वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई से दो खेमे में बंट गई दुनिया, जानें भारत-रूस समेत कौन देगा किसका साथ?

वेनेजुएला में शनिवार को हुई तेज सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक राजनीति में उथल-पुथल मच गई है.

World divided into two camps due to American action in Venezuela
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वेनेजुएला में शनिवार को हुई तेज सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक राजनीति में उथल-पुथल मच गई है. अमेरिका द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने के बाद यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर छा गया है. जिस तरह से अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ कदम उठाया, उसने दुनिया को साफ तौर पर दो धड़ों में बांट दिया है.

एक ओर कई देश इस कार्रवाई को संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ राष्ट्र ऐसे भी हैं जो अमेरिका के फैसले को सही ठहराते हुए उसके समर्थन में सामने आए हैं. इस बीच भारत ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर अपना रुख बेहद संतुलित और संयमित रखा है.

अमेरिकी कार्रवाई के खिलाफ खड़ा हुआ बड़ा वैश्विक खेमा

अमेरिका की कार्रवाई की सबसे तीखी आलोचना रूस, चीन और ईरान जैसे देशों की ओर से देखने को मिली है. इन देशों का कहना है कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र में बाहरी सैन्य हस्तक्षेप अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है और इससे वैश्विक अस्थिरता बढ़ती है.

अमेरिका के खिलाफ बोलने वाले देशों की सूची काफी लंबी है. इसमें रूस, चीन, ईरान, क्यूबा, ब्राजील, मेक्सिको, कोलंबिया, चिली, बेलारूस, उरुग्वे, स्लोवाकिया, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, श्रीलंका, उत्तर कोरिया, घाना और सिंगापुर जैसे देश शामिल हैं.

इन देशों ने अमेरिका के कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है और कहा है कि इस तरह की कार्रवाई से दुनिया में तनाव और बढ़ सकता है. खास बात यह है कि अमेरिका के भीतर भी ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को लेकर विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं.

अमेरिका को किन देशों का मिला खुला समर्थन?

दूसरी तरफ कुछ देश ऐसे भी हैं, जिन्होंने वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया है. इन देशों का मानना है कि वेनेजुएला में लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, दमन और लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन हो रहा था.

अमेरिका के समर्थन में सामने आने वाले देशों में अर्जेंटीना, इजरायल, पेरू, अल साल्वाडोर, इक्वाडोर, अल्बानिया, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं. इन देशों का कहना है कि वेनेजुएला में हालात को सामान्य करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव जरूरी था.

भारत किस टीम में? जानिए नई दिल्ली का रुख

भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर किसी भी खेमे में सीधे खड़े होने से बचते हुए संतुलित रुख अपनाया है. भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने बयान जारी कर कहा कि वेनेजुएला में हालिया घटनाएं गहरी चिंता का विषय हैं और भारत पूरे हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है.

MEA ने कहा कि भारत वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और भलाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. भारत ने सभी संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे बातचीत और कूटनीति के जरिए इस संकट का शांतिपूर्ण समाधान निकालें, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे.

इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि काराकास स्थित भारतीय दूतावास वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी का मिला-जुला संदेश

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने वेनेजुएला में हो रहे घटनाक्रम पर अपनी सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इटली शुरू से ही वहां के राजनीतिक विकास पर नजर बनाए हुए है.

उन्होंने कहा कि इटली ने अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर निकोलस मादुरो द्वारा खुद घोषित की गई चुनावी जीत को कभी मान्यता नहीं दी और सरकार की दमनकारी नीतियों की आलोचना की है. इटली ने हमेशा वेनेजुएला के लोगों की लोकतांत्रिक बदलाव की उम्मीदों का समर्थन किया है.

हालांकि, मेलोनी ने यह भी कहा कि उनकी सरकार तानाशाही शासन को हटाने के लिए बाहरी सैन्य हस्तक्षेप को सही रास्ता नहीं मानती. लेकिन अगर किसी देश की सुरक्षा को हाइब्रिड हमलों या ड्रग तस्करी जैसी गतिविधियों से खतरा हो, तो आत्मरक्षा के तौर पर दखल को जायज माना जा सकता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि वेनेजुएला में रह रहे इटालियन नागरिकों की सुरक्षा उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

ऑस्ट्रेलिया ने तनाव कम करने की अपील की

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए संयम बरतने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार वेनेजुएला में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रही है.

अल्बनीज ने दोनों पक्षों से अपील की कि वे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए बातचीत और कूटनीति का सहारा लें. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से वेनेजुएला में लोकतांत्रिक मूल्यों, मानवाधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रताओं को लेकर चिंतित रहा है.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय कानून और वेनेजुएला में शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक बदलाव का समर्थन करता रहेगा, जो वहां की जनता की इच्छा को दर्शाता हो. साथ ही, उन्होंने वेनेजुएला में मौजूद ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के लिए 24/7 आपातकालीन कांसुलर सहायता के संपर्क नंबर भी साझा किए.

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