8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन को लेकर एक बड़ी चर्चा शुरू हो गई है. भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने 8वें वेतन आयोग के लिए अपने प्रस्ताव में न्यूनतम बेसिक सैलरी 72,000 रुपये करने की मांग रखी है. इसके साथ ही अधिकतम वेतन 10 लाख रुपये प्रति माह और फिटमेंट फैक्टर 4.0 करने का सुझाव भी दिया गया है.
यह प्रस्ताव नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मैकेनिज्म (NC-JCM) के स्टाफ साइड के सदस्य के रूप में BPMS ने आयोग को सौंपा है. संगठन का कहना है कि यह मांग कर्मचारियों के जीवन स्तर, महंगाई और देश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर तैयार की गई है.
क्या है मौजूदा वेतन व्यवस्था?
अभी लागू 7वां वेतन आयोग के तहत एंट्री लेवल (लेवल-1) कर्मचारी की बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है. BPMS की 72,000 रुपये की मांग मौजूदा बेसिक वेतन से लगभग चार गुना ज्यादा है.
संगठन ने अधिकतम बेसिक सैलरी को भी 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की भी बात कही गई है.
72,000 रुपये का आंकड़ा कैसे निकला?
BPMS ने अपने प्रस्ताव का आधार सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों को बनाया है.
इसी वृद्धि दर को मौजूदा वेतन पर लागू करके नई सैलरी का अनुमान लगाया गया.
गणना का आधार:
इसके बाद फैमिली यूनिट के आधार पर गणना की गई.
फिर 72,000 रुपये ही क्यों?
संगठन का कहना है कि गणित के हिसाब से सैलरी 88,000 रुपये से ज्यादा बनती है, लेकिन इसे लागू करना सरकार के लिए भारी पड़ सकता है.
इसलिए एक संतुलित और व्यावहारिक आंकड़ा तय करते हुए 72,000 रुपये का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि:
फिटमेंट फैक्टर 4.0 का मतलब
BPMS ने फिटमेंट फैक्टर 4.0 रखने की मांग की है. इसमें 1.58 हिस्सा महंगाई भत्ते के समायोजन का माना गया है, जबकि बाकी हिस्सा वास्तविक वेतन वृद्धि को दर्शाता है.
प्रस्तावित नया वेतन ढांचा
संगठन ने नए पे स्ट्रक्चर का सुझाव भी दिया है, जिसमें कुछ लेवल को मर्ज करने की बात कही गई है.
फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्ताव है, जिसे 8वां वेतन आयोग के सामने रखा गया है. अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा.
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