पुतिन के साथ भारत आ रहे हैं ये 7 रूसी मंत्री, दो दिनों में इन 25 समझौतों पर लगेगी मुहर

    Putin India Visit: दुनिया की बदलती राजनीतिक तस्वीर के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर भारत आ रहे हैं और इस बार उनका दौरा सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी का संकेत है.

    7 Russian ministers are coming to India with Putin these 25 agreements will be sealed in two days
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    Putin India Visit: दुनिया की बदलती राजनीतिक तस्वीर के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर भारत आ रहे हैं और इस बार उनका दौरा सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी का संकेत है. 4 से 5 दिसंबर तक होने वाली इस यात्रा के दौरान पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकातें कई अहम फैसलों का रास्ता खोलेंगी. 

    दो दिनों में 25 बड़े समझौते होने की संभावना है, जो व्यापार से लेकर रक्षा और ऊर्जा तक, भारत-रूस साझेदारी को मजबूत करेंगे. इस यात्रा को 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन का केंद्रबिंदु भी माना जा रहा है.

    पुतिन के साथ कौन आ रहा है रूस से?

    इस हाई-प्रोफाइल दौरे की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुतिन के साथ रूस के सात बड़े मंत्री भारत पहुंचेंगे. रक्षा मंत्री बेलूसोव, वित्त मंत्री एंतोन सिलुआनोव और सेंट्रल बैंक की गवर्नर एल्विरा नबीउलिना पहले ही लिस्ट में शामिल हैं, जबकि बाकी चार मंत्रियों के नाम रूस ने अभी सार्वजनिक नहीं किए हैं. सरकारी प्रतिनिधिमंडल के अलावा रूस के कई प्रभावशाली बिजनेस लीडर्स भी इस यात्रा का हिस्सा होंगे. इनमें सबसे प्रमुख नाम है, रोसनेफ्ट के प्रमुख इगोर सेचिन और मीडिया जगत की जानी-मानी हस्ती मार्गरिटा सिमोनियन, जो भारत में नए टीवी चैनल RT India के लॉन्च में पुतिन के साथ शामिल होंगी.

    किन क्षेत्रों में साइन होंगे समझौते?

    भारत और रूस इस यात्रा के दौरान व्यापक सहयोग पर मुहर लगाने जा रहे हैं. दोनों देशों के बीच व्यापार, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और मीडिया जैसे क्षेत्रों में समझौते तैयार किए जा रहे हैं. एक बेहद महत्वपूर्ण MoU लेबर मोबिलिटी पर होगा क्योंकि रूस में कामगारों की मांग बढ़ रही है और भारत इस अवसर को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से अपने नागरिकों तक पहुँचाना चाहता है.

    दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को कम करने पर विशेष चर्चा होगी, वहीं रक्षा और ऊर्जा सहयोग इस दौरे के सबसे अहम हिस्से बनेंगे. रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने साफ किया है कि S-400 मिसाइल सिस्टम और Su-57 लड़ाकू विमान इस दौरे की प्रमुख चर्चा का हिस्सा होंगे. तेल व्यापार को और आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर भी दोनों देश काम करेंगे. फिलहाल भारत-रूस व्यापार 63 अरब डॉलर तक पहुँच चुका है और दोनों की कोशिश है कि यह 2030 तक 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर जाए.

    अमेरिकी दबाव और रूस की स्पष्ट प्रतिक्रिया

    रूस ने इस दौरे के राजनीतिक महत्व को भी साफ शब्दों में रखते हुए कहा है कि उसे पता है, अमेरिका की तरफ से भारत पर दबाव रहता है. लेकिन रूस मानता है कि भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है, जो अपने फैसले खुद लेता है. रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के मुताबिक भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी दोस्ती भरोसे और सम्मान पर आधारित है, और यह यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक, रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक संबंधों को और मजबूती देगी.

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