Taliban Pakistan Clashes: पिछले कुछ दिनों से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सीमा संघर्ष अब थम चुका है. यह संघर्ष उस समय शुरू हुआ था जब पाकिस्तान ने अफगान सीमा के पास, काबुल के आसपास, कथित तौर पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हवाई हमले किए. इन हमलों के जवाब में अफगान तालिबान ने सीमा पार स्थित पाकिस्तानी चौकियों पर जबरदस्त जवाबी कार्रवाई की. हालांकि अब, कतर और सऊदी अरब की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों के बीच फायरिंग रुक गई है और तनाव को फिलहाल विराम मिला है.
अफगान तालिबान के प्रवक्ता मौलवी जबीहुल्लाह मुजाहिद ने रविवार को बयान जारी कर बताया कि शनिवार रात हुई भीषण झड़पों में पाकिस्तान के 58 सैनिकों की मौत हुई है, जबकि अफगान पक्ष के 9 लड़ाके शहीद हुए हैं और 16 अन्य घायल हुए. इस संघर्ष की पुष्टि अफगान मीडिया संगठन TOLOnews ने भी की है, जो लगातार घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए था.
यह संघर्ष तब और तेज हुआ जब पाकिस्तान ने यह आरोप लगाया कि अफगान क्षेत्र का उपयोग TTP जैसे आतंकी संगठन उनके देश के खिलाफ कर रहे हैं. इसके बाद पाकिस्तान की ओर से काबुल के नजदीक हवाई कार्रवाई की गई, जिसे अफगान तालिबान ने अपनी संप्रभुता पर हमला बताया.
सऊदी अरब और कतर ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
इस हिंसक टकराव को शांत करने में सऊदी अरब और कतर ने अहम भूमिका निभाई. तालिबान प्रवक्ता ने कहा, “हमने सीमा पर झड़पों को रोकने का निर्णय सऊदी अरब और कतर की मध्यस्थता और अनुरोध पर लिया है. अफगानिस्तान शांति और स्थिरता का पक्षधर है.” मध्यस्थता के लिए कतर और सऊदी अधिकारियों ने दोनों पक्षों से संवाद बनाए रखा और संयम बरतने की अपील की. इसके साथ ही, ईरान ने भी संघर्ष पर चिंता जताई और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में न डालने की सलाह दी.
सऊदी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, “पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता तनाव चिंता का विषय है. हम दोनों देशों से आग्रह करते हैं कि संयम रखें और शांति के लिए संवाद का रास्ता अपनाएं.” वहीं कतर ने भी अपने बयान में क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए कहा कि वह लोगों की सुरक्षा और शांति के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने टिप्पणी की, “पाकिस्तान और अफगानिस्तान में शांति का मतलब है पूरे क्षेत्र की स्थिरता. दोनों देशों को धैर्य से काम लेना चाहिए.”
अफगान विदेश मंत्री भारत दौरे पर, दिया बयान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी भारत के दौरे पर हैं. उन्होंने भी इस संघर्ष पर प्रतिक्रिया दी और पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर अपनी सरकार की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा, “हम पाकिस्तान के साथ सौहार्दपूर्ण और स्थिर रिश्ते चाहते हैं. कुछ ताकतें इन संबंधों को बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन दोनों देशों के आम लोग दोस्ती चाहते हैं. अफगानिस्तान की नीति 'जीरो टेंशन' की है, लेकिन यदि हमला हुआ तो हम आत्मरक्षा करना जानते हैं.”
TTP पर पाकिस्तानी कार्रवाई बना कारण
संघर्ष की जड़ में पाकिस्तान द्वारा काबुल के पास TTP ठिकानों पर किया गया हवाई हमला था. इस कार्रवाई में कई लोगों की मौत हुई, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है. अफगान तालिबान ने इस हमले को अफगान संप्रभुता पर सीधा हमला माना और जवाब में पाकिस्तान की सीमावर्ती चौकियों पर हमला कर दिया. झड़पें घंटों तक चलीं और दोनों ओर से भारी गोलीबारी हुई.
हालांकि पाकिस्तान ने अभी तक तालिबान के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह स्वीकार किया गया है कि सीमा पर हालात तनावपूर्ण हैं और सैन्य तैयारियों को बढ़ा दिया गया है.
क्षेत्रीय शांति पर खतरे की आशंका
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच ऐसा टकराव कोई नया नहीं है, लेकिन हालिया हिंसा ने डूरंड रेखा पर पहले से चले आ रहे तनाव को और गहरा कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच यह टकराव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों पर ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई और मध्य एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है.
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