Iran Warns America: ईरान इन दिनों इतिहास के सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है. सड़कों पर उठती आज़ादी और बदलाव की आवाज़ को दबाने के लिए सत्ता प्रतिष्ठान ने अभूतपूर्व सख्ती शुरू कर दी है. इंटरनेट बंद है, मोबाइल नेटवर्क ठप हैं और अब सरकार ने लोगों की छतों तक पहुंच बनानी शुरू कर दी है.
ईरानी पुलिस घर-घर जाकर सैटेलाइट डिश जब्त कर रही है, ताकि देश के भीतर और बाहर तक पहुंचने वाली सूचनाओं की हर राह बंद की जा सके. इसके साथ ही, प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए निजी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है.
सूचना पर शिकंजा, अंधेरे में धकेला जा रहा देश
ईरान इंटरनेशनल समेत कई स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8 जनवरी से देशभर में इंटरनेट पूरी तरह बंद है और फोन नेटवर्क में भारी रुकावट है. ऐसे में सैटेलाइट चैनल ही लोगों के लिए खबरों का लगभग एकमात्र जरिया बचे थे, लेकिन अब सत्ता उन्हें भी निशाना बना रही है. तेहरान समेत कई इलाकों में सुरक्षा बल कथित तौर पर पानी और बिजली विभाग के अधिकारी बनकर घरों में दाखिल हो रहे हैं और सैटेलाइट डिश हटवा रहे हैं. नतीजा यह है कि आम लोग एक तरह के “इन्फॉर्मेशन ब्लैकआउट” में जीने को मजबूर हैं.
दिसंबर से जनवरी तक, आंदोलन ने बदला रूप
दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए देशव्यापी प्रदर्शन जनवरी 2026 में आते-आते उग्र विद्रोह का रूप ले चुके हैं. शुरुआत आर्थिक बदहाली, रियाल की गिरती कीमत, महंगाई और पेट्रोल-खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों से हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन सीधे इस्लामिक गणराज्य और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ खुली चुनौती बन चुका है. प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरकर “तानाशाह मुर्दाबाद”, “खामेनेई हटाओ” जैसे नारे लगा रहे हैं और निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी की वापसी की मांग कर रहे हैं. यह आंदोलन अब 186 से अधिक शहरों और देश के सभी 31 प्रांतों में फैल चुका है.
दमन की कीमत, सैकड़ों मौतें और हजारों गिरफ्तारियां
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सरकारी दमन में अब तक 500 से 640 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 10 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद होने के कारण न तो लोगों को यह पता चल पा रहा है कि कहां कार्रवाई हो रही है और न ही यह कि किसे हिरासत में लिया गया है. देश के भीतर और बाहर बसे परिवार एक-दूसरे से कट गए हैं, जिससे डर और अनिश्चितता का माहौल और गहराता जा रहा है.
CCTV कैमरों पर भी जनता का जवाब
सत्ता की निगरानी से बचने के लिए अब प्रदर्शनकारी भी नए तरीके अपना रहे हैं. जो सीमित वीडियो फुटेज बाहर की दुनिया तक पहुंच पा रहे हैं, उनमें कई शहरों में लोग सीसीटीवी कैमरे बंद करते नजर आ रहे हैं. करज, अल्बोर्ज़ प्रांत, महल्लात, मरकज़ी प्रांत और तेहरान प्रांत के पाकदाश्त से आए वीडियो में प्रदर्शनकारी सर्विलांस कैमरे निष्क्रिय करते दिखते हैं. फ़ार्स प्रांत के मर्वदश्त में मारे गए प्रदर्शनकारी खोदादाद शिरवानी के अंतिम संस्कार के दौरान भी ऐसा ही दृश्य सामने आया, जब शोकसभा के बीच एक व्यक्ति कैमरा बंद करता नजर आया.
सरकार समर्थक रैलियां और शक्ति प्रदर्शन
जहां एक ओर देशभर में विरोध की आग फैली हुई है, वहीं दूसरी ओर सरकार भी शक्ति प्रदर्शन से पीछे नहीं है. राजधानी तेहरान में बड़ी संख्या में लोग सरकार के समर्थन में सड़कों पर उतरे और विशाल रैली का आयोजन किया गया. यह रैली सत्ता की ओर से यह संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है कि सरकार के पास अभी भी समर्थन मौजूद है.
अमेरिका को खुली चेतावनी, जंग के लिए तैयार ईरान
घरेलू संकट के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्ते भी चरम तनाव पर पहुंच गए हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में अमेरिका को खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि तेहरान अमेरिका के किसी भी कदम के लिए तैयार है, चाहे वह सैन्य कार्रवाई ही क्यों न हो. अराघची के मुताबिक, “अगर वे फिर से मिलिट्री ऑप्शन आजमाना चाहते हैं, जिसे वे पहले भी आजमा चुके हैं, तो हम पूरी तरह तैयार हैं.” उन्होंने दावा किया कि पिछले साल जून में हुई 12 दिन की जंग के बाद ईरान ने अपनी सैन्य तैयारी को मात्रा और गुणवत्ता दोनों में और मजबूत किया है.
ईरान एक चौराहे पर
ईरान आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां एक तरफ जनता का बढ़ता विद्रोह है और दूसरी तरफ सत्ता की कठोर पकड़. इंटरनेट ब्लैकआउट, सैटेलाइट जब्ती और निगरानी तंत्र से विरोध की आवाज दबाने की कोशिश जारी है, लेकिन सड़कों से उठता गुस्सा यह संकेत दे रहा है कि संकट केवल आंतरिक नहीं रहा. अमेरिका को दी गई जंग की चेतावनी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी और विस्फोटक बना दिया है. अब दुनिया यह देख रही है कि ईरान इस उथल-पुथल से किस दिशा में आगे बढ़ता है.
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