श्रीनिवास रामानुजन के बारे में 11 अनसुनी बातें, जानें 13 वर्ष की उम्र में किया था कौन सा कमाल?

National Mathematics Day 2023 Srinivasa Ramanujan Jayanti 22 Decemberअल्प आयु यानी सिर्फ 32 वर्ष की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कहने से पहले महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन ने गणित के कई सूत्र और सिद्धांत दिए, जिसका आज इस्तेमाल होता है. सच बात तो यह है उपलब्धि की बात करें तो रामानुजन गणित के क्षेत्र में गौस, यूलर और आर्किमिडीज से कमतर नहीं थे.

श्रीनिवास रामानुजन के बारे में 11 अनसुनी बातें, जानें 13 वर्ष की उम्र में किया था कौन सा कमाल?

National Mathematics Day 2023 Srinivasa Ramanujan Jayanti 22 December देश के महान गणितज्ञों में शुमार श्रीनिवास रामानुजन को दुनियाभर में उनकी अप्रतिम उपलब्धि के लिए जाना जाता है. 22 दिसंबर, 1887 को तमिलनाडु में जन्मे श्रीनिवास रामानुजन की जयंती को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है. केंद्र में सत्तासीन तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार (कांग्रेस सरकार) ने 26 फरवरी, 2021 को एक अधिसूचना जारी कर श्रीनिवास रामानुजन के जन्मदिन 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाए जाने का एलान किया था. इसके बाद से प्रत्येक वर्ष 22 दिसंबर को  दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है. यहां पर हम बता रहे हैं रामानुजन के बारे में कुछ रोचक बातें.

सिर्फ 13 वर्ष की उम्र में किया कमाल

श्रीनिवास रामानुजन ने गणित के क्षेत्र में अपने दौर के कई दिग्गजों को पीछे छोड़ा है. सिर्फ 13 वर्ष की उम्र में रामानुजन ने अडवांस्ड त्रिकोणमिति को हल करके परिवार के साथ गुरुओं और पूरी दुनिया को चकित कर दिया था. उन्होंने अपना खुद का जटिल सिद्धांत प्रतिपादित किया था. नन्ही  उम्र में ही उन्होंने कई प्रमेय विकसित किए, जिसका लोहा आज भी दुनिया मानती है.

सहपाठी नहीं समझ पाए

छात्र जीवन में रामानुजन हमेशा पढ़ाई में रमे रहते थे. कई बार उन्हें खाना खाने तक का ख्याल नहीं रहता था. संकोची स्वभाव का होने के चलते उनके कम ही दोस्त थे. दोस्त कम होने की एक और वजह थी कि वह हमेशा अध्ययन और खोज की बातें करते थे, इसलिए सहपाठी रामानुजन के साथ असहज महसूस करते थे. स्कूली पढ़ाई के दौरान जब उनके दोस्त खेलने-कूदने में बिजी रहते तो रामानुजन गणित की दुनिया में खोए होते थे.

फाइन आर्ट्स कोर्स में फेल

हैरत की बात यह है कि गणित में अद्वितीय प्रतिभा के बावजूद वह फाइन आर्ट्स कोर्सेज में सफलता हासिल नहीं कर सके. यह महज इत्तेफाक था, क्योंकि उन्होंने कई खोजें की, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर के छात्र, इंजीनियर और वैज्ञानिक करते हैं.   

जीएच हार्डी से हुई थी मुलाकात

रामानुजन उस दौर के गणितज्ञ जीएच हार्डी की पुस्तक ऑर्डर्स ऑफ इन्फिनिटी से बहुत प्रेरित थे. वर्ष 1913 में उन्होंने एक लिखा. वहीं, जब जीएच हार्डी भारत आए तो दोनों की मुलाकात हुई. जीएच हार्डी रामानुजन को अपने साथ इंग्लैंड ले गए, लेकिन वह वहां के मौसम के साथ एडजस्ट नहीं कर पाए. इंग्लैंड में उनकी तबीयत खराब हो गई. इसके बाद जब जीएच हार्डी अस्पताल में रामानुजन से मिलने गए तो वह जिस टैक्सी गए उसका नंबर 1729 था. यह वाकया दिलचस्प है कि जब जीएच हार्डी ने कैब के नंबर 1729 को बोरिंग बताया. इसका विरोध करते हुए रामानुजन ने कहा 'नहीं, यह बोरिंग नहीं बल्कि बहुत दिलचस्प नंबर है. उन्होंने बताया कि यह सबसे छोटी संख्या है जिसको दो अलग-अलग तरीके से दो घनों के योग के रूप में लिखा जा सकता है. इस वाकये के बाद 1729 को दोनों के सम्मान में हार्डी-रामानुजन नंबर कहा जाता है.

‘लंदन मैथमेटिक्स सोसाइटी’ चुने गए थे

रामानुजन ने कई प्रयोग किए. यहां तक कि फ्रैक्शन, इंफाइनट सीरीज के अलावा नंबर थ्योरी और मैथमेटिकल एनालिसिस में भी श्रीनिवास रामानुजन अहम काम किया था. यही वजह थी कि रामानुजन को गणित सिद्धांतों पर काम करने के कारण ‘लंदन मैथमेटिक्स सोसाइटी’ में चुना गया. ऐसा करने वाले वह पहले गणितज्ञ थे. 

आर्किमिडीज कम न थे भारतीय गणितज्ञ

अल्पआयु यानी सिर्फ 32 वर्ष की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कहने से पहले महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन ने गणित के कई सूत्र और सिद्धांत दिए, जिसका आज इस्तेमाल होता है. सच बात तो यह है उपलब्धि की बात करें तो रामानुजन गणित के क्षेत्र में गौस, यूलर और आर्किमिडीज से कमतर नहीं थे.

बन चुकी है जीवन पर फिल्म भी

रामानुजन ने बिना किसी औपचारिक शिक्षा के कई तरह की विलक्षण खोजें कीं और गणित के क्षेत्र में कई अद्वितीय सूत्र विकसित किए. उनके जीवन पर द मैन हू न्यू इनफिनिटी (The Man Who Knew Infinity) बन चुकी है, जो वर्ष 2015 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में श्रीनिवास रामानुजन की भूमिका ब्रिटिश-इंडियन एक्टर देव पटेल ने निभाई थी.  

निधन के बाद सामने आईं 3 नोटबुक्स

एक निर्धन ब्राह्मण परिवार में जन्मे श्रीनिवास रामानुजन की खूबियां हैं, जो उन्हें महान बनाती हैं. बताया जाता है कि कागज महंगा होने के चलते वह अपने डेरिवेशंस का परिणाम निकालने के लिए स्लेट का इस्तेमाल करते थे. यहां तक कि 3 नोटबुक्स भी रामानुजन ने लिखी हैं. हैरत की बात यह है कि तीनों नोटबुक्स उनके निधन के बाद सामने आईं. यहां पर बता दें कि पहली नोटबुक में कुल 351 पेज थे. इनमें भी 16 व्यवस्थित अध्याय थे और कुछ अव्यवस्थित सामग्रियां भी निधन के बाद बरामद हुई थीं इसके साथ ही दूसरी नोटबुक में कुल 256 पेज थे और 21 अध्याय और 100 अव्यवस्थित पेज थे. यह भी कम बड़ी बात नहीं है कि तीसरी नोटबुक में कुल 33 अव्यवस्थित पेज थे.

 

भाई-बहन की मौत

बेहद गरीब परिवार से संबंध रखने वाले रामानुजन के भाई-बहनों की मौत हो गई थी. वहीं, रामानुजन भी बचपन में स्मॉलपॉक्स का शिकार, लेकिन वह ठीक हो गए. गणित में महारत हासिल करने वाले रामानुजन को स्कूल जाना तक पसंद नहीं था. बताया जाता है कि घरवालों को स्थानीय कॉन्स्टेबल से आग्रह करना पड़ा था कि वह सुनिश्चित करें कि रामानुजन अपनी कक्षाएं न छोड़ें. बताया जाता है कि ये कान्स्टेबल उन पर पूरी निगरानी रखते थे.

कॉलेज के सवाल सिर्फ 11 वर्ष में हल किए

श्रीनिवास रामानुजन की प्रतिभा अद्भुत थी. उन्होंने सिर्फ 11 साल की उम्र में अपने घर में किराए पर रहने वाले कॉलेज के छात्रों की गणित की दो किताबें सॉल्व कर ली थीं. यह भी कम हैरत की बात नहीं कि सिर्फ 14 साल की उम्र में ही उन्हें मेरिट और सर्टिफिकेट्स मिलने लगे थे. 

सिर्फ 32 वर्ष की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

अपनी खोजों और सूत्रों से दुनिया को बहुत कुछ देने वाले रामानुनजन ने 26 अप्रैल, 1920 को टीबी (क्षय रोग) बीमारी के चलते दुनिया को अलविदा कर दिया. बताया जाता है कि 32 वर्ष के अल्प जीवनकाल में उन्होंने करीब 3900 समस्याओं का हल निकाला. यही वजह है कि रामानुजन के कई इक्वेशन और थ्योरम्स से गणित में कई क्षेत्रों में रिसर्च के दरवाजे खुल गए हैं. इन्हें इंजीनियर और वैज्ञानिक इस्तेमाल करते हैं. वहीं, 2012 में भारत सरकार ने उनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी, इसके बाद से प्रत्येक वर्ष भारत में 22 दिसंबर को  राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है.