Haryana Rajasthan Jal Vivad: नई दिल्ली में सोमवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हरियाणा और राजस्थान सरकार के बीच यमुना जल परियोजना को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ. इस मौके पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल भी मौजूद रहे.
तीन दशक पुरानी पानी की समस्या का समाधान
अमित शाह ने कहा कि यह समझौता करीब 30 साल पुरानी पानी की समस्या का समाधान करेगा. उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकारी संघवाद” और “संवाद से समाधान” की नीति का उदाहरण बताया. उनका कहना था कि अगर राज्य मिलकर काम करें, तो लंबे समय से चल रही समस्याओं को भी आसानी से हल किया जा सकता है.
आज का दिन मेरे लिए अत्यंत भावनात्मक है। मेरे प्रदेशवासी, विशेषकर शेखावाटी अंचल के लाखों परिवार, कई दशकों से यमुना के जल की प्रतीक्षा कर रहे थे। पेयजल, सिंचाई और उद्योग, हर क्षेत्र में पानी की कमी ने विकास की गति को प्रभावित किया। आज ऐसा प्रतीत होता है मानो यमुना माता ने राजस्थान… pic.twitter.com/gjbkuvKnvU
— Bhajanlal Sharma (@BhajanlalBjp) June 29, 2026
राजस्थान तक पहुंचेगा यमुना का पानी
इस समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर के बीच पश्चिमी यमुना नहर से करीब 580 एमसीएम पानी राजस्थान भेजा जाएगा. यह पानी तीन बड़ी भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए पहुंचाया जाएगा, जिनका व्यास 3.6 मीटर से ज्यादा होगा. इस योजना का मकसद राजस्थान और हरियाणा के कई इलाकों में पीने के पानी की उपलब्धता बढ़ाना है.
हथिनीकुंड बैराज से होगी पानी की सप्लाई
राजस्थान सरकार के मुताबिक, यह पानी हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन के जरिए राजस्थान के चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक पहुंचेगा. इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 34,102 करोड़ रुपये बताई जा रही है.
किन जिलों को मिलेगा फायदा?
इस परियोजना से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनू जिलों को सीधा फायदा मिलेगा. वहीं हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद जिलों में भी पेयजल आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद है. सरकार का कहना है कि इससे खासकर सूखे और कम बारिश वाले इलाकों को बड़ी राहत मिलेगी.
पानी के बेहतर इस्तेमाल पर जोर
अमित शाह ने कहा कि अब तक जो बारिश का पानी बेकार बह जाता था, उसका बेहतर इस्तेमाल किया जाएगा. इस पानी से न सिर्फ लोगों की जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि तालाब भरने और भूजल स्तर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
विवाद से बचने के लिए खास व्यवस्था
सरकार के अनुसार इस समझौते में पानी के बंटवारे, लागत, रखरखाव और निगरानी से जुड़ी सभी बातें शामिल की गई हैं. किसी भी विवाद की स्थिति में समाधान के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था तय की गई है. अमित शाह ने कहा कि यह मॉडल आने वाले कई सालों तक बिना विवाद के काम कर सकता है.
लाखों लोगों को मिलेगा फायदा
इस परियोजना का उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से राजस्थान को उसका हिस्सा दिलाना और उसे पाइपलाइन के जरिए सही जगह तक पहुंचाना है. सरकार का दावा है कि इससे लाखों लोगों को नियमित पेयजल मिलेगा और क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.
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