार न किया जाए.

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब हाल ही में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर हुए संघर्ष में 37 अफगान नागरिकों की मौत और 425 के घायल होने की घटनाओं से दोनों देशों के संबंध और बिगड़ गए हैं.

कुनार नदी का 70–80% पानी पाकिस्तान को जाता है

कुनार नदी लगभग 480 किलोमीटर लंबी है और यह अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों से निकलकर पाकिस्तान में प्रवेश करती है, जहाँ इसे चितराल नदी कहा जाता है. यह आगे चलकर काबुल नदी में मिल जाती है, जो अंततः सिंधु नदी का हिस्सा बन जाती है.

वर्तमान में कुनार नदी के पानी का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान उपयोग करता है. अफगानिस्तान का डैम प्रोजेक्ट लागू होने के बाद पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांत के बाजौर और मोहम्मद जैसे इलाकों में सिंचाई पर गहरा असर पड़ेगा. इन क्षेत्रों की खेती पूरी तरह कुनार नदी पर निर्भर है.

इसके अलावा, पाकिस्तान के चितराल जिले में कुनार नदी पर चल रहे 20 से अधिक छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट्स भी प्रभावित होंगे. ये सभी रन-ऑफ-रिवर सिस्टम पर आधारित हैं, यानी नदी के सीधे बहाव से बिजली बनाते हैं. यदि नदी का प्रवाह घटता है, तो बिजली उत्पादन पर बड़ा असर पड़ेगा.

डैम से ऊर्जा और कृषि में आएगी क्रांति

अफगानिस्तान के जल एवं ऊर्जा मंत्रालय के प्रवक्ता मतीउल्लाह आबिद ने बताया कि बांध का सर्वे और डिजाइन पूरा हो चुका है. तालिबान सरकार का कहना है कि यह परियोजना पूरी होने के बाद 45 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता रखेगी और 1.5 लाख एकड़ खेती योग्य भूमि को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा.

सरकार का दावा है कि इससे न केवल देश की ऊर्जा जरूरतों में कमी आएगी, बल्कि खाद्य सुरक्षा में भी सुधार होगा. यह कदम अफगानिस्तान को लंबे समय से झेल रहे ऊर्जा संकट से निकालने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

दोनों में जल बंटवारे पर नहीं है कोई समझौता

विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच अब तक काबुल नदी और उसकी सहायक नदियों के जल वितरण को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं है. पाकिस्तान बार-बार यह चिंता जता चुका है कि अफगानिस्तान के बांध प्रोजेक्ट्स उसके जल आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं.

हालांकि, तालिबान सरकार का कहना है कि अफगानिस्तान को अपने प्राकृतिक संसाधनों का पूरा उपयोग करने का अधिकार है और वह किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आएगा.

पाक-अफगान तनाव के बीच लिया फैसला

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 9 से 18 अक्टूबर के बीच सीमा पर भारी झड़पें हुई थीं. पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हवाई हमले किए, जबकि काबुल ने पाकिस्तान पर नागरिक इलाकों पर बमबारी का आरोप लगाया.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी हमलों में 37 अफगान नागरिकों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए. इन हमलों के बाद तालिबान ने पाकिस्तान पर सीमा विवाद और हवाई क्षेत्र के उल्लंघन के आरोप लगाए. इस तनाव के बीच कुनार नदी पर डैम बनाने का आदेश तालिबान का पाकिस्तान को सीधा संदेश माना जा रहा है.

दोनों देशों के बीच विवाद की जड़ डूरंड लाइन है, वह सीमा जो ब्रिटिश शासन के दौरान भारत और अफगानिस्तान के बीच खींची गई थी. यह आज भी दोनों तरफ के पश्तून समुदायों के बीच असहमति और तनाव का कारण है.

भारत ने भी सिंधु जल संधि को स्थगित किया था

भारत ने 1960 में पाकिस्तान के साथ हुई सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को 23 अप्रैल 2024 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद स्थगित कर दिया था. इस संधि में सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियाँ- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज शामिल हैं.

सिंधु नदी प्रणाली का जलग्रहण क्षेत्र 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसमें 47% पाकिस्तान, 39% भारत, 8% चीन और 6% अफगानिस्तान का हिस्सा आता है. इन क्षेत्रों में लगभग 30 करोड़ लोग रहते हैं, जिनका जीवन इन नदियों पर निर्भर है.

1960 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान ने कराची में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों में भारत और अब अफगानिस्तान दोनों ने पाकिस्तान को पानी को लेकर चेतावनी भरा संदेश दिया है.

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