नई दिल्ली: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से सोने की गैर-जरूरी खरीद से बचने की अपील की है. उन्होंने आर्थिक स्थिरता, विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और देश की अर्थव्यवस्था को सहयोग देने के लिए लोगों से एक साल तक सोने की खरीद में संयम बरतने का आग्रह किया. यह पहली बार नहीं है जब भारत में किसी सरकार या शीर्ष नेतृत्व ने इस तरह की अपील की हो. देश के आर्थिक इतिहास में कई बार ऐसे हालात आए हैं जब सोने की खपत को नियंत्रित करने के लिए सरकारों ने जनता से सहयोग मांगा है.
पीएम मोदी की हालिया अपील
10 मई 2026 को हैदराबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपने दैनिक जीवन में बदलाव लाने की अपील की. उन्होंने विशेष रूप से कहा कि अनावश्यक सोने की खरीद से बचना चाहिए ताकि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके.
इसके साथ ही उन्होंने ईंधन के सीमित उपयोग पर भी जोर दिया. पीएम मोदी ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बचत जरूरी है और इसके लिए सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो और कार-पूलिंग जैसे विकल्प अपनाने चाहिए. उनका संदेश था कि छोटे-छोटे बदलाव मिलकर बड़ी आर्थिक मजबूती दे सकते हैं.
यूपीए सरकार के समय की अपील (2013)
इस तरह की अपील पहले भी की जा चुकी है. वर्ष 2013 में जब पी. चिदंबरम केंद्रीय वित्त मंत्री थे, तब उन्होंने जनता से सोना कम खरीदने की अपील की थी.
उन्होंने कहा था कि भारत में सोने का उत्पादन नहीं होता और देश को इसे आयात करना पड़ता है. इसके लिए डॉलर का इस्तेमाल होता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है. उस समय उन्होंने यह भी समझाया था कि भले ही लोग सोना रुपये में खरीदते हैं, लेकिन असल में इसका भुगतान डॉलर में होता है.
चिदंबरम ने सुझाव दिया था कि अगर कुछ समय के लिए सोने की खरीद कम हो जाए, तो चालू खाता घाटा (CAD) में सुधार हो सकता है. इसी दौरान सरकार ने सोने पर आयात शुल्क भी बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया था.
1962 के बाद आर्थिक संकट और गोल्ड कंट्रोल
भारत-चीन युद्ध 1962 के बाद देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर बड़ा दबाव पड़ा था. उस समय तत्कालीन सरकार ने सोने की खपत और भंडारण को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए.
1963 में गोल्ड कंट्रोल रूल्स लागू किए गए, जिनका उद्देश्य सोने की तस्करी रोकना और विदेशी मुद्रा बचाना था. इसके तहत 14 कैरेट से अधिक शुद्धता वाले आभूषण बनाने पर भी रोक लगाई गई. बाद में 1968 में इन नियमों को और सख्त किया गया, जिससे नागरिकों के लिए सोने के बार या सिक्के रखना भी प्रतिबंधित हो गया.
1965 युद्ध के दौरान सरकार की अपील
भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965 के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से आर्थिक सहयोग की अपील की थी. उन्होंने लोगों से आग्रह किया था कि वे अपना सोना राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सरकार को जमा करें.
इसके लिए ‘नेशनल डिफेंस गोल्ड बॉन्ड’ जैसी योजनाएं शुरू की गईं, जिनके माध्यम से नागरिकों को सोना सरकार को सौंपने के लिए प्रेरित किया गया. इसका उद्देश्य युद्धकालीन आर्थिक दबाव को कम करना और देश की वित्तीय स्थिति को मजबूत करना था.
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