RBI Repo Rate: इकोनॉमी की रफ्तार पकड़ेगी नई उड़ान! SBI ने RBI के अगले कदम पर किया बड़ा खुलासा

RBI Repo Rate: SBI रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7 फीसदी से ज्यादा रहने का अनुमान है, लेकिन महंगाई और वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए RBI रेपो रेट पर यथास्थिति बनाए रख सकता है.

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RBI Repo Rate: भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार और महंगाई के बीच संतुलन साधने की चुनौती के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं. इसी बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) रिसर्च की एक रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि केंद्रीय बैंक इस बार भी रेपो रेट में बदलाव करने से बच सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत आर्थिक विकास के बावजूद महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए RBI सतर्क रुख अपना सकता है.

SBI रिसर्च के अनुमान के अनुसार, 3 से 5 अगस्त के बीच होने वाली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने की संभावना अधिक है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है और GDP ग्रोथ 7 फीसदी से ऊपर रहने का अनुमान है.

मजबूत विकास दर के बावजूद RBI क्यों बरतेगा सावधानी

SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों के बावजूद मजबूती दिखा रही है. वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिका की धीमी आर्थिक रफ्तार और बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत की विकास दर उम्मीद से बेहतर रहने की संभावना है.

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में देश की GDP वृद्धि दर 7 फीसदी से अधिक रह सकती है. घरेलू मांग, बेहतर मानसून और कृषि क्षेत्र में सुधार जैसे कारण आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद कर सकते हैं.

हालांकि, आर्थिक विकास के सकारात्मक संकेतों के बावजूद RBI के सामने महंगाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. यही वजह है कि केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में ब्याज दरों में कटौती करने से बच सकता है.

महंगाई बनी RBI के लिए सबसे बड़ी चिंता

SBI रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में महंगाई को लेकर चिंता जताई है. अनुमान के मुताबिक, आने वाली दो तिमाहियों में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई 5 फीसदी से ऊपर रह सकती है. वहीं, वित्त वर्ष 2027 में औसत महंगाई दर करीब 5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये पर दबाव और वैश्विक बाजार में अस्थिरता जैसे कारण महंगाई के जोखिम को बढ़ा सकते हैं. ऐसे में RBI का फोकस आर्थिक विकास के साथ कीमतों को नियंत्रित रखने पर रहेगा. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती है तो केंद्रीय बैंक के लिए मौद्रिक नीति में नरमी लाना मुश्किल हो सकता है.

विदेशी मुद्रा भंडार और कैपिटल फ्लो से मिलेगी मजबूती

SBI रिसर्च ने भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेश और पूंजी प्रवाह में सुधार से देश की वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि जुलाई के अंत तक करीब 35 अरब डॉलर के कैपिटल फ्लो की उम्मीद है. इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने और अल्पकालिक विदेशी ऋण को कम करने में सफल रहा है. SBI रिसर्च का मानना है कि इन कदमों से रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी और भारतीय मुद्रा को मजबूती मिल सकती है.

रुपये में गिरावट को लेकर SBI रिसर्च की बड़ी टिप्पणी

रिपोर्ट में रुपये की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा की गई है. SBI रिसर्च का कहना है कि रुपये में आई गिरावट आर्थिक मूलभूत कारणों की तुलना में अधिक रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किए हैं. केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय भूमिका निभाते हुए रुपये पर दबाव को नियंत्रित करने की कोशिश की है.

SBI रिसर्च का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में रुपये को धीरे-धीरे मजबूत होने का मौका मिलना चाहिए.

अच्छे मानसून से अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा

घरेलू मोर्चे पर मानसून की स्थिति को भी आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. SBI रिसर्च के अनुसार, जुलाई में अच्छी बारिश के कारण देश में वर्षा की कमी घटकर करीब 13 फीसदी रह गई है.

इसके अलावा जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य हुआ है और खरीफ फसलों की बुवाई की स्थिति भी संतोषजनक बनी हुई है. बेहतर कृषि उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है और बाजार में मांग बढ़ाने में मदद कर सकता है.

वैश्विक जोखिमों पर RBI की नजर

जहां भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है, वहीं वैश्विक मोर्चे पर कई चुनौतियां बनी हुई हैं. SBI रिसर्च ने पश्चिम एशिया संकट, सप्लाई चेन में बाधा, महंगी कमोडिटी और अमेरिका की धीमी आर्थिक वृद्धि को प्रमुख जोखिम बताया है.

इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और लगातार जारी व्यापार तनाव भी वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा सकते हैं.

MPC बैठक में यथास्थिति रहने की संभावना

SBI रिसर्च के निष्कर्ष के अनुसार, भारत की आर्थिक विकास दर भले ही मजबूत बनी हुई है, लेकिन महंगाई, मुद्रा दबाव और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए RBI का रुख फिलहाल संतुलित रहने की संभावना है.

ऐसे में अगस्त में होने वाली MPC बैठक में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने का अनुमान लगाया जा रहा है. केंद्रीय बैंक का पूरा ध्यान आर्थिक विकास को समर्थन देने के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रण में रखने पर रहेगा.

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