Afghanistan Taliban: अफगानिस्तान में सत्ता बदली है, लेकिन उसका असर अब सिर्फ सरकारी भवनों या प्रशासनिक पदों तक सीमित नहीं रहा. यह बदलाव अब अफगान सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों में भी दिखाई देने लगा है. इतिहास गवाह है कि देश में जब भी शासन बदला, सेना और सुरक्षा बलों के वाहन भी बदलते गए, सोवियत यूनियन के दौर की मशीनें, अमेरिकी सहयोग के समय की गाड़ियां और अब तालिबान की पसंद. इस बार भी सत्ता के साथ सड़कों की तस्वीर बदल रही है.
तालिबान की अंतरिम सरकार अब अमेरिकी कंपनी फोर्ड के रेंजर वाहनों को हटाकर नए मॉडल लाने की कोशिश में है. इसके लिए उन्होंने जापानी कंपनी टोयोटा से संपर्क किया था, अफगानिस्तान में जिसकी आधिकारिक डीलरशिप हबीब गुलजार मोटर्स के पास है.
गुलजार मोटर्स ने बताया कि सितंबर 2025 में तालिबान ने उनसे गाड़ियां खरीदने का अनुरोध किया था, लेकिन कंपनी ने इसे साफ तौर पर ठुकरा दिया. वजह भी स्पष्ट थी, टोयोटा केवल अंतरराष्ट्रीय संगठनों, कुछ NGO और दूतावासों को ही वाहन बेचने की अनुमति रखती है.
क्यों बदलना चाहता है तालिबान अपना वाहन बेड़ा?
तालिबान फोर्ड रेंजर को हटाने की मुख्य वजह इनके महंगे पुर्जे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण होने वाली सप्लाई दिक्कतें हैं. न तो वे अमेरिकी कंपनी फोर्ड के साथ कोई नया समझौता कर सकते हैं, न ही आसानी से रेंजर के स्पेयर पार्ट्स मंगा सकते हैं.
हालांकि तालिबान ने यह तय नहीं किया कि वे कौन सा नया मॉडल खरीदेंगे, लेकिन इतना तय है कि गृह मंत्रालय ने पुलिस की नई वर्दी भी टोयोटा हिलक्स को ध्यान में रखकर डिजाइन की है, जो संकेत देता है कि टोयोटा उनकी पहली पसंद थी.
अफगानिस्तान में फोर्ड रेंजर का लंबा इतिहास
पिछले 20 वर्षों में अमेरिकी और पश्चिमी सेनाओं ने अफगान सरकार को बड़े पैमाने पर फोर्ड रेंजर वाहन उपलब्ध कराए थे. इनकी मरम्मत और रखरखाव का जिम्मा अमेरिकी कंपनी AMS के हाथ में था.
जानकारी के अनुसार, ये वाहन विशेष रूप से अफगानिस्तान के कठिन भौगोलिक हालात को ध्यान में रखकर तैयार किए गए थे. 2017 से 2021 के बीच AMS ने 1,30,000 से ज्यादा सैन्य और पुलिस वाहनों की मरम्मत की थी और इसका अमेरिकी सरकार के साथ 1.2 बिलियन डॉलर का बड़ा अनुबंध था. लेकिन अब परिदृश्य बदल गया है, मरम्मत करने वाले स्थानीय तकनीशियनों का एक बड़ा हिस्सा देश छोड़ चुका है, जिससे इन वाहनों को ठीक कराना और भी मुश्किल हो गया है.
टोयोटा का इंकार और इसकी असली वजह
टोयोटा ने तालिबान को गाड़ियां बेचने से सिर्फ नीति के आधार पर नहीं, बल्कि सुरक्षा कारणों से भी मना किया. कंपनी के कई मॉडल, विशेषकर टोयोटा हिलक्स और लैंड क्रूजर, पहले भी तालिबान और अन्य हथियारबंद समूहों के हाथों में दिखाई दिए हैं. टोयोटा का कहना है कि ये गाड़ियां उन्हें सेकेंड-हैंड बाज़ारों के जरिए मिलती हैं, न कि कंपनी द्वारा सीधे बेची गई होती हैं.
इसी कारण टोयोटा ने कई सख्त नियम बनाए हैं, ताकि उनके वाहन संघर्ष वाले क्षेत्रों में गलत इस्तेमाल के लिए न जाएँ. यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कंपनी ने सीरिया जैसे देशों में भी आधिकारिक रूप से वाहन बेचना बंद कर दिया है.
क्यों लोकप्रिय हैं टोयोटा के वाहन?
टोयोटा हिलक्स और लैंड क्रूजर दुनिया भर में मजबूती के प्रतीक माने जाते हैं. उनके मजबूत इंजन, कम ईंधन खपत, सरल मरम्मत व्यवस्था और कठिन रास्तों पर शानदार प्रदर्शन की क्षमता ने उन्हें विश्वभर में लोकप्रिय बनाया है.
उनका इस्तेमाल इतना व्यापक रहा है कि 1977 के चाड-लीबिया युद्ध के दौरान इन गाड़ियों की भारी मौजूदगी के कारण उस संघर्ष को ही “टोयोटा वॉर” कहा गया. यही कारण है कि तालिबान भी इन्हें प्राथमिकता देता है, लेकिन इस बार टोयोटा ने स्पष्ट रूप से उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया.
अफगानिस्तान की सड़कों पर जारी बदलाव
अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन हमेशा सिर्फ राजनीतिक नहीं होता; वह जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है. अब जब तालिबान पुरानी अमेरिकी गाड़ियों को हटाकर नए विकल्पों की तलाश में है, यह बदलाव भी सत्ता की उसी सतत प्रक्रिया का हिस्सा है.
किस ब्रांड या मॉडल से उनकी सड़कों की तस्वीर बदलेगी, यह समय ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि अफगानिस्तान की गाड़ियों में आने वाला नया अध्याय देश के बदलते राजनीतिक परिदृश्य का ताज़ा प्रतीक होगा.
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