अडानी की कंपनी का ड्रोन बना दुश्मनों के लिए काल, ऑपरेशन सिंदूर में भी हुआ इस्तेमाल, जानें इसकी ताकत

7 मई को लॉन्च किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य नीति और तकनीकी दक्षता के एक नए युग की शुरुआत का संकेत दिया है.

Adanis companys drone was used in Operation Sindoor
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- ANI

नई दिल्ली: 7 मई को लॉन्च किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की सैन्य नीति और तकनीकी दक्षता के एक नए युग की शुरुआत का संकेत दिया है. पारंपरिक सैन्य प्रतिक्रिया से परे जाकर भारत ने इस अभियान में सीमित दायरे में रहते हुए अत्याधुनिक हथियारों और ड्रोन तकनीक का ऐसा संयोजन किया, जिसने दुश्मन को बिना किसी सीमा उल्लंघन के गहरी क्षति पहुंचाई.

इस अभियान में स्काईस्ट्राइकर (SkyStriker) नामक जिस ड्रोन का उपयोग हुआ, वह भारत में रक्षा क्षेत्र में बढ़ती निजी भागीदारी और स्वदेशीकरण का भी प्रतीक है. रिपोर्टों के अनुसार, यह ड्रोन अडानी ग्रुप की रक्षा शाखा और इजरायली रक्षा तकनीकी कंपनी Elbit Systems के संयुक्त उद्यम द्वारा विकसित किया गया है.

क्या है स्काईस्ट्राइकर ड्रोन?

SkyStriker एक loitering munition है — यानी ऐसा हथियार जो टारगेट क्षेत्र में उड़ता रहता है, लक्ष्य को ढूंढता है और फिर उस पर सटीक हमला करता है. इसे आम बोलचाल में कामिकेज ड्रोन भी कहा जाता है, क्योंकि यह लक्ष्य के साथ टकराकर खुद को भी नष्ट कर देता है.

मुख्य विशेषताएं:

कम ध्वनि, उच्च घातकता: इसकी इलेक्ट्रिक मोटर इसे बेहद शांत बनाती है, जिससे यह दुश्मन की रडार और ऑडियो निगरानी से बच निकलता है.

उच्च सटीकता: इसमें 5–10 किलोग्राम का विस्फोटक वारहेड लगाया जा सकता है, जो सटीक निशाना लगाता है.

ऑटोनोमस और मैनुअल मोड: इसे पूरी तरह ऑटोनॉमस तरीके से भी छोड़ा जा सकता है, या फिर ऑपरेटर द्वारा रियल टाइम में लक्ष्य तय कर हमला किया जा सकता है.

बैकपैक से लॉन्च योग्य: इसे लॉन्च करने के लिए किसी भारी इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत नहीं होती, जिससे यह फॉरवर्ड बेस या सीमावर्ती पोस्ट से भी छोड़ा जा सकता है.

सीमा उल्लंघन नहीं, फिर भी करारा प्रहार

इस अभियान की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि भारतीय सेना ने सीमा पार किए बिना, लक्ष्य को निशाना बनाया. भारतीय सशस्त्र बलों ने स्पष्ट किया कि यह मिशन पूरी तरह से भारतीय क्षेत्र के भीतर रहकर अंजाम दिया गया — यानी ड्रोन द्वारा किए गए हमले क्रॉस-बॉर्डर "loiter-strike" ऑपरेशन्स थे.

रणनीतिक लाभ: सीमा उल्लंघन का आरोप नहीं: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत पर कोई आक्रामक कार्रवाई का आरोप नहीं लगा सकता.

कम रिस्क, अधिक प्रभाव: मानव हानि का खतरा शून्य और दुश्मन को बड़ा नुकसान.

साइकोलॉजिकल एडवांटेज: दुश्मन जानता है कि बिना सीमा लांघे भी हमला हो सकता है.

अडानी और इज़राइल की तकनीकी साझेदारी

SkyStriker भारत में अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज और Elbit Systems के संयुक्त उपक्रम द्वारा निर्मित किया गया है. यह संयुक्त निर्माण न केवल भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि भविष्य के युद्धों में निजी क्षेत्र की कंपनियाँ भी निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं.

अडानी डिफेंस की भूमिका:

अडानी ग्रुप के डिफेंस डिवीजन के सीईओ आशीष राजवंशी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद कहा, "हम भारतीय सेना की बहादुरी को नमन करते हैं. अडानी डिफेंस हमेशा भारत की सेवा में तत्पर रहेगा. यह मिशन हमारी तकनीकी साझेदारी और भारतीय क्षमता का प्रतीक है."

इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि अब रक्षा उद्योग केवल सार्वजनिक क्षेत्र का विशेषाधिकार नहीं रह गया है.

ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद पर केंद्रित

इस ऑपरेशन का उद्देश्य पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाना नहीं था. रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, "हमारी कार्रवाई केंद्रित, मापी हुई और गैर-उत्तेजक थी. केवल आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया, ना कि किसी सैन्य अड्डे या नागरिक ठिकाने को."

इस ऑपरेशन में कुल 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया — जिनमें से कई पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में थे. ये ठिकाने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से जुड़े थे.

ड्रोन वॉरफेयर की दिशा में भारत का कदम

विश्व की बड़ी सेनाओं — अमेरिका, इज़राइल, चीन — पहले ही ड्रोन वॉरफेयर की दिशा में बड़ी छलांगें लगा चुकी हैं. भारत का स्काईस्ट्राइकर जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग यह दर्शाता है कि अब भारत भी इस रेस में पीछे नहीं है.

भविष्य की संभावनाएँ:

  • स्वार्म ड्रोन टेक्नोलॉजी: जिसमें एक साथ सैकड़ों छोटे ड्रोन टारगेट पर हमला करते हैं.
  • AI-नियंत्रित ड्रोन्स: स्वचालित निर्णय और हमले की क्षमता.
  • हाइब्रिड ड्रोन: जिनमें निगरानी और हमला दोनों क्षमताएं होती हैं.

ये भी पढ़ें- इंडियन एयर डिफेंस सिस्टम vs पाकिस्तानी लड़ाकू विमान... कौन किसपर पड़ा भारी? देखें जंग का यह वीडियो