Chikungunya Virus: क्या आपने कभी सोचा है कि एक मच्छर आपकी जिंदगी को हफ्तों या महीनों तक दर्द से भर सकता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं चिकनगुनिया वायरस की, जो एक बार फिर दुनियाभर के लिए चिंता का कारण बन गया है. करीब 20 साल पहले इस वायरस ने तबाही मचाई थी और अब यह दोबारा तेजी से फैल रहा है, चीन से लेकर यूरोप और अफ्रीका तक.
गुआंगडोंग (चीन) में इस साल अब तक चिकनगुनिया के 7000 से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं. वहां की सरकार ने मच्छरों की बढ़ती संख्या को कंट्रोल करने के लिए एक अनोखा कदम उठाया है, ऐसे विशालकाय ‘जाइंट मच्छर’ छोड़े जा रहे हैं, जो वायरस फैलाने वाले मच्छरों को खत्म कर सकते हैं.
वहीं WHO (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन) ने हाल ही में चेतावनी दी है कि यह वायरस अब सिर्फ एशिया ही नहीं, बल्कि यूरोप जैसे ठंडे इलाकों में भी दस्तक दे रहा है. फ्रांस, इटली और अफ्रीका के कई देशों में भी इसके केस सामने आने लगे हैं.
चिकनगुनिया क्या है?
चिकनगुनिया एक वायरल बीमारी है, जो मच्छरों के काटने से फैलती है. ये खासतौर पर Aedes aegypti और Aedes albopictus प्रजातियों के मच्छरों से फैलता है, जो दिन के समय ज्यादा एक्टिव होते हैं. सबसे पहले 1952 में तंजानिया में इसकी पहचान हुई थी. एक बार अगर मच्छर संक्रमित हो जाए, तो वह कई लोगों को बीमार कर सकता है. अच्छी बात ये है कि यह बीमारी इंसान से इंसान में सीधे नहीं फैलती, लेकिन जब मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है, खासतौर पर बरसात के मौसम में तो खतरा बढ़ जाता है.
लक्षण क्या हैं?
चिकनगुनिया के लक्षण संक्रमित मच्छर के काटने के 4 से 8 दिन बाद सामने आते हैं. इनमें शामिल हैं तेज बुखार, जोड़ों में असहनीय दर्द (हाथ, पैर, घुटने, कलाई), सिरदर्द, थकावट और मांसपेशियों में दर्द, शरीर पर रैशेज, उल्टी और आंखों में जलन (कुछ मामलों में), जोड़ों का दर्द कई बार हफ्तों या महीनों तक बना रह सकता है, जिससे चलना-फिरना तक मुश्किल हो जाता है.
इलाज और बचाव
डॉक्टरों के मुताबिक, चिकनगुनिया का कोई स्पेशल इलाज या एंटीवायरल दवा फिलहाल मौजूद नहीं है. लक्षणों के आधार पर ही इलाज किया जाता है. बुखार के लिए पैरासिटामोल, दर्द के लिए पेनकिलर, आराम और पर्याप्त पानी पीना और फिजियोथेरेपी (जोड़ों के दर्द के लिए) किया जाता है.
क्या चिकनगुनिया की कोई वैक्सीन है?
अभी तक चिकनगुनिया के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ वैक्सीन पर रिसर्च और ट्रायल्स जारी हैं. जब तक टीका नहीं आता, रोकथाम ही सबसे कारगर उपाय है.
चिकनगुनिया से कैसे बचें?
डॉक्टर और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चिकनगुनिया से बचाव के लिए सबसे ज़रूरी है मच्छरों से बचाव. इसके लिए फुल स्लीव्स कपड़े पहनें. मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें, घर के आसपास पानी जमा न होने दें. साथ ही कूलर, टंकी या बर्तन में भरा पानी साफ और ढका हुआ रखें, दरवाजों-खिड़कियों पर मच्छर रोधी जाली लगवाएं.
बरसात में खास सतर्कता बरतें
भारत जैसे देशों में, जहां हर साल मॉनसून में मच्छरों की बाढ़ सी आ जाती है, वहां चिकनगुनिया हर साल सिर उठाता है. हालांकि स्थिति नियंत्रण में रहती है, लेकिन अगर लापरवाही हुई, तो ये वायरल बुखार बड़ी महामारी में बदल सकता है.
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