बिहार के बक्सर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर चोर कितने शातिर हो सकते हैं. आमतौर पर चोरी की घटनाओं में नकदी, वाहन या कीमती सामान गायब होने की खबरें आती हैं, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है. यहां चोरों ने कथित तौर पर पूरे का पूरा मोबाइल टावर ही गायब कर दिया. 132 फीट ऊंचे टावर के साथ-साथ जनरेटर और अन्य तकनीकी उपकरणों के लापता होने की घटना ने पुलिस प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी हैरानी में डाल दिया है.
मरम्मत के लिए पहुंचे कर्मचारी तो उड़ गए होश
यह मामला डुमरांव थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर-18 का है. जानकारी के अनुसार, लंबे समय से बंद पड़े मोबाइल टावर की मरम्मत के लिए जीटीएल कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे थे. लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. जिस स्थान पर वर्षों से विशाल मोबाइल टावर खड़ा था, वहां सिर्फ खाली जमीन दिखाई दी. कंपनी के कर्मचारियों ने आसपास जांच-पड़ताल की, लेकिन टावर का कोई निशान नहीं मिला. इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने पुलिस से संपर्क किया.
टावर के साथ जनरेटर और उपकरण भी गायब
कंपनी की ओर से की गई प्रारंभिक जांच में पता चला कि सिर्फ टावर ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद 15 केवी का जनरेटर सेट और कई अन्य तकनीकी उपकरण भी गायब हैं. इसके बाद जीटीएल कंपनी ने डुमरांव थाने में लिखित शिकायत देकर मामले की एफआईआर दर्ज कराई. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.
कई दिनों तक चलता रहा टावर खोलने का काम?
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मोबाइल टावर करीब 15 वर्षों से इलाके में स्थापित था. लोगों का कहना है कि पिछले 15 से 20 दिनों से टावर नजर नहीं आ रहा था. कुछ लोगों का अनुमान है कि टावर को एक ही दिन में नहीं, बल्कि कई दिनों तक धीरे-धीरे खोलकर हटाया गया होगा. चूंकि टावर लंबे समय से बंद पड़ा था, इसलिए स्थानीय लोगों ने यह समझ लिया कि शायद कंपनी की ओर से इसे हटाया जा रहा है. इसी वजह से किसी ने इस गतिविधि पर विशेष ध्यान नहीं दिया. अब जब चोरी की आशंका सामने आई है तो इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं.
जमीन मालिक ने उठाए भुगतान से जुड़े सवाल
जिस जमीन पर यह मोबाइल टावर लगा हुआ था, उसके मालिक हरेनाथ यादव ने भी इस मामले में महत्वपूर्ण जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में कंपनी के साथ 12 साल का अनुबंध हुआ था, जिसकी अवधि 2022 में समाप्त हो गई थी.
हरेनाथ यादव का कहना है कि अनुबंध समाप्त होने के बाद कंपनी की ओर से उन्हें भुगतान नहीं किया गया. उन्होंने इस संबंध में कई बार कंपनी को नोटिस भी भेजे थे. अब टावर के गायब होने की घटना के बाद जमीन और भुगतान से जुड़े पुराने विवाद भी चर्चा का विषय बन गए हैं.
पुलिस हर पहलू से कर रही जांच
बक्सर के पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने बताया कि मोबाइल टावर हटाए जाने को लेकर शिकायत प्राप्त हुई है. पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है. जमीन मालिक समेत अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मामला वास्तव में चोरी का है या फिर किसी अन्य कारण से टावर हटाया गया है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी. फिलहाल यह घटना पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर 132 फीट ऊंचा टावर बिना किसी शोर-शराबे के कैसे गायब हो गया.
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