Tap-To-Pay Fraud: डिजिटल पेमेंट ने सफर को आसान बना दिया है. जेब में कैश रखने की झंझट खत्म हो गई है और बस कार्ड या मोबाइल टैप करते ही भुगतान हो जाता है. लेकिन इसी सहूलियत का फायदा उठाकर साइबर ठग अब नए तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं. हाल के महीनों में सामने आया ‘घोस्ट टैपिंग’ नाम का स्कैम खासतौर पर घूमने-फिरने वालों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. भीड़भाड़ वाले टूरिस्ट स्पॉट्स पर यह फ्रॉड चुपचाप अंजाम दिया जा रहा है और पीड़ित को भनक तक नहीं लगती कि उसके खाते से पैसे निकल चुके हैं.
क्या है घोस्ट टैपिंग की पूरी कहानी?
कॉन्टैक्टलेस पेमेंट सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही ठगों ने NFC तकनीक को हथियार बना लिया है. घोस्ट टैपिंग स्कैम में स्कैमर ऐसे डिवाइस का इस्तेमाल करता है जो NFC से लैस होता है. पीड़ित के कार्ड या स्मार्टफोन में Tap-to-Pay ऑन होने पर बिना किसी OTP या पिन के ट्रांजैक्शन ट्रिगर हो जाता है. हैरानी की बात यह है कि कई मामलों में यूजर को तब तक पता नहीं चलता जब तक बैंक से अलर्ट नहीं आ जाता या अकाउंट बैलेंस चेक नहीं किया जाता.
कैसे दिया जाता है इस फ्रॉड को अंजाम?
यह स्कैम पूरी तरह Near Field Communication यानी NFC पर आधारित होता है, जिसका इस्तेमाल Apple Pay, Google Pay और Samsung Wallet जैसे प्लेटफॉर्म करते हैं. ठग अपने पास मॉडिफाइड स्मार्टफोन या पोर्टेबल NFC रीडर रखते हैं. वे एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन, भीड़भाड़ वाले बाजार या किसी बड़े इवेंट में अपने शिकार के बेहद करीब कुछ सेकंड खड़े रहते हैं. कई बार फर्जी दुकानदार छोटे पेमेंट के बहाने कार्ड टैप करवाते हैं, लेकिन असल में तय रकम से ज्यादा पैसे कट जाते हैं या यूजर को ट्रांजैक्शन का एहसास ही नहीं होता.
किन जगहों पर ज्यादा बढ़ रहा है खतरा?
भले ही किसी देश ने इस स्कैम के आधिकारिक आंकड़े जारी न किए हों, लेकिन साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह फ्रॉड उन जगहों पर ज्यादा देखने को मिल रहा है जहां टूरिस्ट मूवमेंट अधिक है. अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, इटली, थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों के लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट्स के साथ-साथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट और ट्रांजिट हब्स को हाई रिस्क जोन माना जा रहा है.
यात्री क्यों आसानी से फंस जाते हैं
सफर के दौरान लोग जल्दी-जल्दी भुगतान करने के लिए Tap-to-Pay पर ज्यादा निर्भर रहते हैं. भीड़ और जल्दबाजी के कारण सतर्कता कम हो जाती है और ट्रांजैक्शन अलर्ट पर तुरंत ध्यान नहीं दिया जाता. कई बार फर्जी दुकानदार असली वेंडर्स में आसानी से घुलमिल जाते हैं. ऊपर से विदेशी मुद्रा की वजह से यह समझने में भी वक्त लग जाता है कि कहीं ज्यादा पैसे तो नहीं कट गए.
सफर में खुद को सुरक्षित रखने के तरीके
यात्रा के दौरान जब जरूरत न हो, तो स्मार्टफोन में NFC को बंद रखना एक समझदारी भरा फैसला हो सकता है. RFID-ब्लॉकिंग वॉलेट या कार्ड स्लीव का इस्तेमाल करने से कार्ड को वायरलेस स्कैनिंग से बचाया जा सकता है. अनजान स्टॉल या संदिग्ध दुकानों पर Tap-to-Pay से पेमेंट करने से बचना चाहिए और बैंक ऐप में इंस्टेंट ट्रांजैक्शन अलर्ट हमेशा ऑन रखना जरूरी है. मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, खासकर वे जिनमें फिंगरप्रिंट या फेस आईडी जैसी बायोमेट्रिक सिक्योरिटी होती है.
क्या अब भी सुरक्षित है Tap-to-Pay?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि Tap-to-Pay तकनीक अब भी कार्ड स्वाइप या मैग्नेटिक स्ट्रिप वाले पेमेंट से ज्यादा सुरक्षित है, क्योंकि इसमें एन्क्रिप्शन होता है और कार्ड डिटेल सीधे शेयर नहीं होती. हालांकि, भीड़भाड़ और अनजान जगहों पर इसका गलत इस्तेमाल होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता आपको बड़ी आर्थिक परेशानी से बचा सकती है.
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