नई दिल्ली, भारत24 डिजिटल डेस्क: देश की राजधानी दिल्ली में घूमने-फिरने के कई स्थल हैं. यहां पर खाने-पीने का भी उचित इंतजाम है. देश-दुनिया में मशहूर लालकिला और कुतुबमीनार के अलावा, दिल्ली में लोटस टेंपल और गार्डन ऑफ सेवन सेंसेस समेत कई अन्य स्थल भी बहुत मशहूर हैं. यहां पर रोजाना हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं. दिल्ली में इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा, नेशनल म्यूजियम और प्रधानमंत्री संग्रहालय भी हैं, जहां पर आप घूमने-फिरने के साथ अपने लिए रोचक जानकारी भी जुटा सकते हैं.हम यहां पर बता रहे हैं दिल्ली के उस जगह के बारे में जो बहुत डरावनी है और वहां लोगों को नहीं जाना चाहिए. अगर भूतों आदि पर विश्वास नहीं करते हैं तो ये स्थल आपको रोमांचित भी करेंगे. ऐसे में यहां पर घूमने-फिरने का प्लान बन सकते हैं.
खूनी दरवाजा
खूनी दरवाजा देश की राजधानी दिल्ली में बहादुरशाह जफर मार्ग पर दिल्ली गेट के निकट स्थित है. दिल्ली के मध्य होने के चलते यहां पर पर्यटकों का पहुचंना बेहद आसान है. यह बहुत कम लोग जानते होंगे कि लाल दरवाजा हो ही खूनी दरवाजा कहा जाता है. इतिहासकारों के अनुसार, खूनी दरवाजा दिल्ली के फिलहाल बचे 13 ऐतिहासिक दरवाजों में से एक है. यह फिरोज शाह कोटला मैदान के सामने स्थित है. इसके पश्चिम में मौलाना आजाज चिकित्सीय महाविद्यालय (Maulana Azad Medical College) का गेट भी है. भारतीय पुरातत्व विभाग (Indian Archaeological Department) ने इसे सुरक्षित स्मारक घोषित किया है. यहां पर बता दें कि दिल्ली का खूनी दरवाजा भी हॉन्टेड प्लेस जगहों शुमार है. ऐसा माना जाता है कि यहां पर तीन राजकुमार की बेरहमी से हत्या की गई थी. इतना ही नहीं अंग्रेजी शासन के दौरान यहां पर कई स्वतंत्र सेनानियों को भी फांसी पर लटकाया गया था. लोगों का कहना है कि यहां पर उनकी आत्माएं भटकती हैं, लेकिन विज्ञान इस सब चीजों को नहीं मानता है, ऐसे में अगर आप चाहें तो इस जगह पर लुत्फ उठा सकते हैं.
शेरशाह सूरी ने बनवाया था खूनी दरवाजा
इतिहासकारों की मानें तो सम्राट शेरशाह सूरी ने सन् 1540 में खूनी दरवाजा यानी लाल दरवाजा का निर्माण करवाया था. इसके निर्माण में मुगल-अफगान वास्तु कला का बखूबी इस्तेमाल नजर आता है. इतिहासकारों की मानें तो स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम आंदोलन के दौरान 1857 में विद्रोह हुआ था. इस दौरान सेना और ताकत के दम पर ब्रिटिश जनरल विलियम हॉन्डसन ने मुगल साम्राज्य के अंतिम सम्राट बहादुर शाह जफर के बेटे मिर्जा मुगल के साथ-साथ मिर्जा खिज्र तथा उसके पोते मिर्जा अबू बक्र को भी पकड़ लिया था. कहा जाता है कि विलियम हॉन्डसन के आदेश पर तीनों को नग्न कर लाल दरवाजे की जगह गोलियों से भून दिया गया था. इसके तीनों के शवों को उसी हालत में छोड़ दिया गया था. बाद में इन्हें जंगली जानवर खा गए.
अब्दुल रहीम खानखाना के बेटों को भी मारा गया
दिल्ली की सल्तनत संभालने वाले मुगल सम्राट जहांगीर ने अकबर के नवरत्नों में से एक अब्दुल रहीम खानखाना के दोनों बेटों को इसी दरवाजे पर हत्या करवा दी थी. इसके बाद दोनों के शवों को यहीं सड़ने के लिए छोड़ दिया गया था. दोनों पर आरोप यह था कि दोनों ने जहांगीर के खिलाफ साजिश रची थी, लेकिन इसका पुख्ता प्रमाण कभी सामने नहीं आया. मुगल बादशाहों में सबसे क्रूर औरंगजेब का माना जाता है. इतिहासकारों के अनुसार, औरंगजेब ने मुगल साम्राज्य पर शासन के के लिए अपने बड़े भाई दारा शिकोह की हत्या कर इसी दरवाजा पर लटका दिया था. यह अलग बात है कि औरंगजेब का भाई दाराशिकोह धार्मिक प्रवृत्ति का था और वह हिंदू धर्म और मान्यताओं की ओर झुकाव रखता है. उसे सूफी प्रवृत्ति बहुत पसंद थी.
सैकड़ों शरणार्थियों की हत्या
वर्ष 1947 देश का बंटवारा हुआ, जिसके भारत से अलग होकर पाकिस्तान बना. बंटवारे में न चाहते हुए हिंदू-मुसलमानों के बीच भी बंटवारा हो गया. इसके बाद दोनों ओर से लोगों की हत्याएं की गई. ऐसा कहा जाता है कि 1947 में देश के विभाजन के समय इसी दरवाजे पर सैकड़ों शरणार्थियों की हत्या कर दी गई थी. आज भी दहशत का आलम यह है कि आसपास के लोग कहते हैं कि य़हां पर लोगों की रोने-चीखने की आवाजें आती हैं. इसके साथ ही वर्ष 1739 में नादिरशाह ने दिल्ली पर आक्रमण के दौरान इसी लाल यानी खूनी दरवाजा पर कत्ल-ए-आम किया था. दिसबंर, 2002 में यहां पर एक छात्रा के साथ दुष्कर्म के बाद लोगों का प्रवेश बंद कर दिया गया.
कब और कहां घूमें
खूनी दरवाजा दिल्ली के मध्य में स्थित है. यहां पर ब्लू लाइन मेट्रो के अलावा बस के जरिये भी पहुंचा जा सकता है. खूनी दरवाजा सोमवार से शनिवार तक सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक खुला रहता है, लेकिन यह रविवार को बंद रहता है. इसके अलावा खूनी दरवाजे में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं है. अगर आप यहां पर घूमने फिरने आएं तो एक घंटे का समय निकालकर ही आएं. यकीन मानिए यहां पर आकर अच्छा लगेगा और एडवेंचर में विश्वास करते हैं तो जरूर आनंद आएगा.