ईरानी सुप्रीम लीडर ने नेतन्याहू को लेकर क्यों कसा तंज? कहा- "सबसे तिरस्कृत शासन है इजरायल"

Khamenei Remarks On Netanyahu: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला है. अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में उन्होंने इजरायल को “दुनिया का सबसे अधिक तिरस्कृत और अलग-थलग शासन” बताया.

Why did Iranian Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei take a dig at Netanyahu
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Khamenei Remarks On Netanyahu: ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला है. अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में उन्होंने इजरायल को “दुनिया का सबसे अधिक तिरस्कृत और अलग-थलग शासन” बताया. पोस्ट के साथ उन्होंने एक ऐसी तस्वीर भी साझा की जिसमें यूएन महासभा का हॉल लगभग खाली नजर आ रहा है और नेतन्याहू मंच से भाषण दे रहे हैं.

शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से जब नेतन्याहू ने भाषण देना शुरू किया, तो हॉल में विरोध के स्वर गूंजने लगे. अरब और मुस्लिम देशों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कई अफ्रीकी और यूरोपीय देशों ने भी नेतन्याहू के भाषण का बहिष्कार किया और वॉकआउट कर दिया. हालांकि, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने नेतन्याहू के समर्थन में अपनी जगह पर बना रहा. वॉकआउट की यह घटना ऐसे समय में हुई जब इज़रायल पहले से ही वैश्विक मंच पर आलोचना और अलगाव का सामना कर रहा है.

नेतन्याहू ने क्या कहा यूएन में?

अपने भाषण के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि इज़रायल जल्द से जल्द गाज़ा में “अपना काम पूरा करेगा”. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने गाज़ा पट्टी के चारों ओर लाउडस्पीकर लगाने का निर्देश दिया है ताकि उनका भाषण फिलिस्तीनी नागरिकों तक पहुंच सके. इस रणनीति का उद्देश्य वैश्विक मंच से सीधे गाज़ा में संदेश पहुंचाना था, हालांकि इस कदम को कई आलोचकों ने प्रोपेगेंडा की तरह देखा.

"परमाणु स्थलों पर हमला न हो, इसकी गारंटी चाहिए"

ईरान-इजरायल तनाव के इसी संदर्भ में, ईरान के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी गुरुवार को एक बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि ईरान तभी अपने न्यूक्लियर एनरिचमेंट प्रोग्राम को सामान्य करने पर विचार करेगा जब इज़रायल यह गारंटी देगा कि वह परमाणु स्थलों पर हमला नहीं करेगा. ईरान का यह रुख दर्शाता है कि परमाणु मुद्दे पर क्षेत्र में स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है.

क्या इजरायल अंतरराष्ट्रीय मंच पर अकेला पड़ता जा रहा है?

एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू के भाषण के दौरान जो व्यापक वॉकआउट हुआ, वह इस बात का संकेत है कि इज़रायल की नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में असंतोष गहराता जा रहा है. वर्तमान में अमेरिका जैसे सीमित सहयोगी ही इज़रायल के समर्थन में खुलकर सामने हैं.

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