World Naval Forces Ranking: किसी भी देश की सैन्य ताकत में उसकी नौसेना की अहम भूमिका होती है. मजबूत नौसेना वाले देश समुद्र में अपनी सुरक्षा के साथ-साथ दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं. ग्लोबल फायरपावर और नेवल डेटा की 2026 की रैंकिंग में दुनिया की बड़ी नौसेनाओं को लेकर दिलचस्प तस्वीर सामने आई है.
इस रैंकिंग में जहाजों और पनडुब्बियों की कुल संख्या के आधार पर चीन सबसे आगे है. रूस दूसरे और अमेरिका तीसरे नंबर पर है. वहीं भारतीय नौसेना 343 जहाजों के साथ चौथे स्थान पर है. इस रैंकिंग की खास बात यह है कि कई ऐसे देश भी ऊपर हैं, जिन्हें आमतौर पर दुनिया की बड़ी नौसैनिक ताकतों में नहीं गिना जाता.
अफ्रीका के मिस्र और नाइजीरिया ने भी टॉप-25 में जगह बनाई है. ऐसे में सवाल उठता है कि भारत किस स्थान पर है और जहाजों की संख्या के मामले में अमेरिका चीन और रूस से पीछे क्यों है.
चीन और रूस सबसे आगे
ग्लोबल फायरपावर की 2026 की रैंकिंग के मुताबिक, चीन के पास कुल 841 नौसैनिक जहाज हैं. इसी के साथ चीन दुनिया का सबसे बड़ा नौसैनिक बेड़ा रखने वाला देश है.
रूस 747 जहाजों के साथ दूसरे नंबर पर है. वहीं अमेरिका के पास 465 जहाज हैं और वह तीसरे स्थान पर है. यानी जहाजों की संख्या के मामले में रूस के पास अमेरिका से 282 ज्यादा जहाज हैं.
हालांकि, अमेरिका की नौसेना को दुनिया की सबसे आधुनिक और ताकतवर नौसेनाओं में गिना जाता है. इसलिए सिर्फ जहाजों की संख्या के आधार पर उसकी पूरी सैन्य क्षमता का अंदाजा लगाना सही नहीं होगा.
अमेरिकी नौसेना के बाद भारत
भारत इस सूची में 343 जहाजों के साथ चौथे नंबर पर है. भारत के ठीक पीछे इंडोनेशिया है, जिसके पास 338 जहाज हैं.
उत्तर कोरिया 332 जहाजों के साथ छठे स्थान पर है. इसके बाद थाईलैंड 304, इटली 285, स्वीडन 279 और श्रीलंका 275 जहाजों के साथ टॉप-10 में शामिल हैं.
इस तरह जहाजों की कुल संख्या के आधार पर भारतीय नौसेना दुनिया की चौथी बड़ी नौसैनिक ताकत के तौर पर सामने आती है.
अफ्रीका के दो देशों ने टॉप-25 में बनाई जगह
2026 की सूची में अफ्रीका के दो देशों ने भी टॉप-25 में जगह बनाई है. नाइजीरिया 152 जहाजों के साथ 22वें नंबर पर है. उसके ठीक ऊपर जापान है, जिसके पास 158 जहाज हैं.
मिस्र 149 जहाजों के साथ 23वें स्थान पर है. यानी नाइजीरिया और मिस्र के बीच सिर्फ तीन जहाजों का अंतर है.
नाइजीरिया के लिए उसकी नौसेना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्र से जुड़ा है. यहां तेल और गैस से जुड़ा बड़ा ढांचा समुद्र में मौजूद है. इसके अलावा देश गल्फ ऑफ गिनी के पास है, जहां समुद्री सुरक्षा लंबे समय से एक बड़ी चिंता रही है.
मिस्र के लिए भी उसकी समुद्री ताकत काफी अहम है. इसकी सबसे बड़ी वजह स्वेज नहर है. यह नहर भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ती है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है.
जहाजों की संख्या के हिसाब से कौन कहां?
1- चीन के पास 841 नौसैनिक जहाज
2- रूस के पास 747 नौसैनिक जहाज
3- अमेरिका के पास 465 नौसैनिक जहाज
4- भारत के पास 343 नौसैनिक जहाज
5- इंडोनेशिया के पास 338 नौसैनिक जहाज
6- उत्तर कोरिया के पास 332 नौसैनिक जहाज
7- थाईलैंड के पास 304 नौसैनिक जहाज
8- इटली के पास 285 नौसैनिक जहाज
9- स्वीडन के पास 279 नौसैनिक जहाज
10- श्रीलंका के पास 275 नौसैनिक जहाज
11- म्यांमार के पास 239 नौसैनिक जहाज
12- दक्षिण कोरिया के पास 215 नौसैनिक जहाज
13- कोलंबिया के पास 213 नौसैनिक जहाज
14- तुर्की के पास 192 नौसैनिक जहाज
15- ग्रीस के पास 186 नौसैनिक जहाज
16- स्पेन के पास 175 नौसैनिक जहाज
17- यूक्रेन के पास 169 नौसैनिक जहाज
18- फ्रांस के पास 166 नौसैनिक जहाज
19- फिनलैंड के पास 165 नौसैनिक जहाज
20- मैक्सिको के पास 164 नौसैनिक जहाज
21- जापान के पास 158 नौसैनिक जहाज
22- नाइजीरिया के पास 152 नौसैनिक जहाज
23- मिस्र के पास 149 नौसैनिक जहाज
24- नीदरलैंड के पास 140 नौसैनिक जहाज
25- चिली के पास 130 नौसैनिक जहाज
अमेरिका चीन और रूस से क्यों पीछे?
जहाजों की कुल संख्या देखें तो अमेरिका इस रैंकिंग में चीन और रूस दोनों से पीछे है. 465 जहाजों के साथ अमेरिका तीसरे स्थान पर है. चीन के पास अमेरिका से 376 और रूस के पास 282 ज्यादा जहाज हैं.
लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि किसी देश की नौसेना की ताकत केवल जहाजों की संख्या से तय नहीं होती. युद्धपोत किस तरह के हैं, पनडुब्बियों की क्षमता क्या है, विमानवाहक पोत कितने हैं और उनके पास किस तरह की आधुनिक तकनीक है, यह भी बहुत मायने रखता है.
अमेरिकी नौसेना संख्या में चीन और रूस से पीछे हो सकती है, लेकिन उसके पास बेहद आधुनिक युद्धपोत, पनडुब्बियां और दूसरे अत्याधुनिक सैन्य सिस्टम हैं. अमेरिका की नौसेना दुनिया के अलग-अलग समुद्री इलाकों में लगातार तैनात रहती है. इसलिए केवल जहाजों की गिनती के आधार पर अमेरिका को चीन या रूस से कमजोर मानना सही नहीं होगा.
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