न्यूयॉर्क: वैश्विक मंच पर एक बार फिर यूक्रेन संकट को लेकर रूस और पश्चिमी देशों के बीच तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली है. संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि रूस की ओर से नाटो (NATO) या यूरोपीय संघ (EU) के खिलाफ हमला करने की कोई मंशा नहीं है.
रूस पर पश्चिमी देशों द्वारा बार-बार लगाए जा रहे आरोपों का जवाब देते हुए लावरोव ने कहा, "हम किसी पर हमला नहीं करना चाहते, लेकिन अगर हमारे खिलाफ कोई आक्रामकता होती है, तो रूस चुप नहीं बैठेगा. जवाब ज़रूर दिया जाएगा, और वह भी निर्णायक."
यह बयान ऐसे समय आया है जब कई यूरोपीय नेता और खासकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि रूस की विस्तारवादी नीति केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगी. ज़ेलेंस्की और अन्य पश्चिमी नेता दावा कर रहे हैं कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नजरें अब यूरोपीय संघ और नाटो देशों पर भी हैं.
'पश्चिम की धमकियों की आदत हो गई है'
लावरोव ने अपने भाषण में पश्चिमी देशों की रणनीतियों पर तीखा हमला किया और कहा कि अब रूस के खिलाफ बल प्रयोग की धमकियां आम होती जा रही हैं. उन्होंने कहा, "हम देख रहे हैं कि पश्चिमी देशों की ओर से रूस को धमकाना अब एक आदत बन चुकी है. इसे वैश्विक राजनीति में 'नॉर्मल' बना दिया गया है, जो खतरनाक है."
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिमी देश रूस को उकसाकर एक व्यापक संघर्ष की ओर ले जाना चाहते हैं, जो न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया के लिए अस्थिरता पैदा कर सकता है.
इज़राइल-हमास युद्ध पर रूस का रुख
रूसी विदेश मंत्री ने अपने भाषण में मध्य पूर्व की स्थिति पर भी विस्तार से बात की और इज़राइल-हमास संघर्ष को लेकर रूस की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि रूस ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इज़राइल पर किए गए हमले की निंदा की थी. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने इज़राइली कार्रवाई को भी एकतरफा और असंगत बताया.
लावरोव ने कहा, "हम गाजा में निर्दोष लोगों की हत्या को जायज नहीं ठहरा सकते. फिलिस्तीनी नागरिकों का जिस तरह से नरसंहार हो रहा है, वह मानवता के खिलाफ अपराध है."
लावरोव के मुताबिक, गाजा में इज़राइली हमलों के चलते अब तक 65,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. उन्होंने इज़राइल पर पश्चिमी तट पर ज़मीन कब्ज़ाने और अन्य मध्य पूर्वी देशों के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाने का भी आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि इज़राइल की यह आक्रामकता पूरे क्षेत्र को विस्फोटक संकट की ओर धकेल रही है, और वैश्विक संस्थाओं को इसे रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने चाहिए.
'रूस को उकसाना चाहते हैं पश्चिमी देश'
लावरोव के भाषण में कई बार यह बात दोहराई गई कि रूस पर हमले की योजना का आरोप लगाकर पश्चिमी देश एक मनोवैज्ञानिक युद्ध चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि पश्चिम की यह कोशिश है कि दुनिया में रूस की छवि एक आक्रामक राष्ट्र के रूप में बनाई जाए ताकि उसके खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाया जा सके.
उन्होंने कहा, "हमारे राष्ट्रपति पुतिन ने कई बार स्पष्ट किया है कि हम टकराव नहीं, सहयोग चाहते हैं. लेकिन पश्चिम बार-बार हमारे खिलाफ माहौल बनाकर तनाव को बढ़ावा दे रहा है."
क्या नाटो वाकई खतरे में है?
नाटो देशों के कुछ सैन्य विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों ने आशंका जताई थी कि अगर रूस यूक्रेन में सफल होता है, तो उसका अगला लक्ष्य बाल्टिक देश, पोलैंड, या अन्य पूर्वी यूरोपीय राष्ट्र हो सकते हैं जो नाटो के सदस्य हैं.
लेकिन लावरोव ने इस तरह की अटकलों को पूरी तरह निराधार बताया और जोर देकर कहा, "हम नाटो पर हमला नहीं करेंगे. यह न तो हमारे सैन्य एजेंडे में है और न ही हमारी विदेश नीति का हिस्सा है."
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