Bangladesh General Election: बांग्लादेश में पिछले वर्ष हुए नाटकीय राजनीतिक बदलावों के बाद आखिरकार देश को नई सरकार चुनने की दिशा मिल गई है. एक ओर जहां तख्तापलट के बाद अस्थायी सरकार के भविष्य को लेकर अटकलें चल रही थीं, वहीं दूसरी ओर आम चुनाव की तारीख तय होने का इंतज़ार भी बढ़ता जा रहा था. अब यह साफ हो गया है कि बांग्लादेश फरवरी 2025 में अपनी नई संसद के लिए मतदान करेगा.
गुरुवार, 11 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त ए.एम.एम. नासिर उद्दीन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि 13वीं नेशनल असेंबली के चुनाव 12 फरवरी 2025 को आयोजित किए जाएंगे. यह वही चुनाव है जिस पर बीते कई महीनों से पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें लगी हुई थीं.
इस घोषणा के साथ ही उन सभी अटकलों का अंत हो गया कि मौजूदा अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं, का कार्यकाल आगे बढ़ाया जा सकता है.
तख्तापलट के बाद पहला आम चुनाव
अगस्त 2024 में देशभर के छात्रों के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे, जिनमें प्रशासनिक ढांचे से लेकर सरकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई गई. ये विरोध इतना शक्तिशाली साबित हुआ कि प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी.
उनके इस्तीफे के बाद सेना और नागरिक प्रशासन के समर्थन से अंतरिम सरकार का गठन हुआ था. अब लगभग डेढ़ साल बाद देश एक बार फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लौटने जा रहा है.
शेख हसीना की अवामी लीग चुनाव से बाहर
इस चुनाव की सबसे बड़ी बात यह है कि शेख हसीना की पार्टी ‘अवामी लीग’ को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं होगी. तख्तापलट के बाद बनी व्यवस्था में अवामी लीग को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया गया था.
इस फैसले ने राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला दिया है, क्योंकि अवामी लीग दशकों से बांग्लादेश की सबसे प्रभावशाली पार्टियों में रही है. इस प्रतिबंध के चलते चुनावी मुकाबला पूरी तरह नए स्वरूप में बदल गया है.
बीएनपी और जमात-ए-बांग्लादेश के बीच टक्कर संभव
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अब मुख्य मुकाबला दो महत्वपूर्ण राजनीतिक समूहों के बीच होने की संभावना है:
1. बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी)
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी, जिसे लंबे समय से अवामी लीग का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जाता रहा है.
2. जमात-ए-बांग्लादेश
यह एक कट्टरपंथी इस्लामी संगठन है, जिसका दक्षिण एशियाई राजनीति में खासा प्रभाव रहा है. पिछले कुछ वर्षों में उस पर कई विवाद रहे, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति ने उसे फिर से मजबूत चुनावी मैदान दे दिया है. इन दोनों के बीच मुकाबला देश की राजनीति के भविष्य को गहरे तौर पर प्रभावित करेगा.
मतदान की तैयारी लगभग पूरी, सिर्फ तारीख का इंतज़ार था
चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, मतदाता सूचियों का अपडेट, मतदान केंद्रों की सूची और सुरक्षा व्यवस्था की रूपरेखा लगभग पूरी हो चुकी थी. देशव्यापी तैनाती, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम और प्रशिक्षण संबंधी प्रक्रियाओं को अंतिम चरण में रखा गया है. चुनाव आयोग का कहना है कि अब सिर्फ चुनावी कार्यक्रम के अंतिम चरणों पर काम होना बाकी है, जिसे तय तारीख से पहले पूरा कर लिया जाएगा.
बांग्लादेश के लिए अहम मोड़
फरवरी 2025 का चुनाव बांग्लादेश के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
इन सभी परिस्थितियों के बीच यह चुनाव न केवल एक राजनीतिक फैसला होगा बल्कि बांग्लादेश के लोकतांत्रिक भविष्य की दिशा भी तय करेगा.
यह भी पढ़ें- IND vs SA: भारत या साउथ अफ्रीका... दूसरे टी20 मुकाबले में कौन मारेगा बाजी? जानें आंकड़ों में कौन आगे