India China Tension: चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश को लेकर दिए गए विवादित बयान ने एक बार फिर माहौल गरमा दिया है. लेकिन इस बार भारत ने बिना किसी लाग-लपेट के स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा. चीन चाहे जितना शोर मचा ले, यह हकीकत बदलने वाली नहीं. विदेश मंत्रालय ने चीन को आधिकारिक तौर पर फटकार लगाते हुए कहा कि अरुणाचल की एक भारतीय नागरिक को शंघाई एयरपोर्ट पर मनमाने ढंग से रोका जाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है.
मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “पेमा वांगजोम थोंगडोक के पास वैध पासपोर्ट था और वह जापान के लिए ट्रांजिट में थीं. चीन की कार्रवाई न केवल अनुचित है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा के कई प्रावधानों के खिलाफ भी है.” उन्होंने यह भी साफ किया कि बीजिंग अब तक अपने कदम के लिए कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाया है.
In response to media queries regarding statements made by the Chinese Foreign Ministry, Official Spokesperson Randhir Jaiswal says, "We have seen statements made by the Chinese Ministry of Foreign Affairs regarding the arbitrary detention of an Indian citizen from Arunachal… https://t.co/G0CC3a81lM pic.twitter.com/j73pihKqyO
— ANI (@ANI) November 25, 2025
24 घंटे वीज़ा-फ्री ट्रांजिट नियम का भी उल्लंघन
भारत ने बताया कि चीन की अपनी ट्रांजिट पॉलिसी कहती है कि सभी देशों के नागरिक 24 घंटे तक वीज़ा-फ्री ट्रांजिट में रह सकते हैं. इसके बावजूद थोंगडोक को केवल इसलिए रोका गया क्योंकि उनके पासपोर्ट में जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश लिखा था. थोंगडोक ने कहा कि तीन घंटे का सामान्य स्टॉपओवर “बुरे सपने” में बदल गया, क्योंकि अधिकारियों ने उनका पासपोर्ट “अवैध” बता दिया.
चीन की सफाई और एक बार फिर पुराना राग
जब बीजिंग से इस घटना पर सवाल किया गया, तो चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने किसी भी ‘हिरासत’ या ‘उत्पीड़न’ से इनकार कर दिया. उन्होंने दावा किया कि सभी प्रक्रिया कानून के हिसाब से की गई. उनकी कानूनी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया.
लेकिन इसके बाद माओ निंग ने वही पुरानी बात दोहराई जिसे भारत बार-बार खारिज कर चुका है, चीन ने दोबारा अरुणाचल प्रदेश को “जंगनान” यानी “दक्षिण तिब्बत” बताया और कहा कि वह इसे भारत का राज्य मानता ही नहीं.
भारत-चीन तनाव में नया अध्याय
भारत के औपचारिक विरोध (डिमार्शे) के बाद चीन की यह प्रतिक्रिया दो देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ाती है. भारत का संदेश स्पष्ट है कि अरुणाचल है, था और रहेगा भारत का हिस्सा और किसी भी भारतीय नागरिक के साथ ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है चीन के दावों पर भारत की स्थिति हमेशा की तरह दृढ़ है, नक्शों पर बनाई लाइनें इतिहास का सच नहीं बदल सकतीं.
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