US-Iran वार में उलझी रह गई दुनिया... भारत ने मार ली बाजी; 15 जुलाई को होगा बड़ा आर्थिक बदलाव, जानें क्या है खास?

Piyush Goyal On India-UK FTA: US-ईरान तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत 15 जुलाई से ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) लागू करने की तैयारी में है, जिससे निर्यात, MSME, किसानों और भारतीय पेशेवरों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.

While the world remained preoccupied with the US-Iran conflict India stole the show
AI Generated

Piyush Goyal On India-UK FTA: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच गहराते संघर्ष ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है, जबकि अमेरिका से लेकर एशिया तक शेयर बाजारों पर भी दबाव बना हुआ है. ऐसे माहौल में भारत अपनी व्यापारिक रणनीति को लगातार मजबूत करता दिखाई दे रहा है.

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए आयात और निर्यात के क्षेत्र में विविधीकरण की नीति अपनाई है. इसी कड़ी में भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब लागू होने की ओर बढ़ रहा है, जिससे भारतीय कारोबारियों और उद्योगों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है.

15 जुलाई से लागू हो सकता है भारत-ब्रिटेन एफटीए

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई से प्रभावी हो सकता है. इसके लागू होते ही भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त हो जाएगा. इस कदम से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिलेगा. साथ ही कृषि, मत्स्य पालन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को भी इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है.

वैश्विक चुनौतियों के बीच लगातार बढ़ा रहा है व्यापारिक दायरा

दुनिया में व्यापारिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत लगातार नए आर्थिक साझेदारों के साथ समझौते कर रहा है. अमेरिका के टैरिफ विवाद, मिडिल ईस्ट के हालात और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई चुनौतियों के बीच भारत ने कई देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. यूरोपीय संघ, ओमान, न्यूजीलैंड और अन्य देशों के साथ जारी बातचीत के बीच ब्रिटेन के साथ एफटीए को अंतिम रूप मिलना भारत की आर्थिक रणनीति की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

यूरोपीय संघ के साथ भी तेज होगी व्यापार वार्ता

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल 14 जुलाई से ब्रसेल्स में आयोजित होने वाली भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की बैठक में भी हिस्सा लेंगे. इस दौरान दोनों पक्ष व्यापार और तकनीकी सहयोग से जुड़े लंबित मुद्दों पर चर्चा करेंगे. सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक देशों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत कर भारतीय उद्योगों के लिए नए बाजार तैयार करना है.

भारतीय पेशेवरों को भी मिलेगा बड़ा फायदा

भारत-ब्रिटेन एफटीए केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है. समझौते में भारतीय पेशेवरों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं. इसमें 'डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन' (DCC) का प्रावधान रखा गया है. इसके तहत ब्रिटेन में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को एक निश्चित अवधि तक वहां की सामाजिक सुरक्षा योजना में योगदान नहीं देना होगा. अब तक भारतीय कर्मचारियों के वेतन का एक बड़ा हिस्सा ब्रिटेन की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में जमा होता था. नए प्रावधान के लागू होने के बाद यह राशि भारत में उनके भविष्य निधि (PF) खाते में जमा की जा सकेगी, जिससे उन्हें दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है.

किसानों, MSME और निर्यातकों के लिए नए अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि एफटीए लागू होने के बाद भारतीय कृषि उत्पाद, समुद्री उत्पाद, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, रत्न-आभूषण और कई विनिर्मित वस्तुओं की ब्रिटेन में मांग बढ़ सकती है. कम शुल्क के कारण भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यात बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.

ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पाद हो सकते हैं सस्ते

इस व्यापार समझौते का लाभ केवल भारतीय निर्यातकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं को भी इसका फायदा मिल सकता है. एफटीए लागू होने के बाद ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पादों पर सीमा शुल्क में चरणबद्ध तरीके से कमी की जाएगी. इससे लग्जरी कारों और प्रीमियम उत्पादों की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है. विशेष रूप से लैंड रोवर, जगुआर, रोल्स-रॉयस और एस्टन मार्टिन जैसी ब्रिटिश कारें पहले की तुलना में अधिक किफायती हो सकती हैं.

स्कॉच व्हिस्की पर भी घटेगी आयात शुल्क

भारत में फिलहाल स्कॉच व्हिस्की पर ऊंचा आयात शुल्क लगाया जाता है. भारत-ब्रिटेन एफटीए के लागू होने के बाद इस शुल्क में चरणबद्ध तरीके से कमी की जाएगी. इसका असर यह होगा कि आने वाले वर्षों में ब्रिटेन से आयात होने वाली स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में भी उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल सकती है.

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की दीर्घकालिक रणनीति

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक व्यापारिक चुनौतियों के बीच भारत का जोर अब केवल सीमित बाजारों पर निर्भर रहने के बजाय नए व्यापारिक साझेदारों के साथ मजबूत आर्थिक संबंध बनाने पर है. भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता इसी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है. इसके लागू होने से निर्यात, निवेश, रोजगार और उपभोक्ता बाजार चारों क्षेत्रों में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है. आने वाले समय में यह समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.