
हिंदू धर्म में देवी-देवताओं के अनेक स्वरूपों की पूजा की जाती है. इनमें कुछ ऐसी देवियां भी हैं, जिनकी प्रसिद्धि सीमित क्षेत्रों तक ही है, लेकिन स्थानीय लोगों की आस्था उनसे गहराई से जुड़ी हुई है. मान्यता है कि ये देवियां अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. आइए जानते हैं ऐसी 6 कम चर्चित लेकिन पूजनीय देवियों के बारे में.

कर्ण माता को संकट हरने वाली देवी माना जाता है.मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती है. कई स्थानों पर लोग परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा के लिए भी इनकी आराधना करते हैं.

गुजरात में खोड़ियार माता की विशेष मान्यता है. कहा जाता है कि वे अपने भक्तों को साहस और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. दूर-दूर से श्रद्धालु उनके मंदिरों में दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं.

राजस्थान के कई इलाकों में खेमज माता को कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि उनकी कृपा से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. भक्त हर शुभ कार्य से पहले उनका आशीर्वाद लेना शुभ मानते हैं.

दस महाविद्याओं में शामिल मां कमलात्मिका को धन, वैभव और सौभाग्य की देवी माना जाता है. उनकी साधना से आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा मिलने की मान्यता है. तंत्र साधना में भी उनका विशेष महत्व बताया गया है.

नवदुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी शक्ति और पराक्रम का प्रतीक हैं. अविवाहित कन्याएं उत्तम जीवनसाथी की कामना से उनकी पूजा करती हैं। नवरात्रि में उनके स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है.

मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनकी पूजा से स्वास्थ्य, ऊर्जा और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. नवरात्रि के चौथे दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है.

देश के अलग-अलग हिस्सों में इन देवियों की पूजा की परंपराएं अलग-अलग हैं. भले ही इनके बारे में कम लोग जानते हों, लेकिन स्थानीय लोगों की आस्था इनसे गहराई से जुड़ी हुई है. मान्यता है कि ये देवियां अपने भक्तों और पूरे क्षेत्र की रक्षा करती हैं.