Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की सिल्क्यारा टनल में फंसे 41 श्रमिकों को मंगलवार की रात बाहर निकाल लिया गया है. इस बीच चर्चा में आए क्षेत्र के आराध्य देव बाबा बौखनाग (Baba Bokh Naag Devta) की भविष्यवाणी सही साबित हुई है. बौख के पश्वा, माली, संजय डिमरी ने वचन दिया था कि तीन दिन में सुंरग में फंसे श्रमिक सुरक्षित बाहर निकाल लिए जाएंगे और ठीक वैसा ही हुआ और तीसरे दिन की रात श्रमिकों को बाहर निकाल लिया गया. वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा का प्रकोप होने के बाद ही यह हादसा हुआ था. तो चलिए जानते हैं क्या है पूरी कहानी...
यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलक्यारा सुरंग हादसे को लेकर स्थानीय लोगों का दावा है कि निर्माण कंपनी ने बाबा के मंदिर को तोड़ दिया था और बदले में टनल के पास मंदिर बनाने का वादा किया था, लेकिन 2019 से अभी तक ऐसा नहीं किया गया. स्थानीय लोगों ने कई बार इसकी याद दिलाई, लेकिन अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया. वहीं, ग्रामीणों ने टनल के पास छोटा मंदिर बनाया था जिसे दिवाली से कुछ दिन पहले निर्माण कंपनी ने तोड़ दिया था. ऐसे में लोगों का कहना है कि ये हादसा देवता के प्रकोप से ही हुआ है.
बता दें कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान आए दिन श्रमिकों को बाहर निकालने का प्रयास असफल हो रहा था. जिसे देख रोज सुरंग से जुड़े अधिकारी, वहां मौजूद स्थानीय लोग बाबा बौखनाग के स्थान भाटिया गांव पहुंच श्रमिकों की सलामत के लिए अर्जी लगा रहे थे. इसे लेकर सीएम धामी (Pushkar Singh Dhami) ने भी सोशल मीडिया पर कहा था कि 'बाबा बौख नाग जी की असीम कृपा, करोड़ों देशवासियों की प्रार्थना एवं रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे सभी बचाव दलों के अथक परिश्रम के फलस्वरूप श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए टनल में पाइप डालने का कार्य पूरा हो चुका है. शीघ्र ही सभी श्रमिक भाइयों को बाहर निकाल लिया जाएगा.'
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बाबा बौख नाग का मंदिर स्थित है. ये पहाड़ों के देवता है जिनके दर्शन के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं. इस मंदिर की मान्यता है कि जो नंग पैर बाब के दर्शन करने आते हैं उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है. खासतौर पर नवविवाहित और निसंतान लोग अगर बाबा के दर्शन करते हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है. बाबा बौख नाग के यहां हर साल एक मेला भी लगता है जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं.