इस रहस्यमयी द्वीप पर जाना है सख्त मना! जो पहुंचा, उसके लौटने की गारंटी नहीं, जानिए क्यों है इतना खतरनाक

समुद्र के बीच घने जंगलों से घिरा एक ऐसा द्वीप भी है, जहां बाहरी दुनिया से दूरी बनाए रखना ही जीवन का हिस्सा है. भारत का उत्तर सेंटिनल द्वीप अपनी रहस्यमयी जनजाति और सख्त प्रतिबंधों के कारण दुनियाभर में चर्चा में रहता है.

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समुद्र के बीच घने जंगलों से घिरा एक ऐसा द्वीप भी है, जहां बाहरी दुनिया से दूरी बनाए रखना ही जीवन का हिस्सा है. भारत का उत्तर सेंटिनल द्वीप अपनी रहस्यमयी जनजाति और सख्त प्रतिबंधों के कारण दुनियाभर में चर्चा में रहता है. अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह का यह इलाका सेंटिनलीज जनजाति का घर है, जो सदियों से आधुनिक सभ्यता से अलग रहकर अपना जीवन जी रही है.

बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग है सेंटिनलीज जनजाति

सेंटिनलीज समुदाय को दुनिया की सबसे अलग-थलग जनजातियों में गिना जाता है. इनके जीवन के बारे में बाहरी दुनिया को बेहद सीमित जानकारी है. माना जाता है कि समुदाय आज भी शिकार और जंगल से मिलने वाले संसाधनों पर निर्भर है. बाहरी लोगों की मौजूदगी को यह जनजाति स्वीकार नहीं करती और द्वीप के पास पहुंचने वालों को धनुष-बाण से दूर रहने का संकेत देती रही है.

क्यों लगाया गया है द्वीप पर जाने का प्रतिबंध?

सेंटिनलीज समुदाय की सुरक्षा और उनके अस्तित्व को बनाए रखने के लिए भारत सरकार ने उत्तर सेंटिनल द्वीप के आसपास का क्षेत्र संरक्षित रखा है. बाहरी लोगों का संपर्क इस समुदाय के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है, क्योंकि अलग-थलग रहने के कारण उनमें आम संक्रामक बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता सीमित हो सकती है. इसी वजह से आम लोगों के लिए द्वीप पर जाना प्रतिबंधित है और समुदाय को उसकी प्राकृतिक जीवनशैली में रहने दिया जाता है.

सुनामी के बाद हेलीकॉप्टर पर भी चलाए तीर

2004 की सुनामी के बाद जब प्रशासन ने यह जानने के लिए हवाई निगरानी की कि द्वीप पर जनजाति सुरक्षित है या नहीं, तब वहां मौजूद लोगों ने हेलीकॉप्टर की ओर तीर चलाए थे. यह घटना इस बात का संकेत मानी गई कि समुदाय आज भी बाहरी संपर्क से दूरी बनाए रखना चाहता है. द्वीप से जुड़ी कई घटनाओं में बाहरी लोगों की मौजूदगी के दौरान हिंसक प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी भी मिलती रही है.

मिशनरी जॉन एलन चाऊ की मौत ने खींचा ध्यान

2018 में अमेरिकी मिशनरी जॉन एलन चाऊ ने प्रतिबंध के बावजूद उत्तर सेंटिनल द्वीप पर पहुंचकर जनजाति से संपर्क करने की कोशिश की थी. रिपोर्टों के अनुसार, द्वीप पर पहुंचने के बाद उसकी हत्या कर दी गई. इस घटना के बाद एक बार फिर दुनिया का ध्यान इस समुदाय और भारत के उस कानून की ओर गया, जिसके तहत सेंटिनलीज जनजाति और उनके क्षेत्र को बाहरी हस्तक्षेप से संरक्षित किया गया है. उत्तर सेंटिनल द्वीप आज भी इसी वजह से दुनिया के सबसे संवेदनशील और रहस्यमयी इलाकों में शामिल है.

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