तेहरान: मध्य पूर्व में ईरान एक ऐसा देश रहा है जिसने कभी अपने मजबूत प्रॉक्सी नेटवर्क के जरिए पूरे क्षेत्र में दबदबा बनाया था. लेबनान का हिज़्बुल्लाह हो, यमन के हूथी विद्रोही हों या फिलिस्तीन का हमास ये सभी ईरान की रणनीति के प्रमुख मोहरे थे. लेकिन समय बदल चुका है. अब वही नेटवर्क कमजोर पड़ रहा है, और ईरान की ताकत पर सवाल उठ रहे हैं.
कमजोर होता ईरानी प्रॉक्सी मॉडल
2024 तक ईरान के पास कम से कम पांच अहम प्रॉक्सी संगठन थे हमास, हिज़्बुल्लाह, हूथी, कुर्द लड़ाके और इराकी मिलिशिया. लेकिन अब हालात यह हैं कि इनमें से कोई भी संगठन पहले जैसी स्थिति में नहीं है. इजराइल ने हमास और हिज़्बुल्लाह को भारी नुकसान पहुंचाया है, उनके कई शीर्ष कमांडरों को मार गिराया गया है. सीरिया में बशर अल-असद की सरकार अस्थिर हो गई है, जिससे ईरान ने वहां अपने रणनीतिक सहयोगी और हथियार आपूर्ति का बड़ा रास्ता गंवा दिया है. यमन में हूथी अब भी संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन इजराइल के सीधे हमलों ने उन्हें भी कमजोर कर दिया है. इससे ईरान का 'Axis of Resistance' अब 'Axis of the Weak' में तब्दील हो गया है.
अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता
ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण जूझ रही थी, लेकिन हालिया घटनाओं ने स्थिति और बिगाड़ दी है. यूनाइटेड नेशंस द्वारा फिर से लगाए गए प्रतिबंधों के चलते ईरान के तेल निर्यात, बैंकिंग और हथियारों की खरीद पर रोक लग गई है. देश में महंगाई दर 30% तक पहुंच गई है, और ऊर्जा संकट इस हद तक है कि प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार के बावजूद ईरानी जनता को बिजली और गैस की किल्लत झेलनी पड़ रही है. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं ईरान की आर्थिक स्थिति को "अस्थिर और गिरती हुई" करार दे चुकी हैं.
रूस और चीन की चुप्पी
ईरान को हमेशा रूस और चीन जैसे देशों का रणनीतिक समर्थन रहा है, लेकिन जब ईरान और इजराइल के बीच टकराव बढ़ा, तब ये देश ईरान की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए.
रूस खुद यूक्रेन युद्ध में उलझा है और चीन ने केवल कूटनीतिक बयान देने तक खुद को सीमित रखा. न तो सैन्य मदद मिली, न ही आर्थिक समर्थन. इस चुप्पी ने ईरान की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को और कमजोर कर दिया.
मिसाइल ताकत भी पड़ी कमजोर
2025 की शुरुआत में जब इजराइल और ईरान के बीच सीधा टकराव हुआ, तो उम्मीद की जा रही थी कि ईरान अपनी मिसाइल क्षमता का पूरा इस्तेमाल करेगा. लेकिन हुआ इसके उलट.
ISW की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपनी योजना के मुकाबले काफी कम मिसाइलें दागीं. इसका कारण इजराइली हमलों में मिसाइल लॉन्चर और ठिकानों का नष्ट होना था. पहले जहां ईरान के पास 3,000 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें थीं, अब यह संख्या घटकर 1,500 के आसपास रह गई है.
खामेनेई का बयान
हालांकि, इन सबके बीच ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने इन संगठनों को ईरान के प्रॉक्सी कहे जाने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि ये संगठन "अपने विश्वास और आस्था" के कारण संघर्ष कर रहे हैं, न कि ईरान की ओर से निर्देशित होकर. खामेनेई ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो ईरान खुद अपनी ताकत से कार्रवाई करेगा, किसी प्रॉक्सी पर निर्भर नहीं रहेगा.
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