Sawan 2026: सावन में सुहागिन महिलाएं क्यों पहनती हैं हरी चूड़ियां? जानिए इसका धार्मिक महत्व और मान्यता

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस पूरे महीने भक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और भोलेनाथ की भक्ति में लीन रहते हैं.

Why do married women wear green bangles during Sawan Religious significance
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Sawan 2026: हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस पूरे महीने भक्त व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और भोलेनाथ की भक्ति में लीन रहते हैं. ऐसी मान्यता है कि सावन में सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

इसी महीने सुहागिन महिलाओं के हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा भी काफी खास मानी जाती है. इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ ज्योतिष का भी विशेष महत्व बताया गया है.

सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन में हरे रंग के कपड़े और हरी कांच की चूड़ियां पहनना शुभ माना जाता है. हरा रंग खुशहाली, नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसलिए इस महीने कई महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए हरी चूड़ियां धारण करती हैं.

ऐसा माना जाता है कि इससे वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में सकारात्मक माहौल रहता है.

कांच की चूड़ियों का क्या है महत्व?

मान्यता है कि कांच की चूड़ियों की मधुर आवाज घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. कई लोग मानते हैं कि इनकी ध्वनि नकारात्मकता को दूर करने में मदद करती है और घर में सुख-शांति का वातावरण बनाए रखती है. यही वजह है कि सावन के महीने में कांच की हरी चूड़ियों का विशेष महत्व माना जाता है.

हरे रंग का ज्योतिष से संबंध

ज्योतिष शास्त्र में हरे रंग को बुध ग्रह का रंग माना जाता है. बुध ग्रह बुद्धि, अच्छी वाणी और तरक्की का कारक माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि हरे रंग के वस्त्र पहनने से बुध ग्रह का शुभ प्रभाव मिलता है और व्यक्ति के स्वभाव में संतुलन और मधुरता आती है.

इसी कारण सावन में सुहागिन महिलाएं हरी साड़ी, हरी चूड़ियां और अन्य हरे रंग की चीजें पहनना शुभ मानती हैं.

भगवान शिव और प्रकृति का गहरा संबंध

भगवान शिव को प्रकृति से सबसे अधिक जुड़ा हुआ देवता माना जाता है. उनका निवास हिमालय में बताया गया है और उनकी पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग जैसी हरी चीजों का विशेष महत्व है.

सावन के महीने में चारों तरफ हरियाली छा जाती है, इसलिए हरा रंग इस मौसम का भी प्रतीक बन जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह रंग जीवन में सुख, समृद्धि, नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संदेश देता है.

सावन में क्यों बढ़ जाता है हरे रंग का महत्व?

सावन का महीना भक्ति, प्रकृति और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. इसी वजह से इस दौरान हरे रंग को विशेष शुभ माना जाता है. मान्यता है कि हरी चूड़ियां और हरे वस्त्र धारण करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही यह वैवाहिक सुख, परिवार की खुशहाली और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक माना जाता है.

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