क्या ब्रिटेन में भी भड़कने वाली है Gen-Z आंदोलन की आग? यहां के युवा किस बात को लेकर हैं निराश

नेपाल में सोशल मीडिया पर पाबंदी के खिलाफ जबरदस्त हिंसा हुई, युवाओं ने संसद और प्रधानमंत्री के घर तक को आग के हवाले कर दिया. भ्रष्टाचार और असमानता के खिलाफ यह गुस्सा इतना तीव्र था कि प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफा देना पड़ा.

Why is Gen-Z causing concern in Britain and what s fueling youth dissatisfaction
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लंदन: आज का युवा सिर्फ किताबों या करियर तक सीमित नहीं है. Gen-Z यानी वो पीढ़ी जो इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़ी हुई है, अब दुनिया भर में अपनी बातों को खुलकर रख रही है और जब उन्हें अनदेखा किया जाता है, तो वो सड़कों पर उतरने से भी पीछे नहीं हटते. चाहे नेपाल हो या मोरक्को, पेरू हो या मेडागास्कर युवाओं की आवाज़ अब एक आंदोलन बन चुकी है.

नेपाल से पेरू तक गूंजा युवाओं का गुस्सा

नेपाल में सोशल मीडिया पर पाबंदी के खिलाफ जबरदस्त हिंसा हुई, युवाओं ने संसद और प्रधानमंत्री के घर तक को आग के हवाले कर दिया. भ्रष्टाचार और असमानता के खिलाफ यह गुस्सा इतना तीव्र था कि प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफा देना पड़ा.

मोरक्को में अस्पताल में महिलाओं की मौत के बाद प्रदर्शन हुए. मेडागास्कर में बिजली-पानी की किल्लत से तंग आ चुके युवाओं ने विरोध किया. पेरू में पेंशन कानून के विरोध ने हिंसक रूप तब लिया जब पुलिस की बर्बरता सामने आई. इन सभी घटनाओं का साझा सूत्र था युवाओं की आवाज़ और व्यवस्था के प्रति उनका असंतोष.

क्या अब बारी ब्रिटेन की है?

हालांकि ब्रिटेन की सामाजिक स्थिति इन देशों से अलग है, लेकिन असंतोष वहां भी पनप रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन के युवा अपनी जीवनशैली, अवसरों और भविष्य को लेकर निराश हैं. उन्हें लगता है कि उनके पास वो सुविधाएं नहीं हैं जो पहले की पीढ़ियों को मिलीं. प्रोफेसर फ्रेजर सुगडेन और काउंसलर सर्जियो टॉरेस का मानना है कि ये युवा सोचते हैं कि सरकार का पैसा जनता का है और जब उसका दुरुपयोग होता है, तो वे चुप नहीं बैठते.

वोटिंग से लेकर विरोध तक, Gen-Z की बढ़ती ताकत

ब्रिटेन में अब तक युवा वोटिंग और शांतिपूर्ण प्रदर्शन से अपनी नाराज़गी जताते आए हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया गया, तो यही ऊर्जा कट्टर संगठनों या गलत विचारधाराओं की ओर मुड़ सकती है. डॉ. सुगडेन के मुताबिक, Gen-Z ज्यादा शिक्षित, ज्यादा तकनीकी रूप से जुड़ी हुई और ज्यादा जागरूक है. उनके पास सोशल मीडिया जैसी ताकत है जो एक पल में विरोध को आंदोलन में बदल सकती है.

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