
ऑयली स्किन पर कोई भी प्रोडक्ट लगाने से पहले उसकी सामग्री जरूर जांचें. गलत प्रोडक्ट त्वचा के पोर्स बंद कर सकता है, जिससे पिंपल्स और ब्लैकहेड्स की समस्या बढ़ सकती है. सही स्किनकेयर रूटीन अपनाकर त्वचा को लंबे समय तक हेल्दी रखा जा सकता है.

शिया बटर, कोको बटर या बहुत ज्यादा ऑयली मॉइश्चराइजर ऑयली स्किन के लिए सही नहीं माने जाते. ये त्वचा पर भारी परत बना सकते हैं और अतिरिक्त सीबम के साथ मिलकर मुंहासों की वजह बन सकते हैं. हल्के, जेल-बेस्ड मॉइश्चराइजर बेहतर विकल्प होते हैं.

नारियल तेल या अन्य भारी तेल चेहरे पर लगाने से पोर्स ब्लॉक हो सकते हैं. इससे मुंहासे, व्हाइटहेड्स और ब्लैकहेड्स की समस्या बढ़ सकती है. अगर फेस ऑयल इस्तेमाल करना हो तो पहले स्किन एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर रहेगा.

पेट्रोलियम जेली त्वचा पर एक मोटी परत बना देती है, जिससे ऑयली स्किन वालों को चिपचिपाहट महसूस हो सकती है. अगर पहले से पिंपल्स की समस्या है तो इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करें. स्किन टाइप के अनुसार ही स्किनकेयर प्रोडक्ट चुनें.

बार-बार या ज्यादा रगड़कर स्क्रब करने से त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत कमजोर हो सकती है. इससे जलन, रेडनेस और ऑयल प्रोडक्शन बढ़ सकता है. सप्ताह में 1-2 बार हल्के एक्सफोलिएटर का इस्तेमाल करना पर्याप्त माना जाता है.

ऑयली स्किन के लिए हमेशा ऑयल-फ्री, नॉन-कॉमेडोजेनिक और हल्के फॉर्मूले वाले प्रोडक्ट्स चुनें. दिन में दो बार चेहरा साफ करें, सनस्क्रीन लगाना न भूलें और किसी भी नए प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. इससे त्वचा स्वस्थ और पिंपल्स से काफी हद तक सुरक्षित रह सकती है.