Russia Ukraine War: यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है. मंगलवार, 14 अक्टूबर 2025 को रूस ने यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खार्किव पर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिनमें ग्लाइड बम और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. इन हमलों में विशेष रूप से हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, जिससे एक स्थानीय अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और कम से कम 7 लोग घायल हो गए.
यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, रूस द्वारा दागे गए बमों से अस्पताल को भारी क्षति पहुंची और वहां इलाज करा रहे करीब 50 मरीजों को तत्काल अन्य स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा.
क्या होता है ग्लाइड बम?
रूसी हमलों में प्रयुक्त ग्लाइड बम (Glide Bombs) युद्ध में तेजी से उभरते एक हथियार हैं. ये बम अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं, लेकिन 3,000 से 5,000 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम होते हैं. इन्हें लड़ाकू विमानों के साथ जोड़कर छोड़ा जा सकता है और एक बार लॉन्च होने पर ये करीब 70 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकते हैं.
ग्लाइड बमों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें लंबी दूरी से छोड़ा जा सकता है, जिससे लॉन्च करने वाले विमान को खतरे की सीमा में जाने की जरूरत नहीं होती. रूस ने इन बमों का उपयोग विशेष रूप से अस्पतालों और नागरिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने के लिए किया है, जिससे युद्ध की क्रूरता और अधिक स्पष्ट हो गई है.
ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचा मुख्य लक्ष्य
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हमले के बाद एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि रूस लगातार यूक्रेन की एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और नेचुरल गैस फैसिलिटीज को निशाना बना रहा है.
उन्होंने कहा, "हर दिन और हर रात रूस हमारे पावर ग्रिड, हीटिंग सिस्टम और गैस नेटवर्क पर हमले कर रहा है. वे जानते हैं कि सर्दी आने वाली है और आम लोगों को बिजली, गर्मी और पीने का पानी चाहिए, इसलिए वे इन संसाधनों को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं."
रूस ने अतीत में भी यूक्रेन की ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करने के लिए सर्दियों में बिजली संयंत्रों पर लंबी दूरी की मिसाइलों से हमले किए थे, जिससे लाखों लोग गर्मी और साफ पानी जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित हो गए थे.
अमेरिकी राजनीति और टॉमहॉक मिसाइलों की चर्चा
इस हमले का समय भी बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की 17 अक्टूबर 2025 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं. उम्मीद की जा रही है कि वे ट्रंप से टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइलों की मांग करेंगे, जिनकी रेंज 2,500 किलोमीटर तक होती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूक्रेन को ये मिसाइलें मिलती हैं, तो वह रूस के गहरे क्षेत्रों तक, यहां तक कि मॉस्को तक जवाबी हमला करने की क्षमता हासिल कर सकता है. डोनाल्ड ट्रंप पहले भी संकेत दे चुके हैं कि वह यूक्रेन को टॉमहॉक मिसाइलों की आपूर्ति पर विचार कर रहे हैं, हालांकि इस पर अंतिम फैसला अमेरिकी कांग्रेस और रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही संभव है.
अंतरराष्ट्रीय मदद में गिरावट, जेलेंस्की की अपील
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक बार फिर अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, G7 देशों और अन्य सहयोगी देशों से मदद की अपील की है. उन्होंने कहा कि अगर यूक्रेन को अधिक एयर डिफेंस सिस्टम और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार नहीं मिले, तो वह नागरिकों की रक्षा करने में विफल हो सकता है.
हालांकि, हाल के महीनों में यूक्रेन को मिलने वाली विदेशी सैन्य मदद में स्पष्ट गिरावट देखी गई है. जर्मनी के कील इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई और अगस्त 2025 के दौरान यूक्रेन को प्राप्त सैन्य सहायता पहली छमाही की तुलना में 43% कम हो गई है. इसकी एक बड़ी वजह है NATO और अमेरिका द्वारा मिलकर बनाए गए PURL (Prioritised Ukraine Requirements List) फंडिंग मॉडल, जिसके तहत हथियारों की प्राथमिकता बदली गई है और संसाधनों की दिशा अधिक नियंत्रित रूप से तय की जा रही है.
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