भारत में कहां गिरेगी इथियोपिया के ज्वालामुखी की राख, इन शहरों पर मंडराया खतरा, क्या होगा इसका असर?

इंडोनेशिया में सक्रिय ज्वालामुखी विस्फोट के बाद उठे विशाल ऐश प्लम (राख और सल्फर गैसों का बादल) ने अब भारत की ओर रुख कर लिया है.

Where will the ashes of Ethiopias volcano fall in India
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इंडोनेशिया में सक्रिय ज्वालामुखी विस्फोट के बाद उठे विशाल ऐश प्लम (राख और सल्फर गैसों का बादल) ने अब भारत की ओर रुख कर लिया है. सोमवार रात (24 नवंबर 2025) भारतीय निजी मौसम संस्था इंडियामेटस्काई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की.

इस अपडेट में बताया गया कि ज्वालामुखीय गैसों का यह गुबार ओमान और अरब सागर से होते हुए उत्तरी और मध्य भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. बादल में बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) मौजूद है, जबकि ज्वालामुखी की राख की मात्रा हल्की से मध्यम बताई जा रही है.

क्या भारत की आबो-हवा पर पड़ेगा असर?

इंडियामेटस्काई के अनुसार, फिलहाल यह बादल वायुमंडल की मध्य परतों (Mid-level Atmosphere) में मौजूद है. इसका मतलब यह है कि सामान्य हवा में मौजूद प्रदूषकों की तुलना में यह प्लम जमीन से काफी ऊपर तैर रहा है, इसलिए:

  • मैदानी इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर बड़े बदलाव की संभावना नहीं है.
  • यह बादल अभी भूमि की सतह तक नहीं पहुंच रहा, इसलिए सामान्य लोगों पर स्वास्थ्य प्रभाव बेहद कम होगा.

हालांकि, संगठन ने यह भी माना कि कुछ संवेदनशील इलाकों में SO₂ का स्तर बढ़ सकता है, विशेष रूप से जहां भौगोलिक स्थितियां इसे नीचे धकेल सकती हैं.

किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा खतरा?

विश्लेषण के अनुसार, यह ऐश प्लम हिमालय की ऊंची पहाड़ियों से टकराएगा. इस टकराव से गैसों का कुछ हिस्सा नीचे की ओर खिसक सकता है. ऐसे में जिन क्षेत्रों पर सबसे अधिक प्रभाव का अनुमान है, वे हैं—

1. नेपाल के पहाड़ी और मध्य पर्वतीय क्षेत्र

यहां SO₂ की मात्रा में हल्की बढ़ोतरी देखी जा सकती है.

2. उत्तर भारत का तराई इलाका

विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के ये जिले:

  • गोरखपुर
  • बहराइच
  • लखीमपुर खीरी
  • श्रमग्न तराई क्षेत्र

इन जिलों में SO₂ घनत्व कुछ समय के लिए बढ़ सकता है, हालांकि स्थिति ‘चिंताजनक’ नहीं मानी जा रही है.

3. हिमालय की तलहटी के अन्य क्षेत्र

उत्तराखंड के कुछ इलाकों में हल्का असर महसूस हो सकता है, लेकिन कोई गंभीर जोखिम नहीं बताया गया है.

भारत में कहां गिरेगी ज्वालामुखीय राख?

ज्वालामुखी की राख का धरातल तक पहुंचना सबसे बड़ा सवाल है. मौसम विश्लेषण से स्पष्ट है—

  • दिल्ली-एनसीआर
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • राजस्थान
  • उत्तर प्रदेश का अधिकांश मैदानी हिस्सा
  • इन क्षेत्रों में ऐशफॉल की संभावना बहुत कम है.

कुछ जगहों पर सूक्ष्म कण (Fine Particles) गिर सकते हैं, लेकिन मात्रा इतनी सीमित होगी कि यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित नहीं करेगा.

हवाई उड़ानों पर असर पड़ सकता है. हालांकि जमीन पर रहने वाले लोग ज्यादा प्रभावित नहीं होंगे, लेकिन विमानन क्षेत्र के लिए यह स्थिति गंभीर हो सकती है. कारण:

  • ज्वालामुखीय राख इंजनों के लिए खतरनाक होती है.
  • इससे दृश्यता, सेंसर सिस्टम और नेविगेशन प्रभावित हो सकता है.

इसलिए:

  • कुछ उड़ानों के मार्ग बदलने,
  • या उड़ान देरी होने

की संभावना जताई गई है, खासकर अरब सागर के ऊपर उड़ने वाले मार्गों पर.

स्वास्थ्य पर कितना खतरा?

इंडियामेटस्काई के अनुसार, चूंकि यह प्लम अभी उच्च स्तर पर है, इसलिए:

  • सामान्य जनता के लिए खतरा न्यूनतम है.
  • लेकिन कुछ समूहों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है:
  • दमा (Asthma) मरीज
  • क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस या COPD से पीड़ित लोग
  • बुजुर्ग लोग
  • अत्यधिक संवेदनशील रोगी

विशेषकर तराई क्षेत्र और पहाड़ी जिलों में रहने वाले लोगों को हल्की-फुल्की सावधानी रखने की सलाह है, जैसे मास्क उपयोग करना और खुले में सांस लेने से बचना.

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